Tuesday, 30 January, 2007

मैं वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर क्यों आया

बहुत से चिट्ठाकार भाई खासकर अमित जी और सागर भाई पूछ रहे हैं कि मैं वर्डप्रैस.कॉम से ब्लॉगर पर क्यों आया। संजय भाई भी हैरान हैं कि ऐसा किस्सा पहली बार सुना। जैसा कि मैंने कहा था विस्तार से इसका कारण बताऊँगा। लेकिन इससे पहले संक्षेप में यह बताना सार्थक होगा कि मैंने पूर्व में वर्डप्रैस.कॉम पर अपना चिट्ठा बनाया ही क्यों था।

smile_eyeroll मैंने अपना पहला चिट्ठा ब्लॉगर से वर्डप्रैस.कॉम पर क्यों शिफ्ट किया था।

यह काफी दिन पहले की बात है जब ब्लॉगिंग से परिचय ही हुआ था, हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में तो तब कुछ मालूम ही नहीं था। उस समय पुराना ब्लॉगर था जिस पर आज जैसी सुविधाएं नहीं थी। तो भाई ब्लॉगर पर अपना पहला ब्लॉग बनाया, क्योंकि ब्लॉगर तब भी और आज भी मुफ्त ब्लॉगिंग सेवाओं में सबसे प्रसिद्ध है। प्रयोग आरंभ करने के शीघ्र बाद ही मुझे निम्नलिखित दिक्कतें पेश आईं।

» HTML संपादन के बिना कोई भी काम करना असंभव थ।

खैर ब्लॉगर पर ब्लॉग बनाने के बाद मुझे कुछ समय बाद अपने साइडबार में कुछ लिंक जोड़ने जैसे ब्लॉगरोल आदि की जरुरत महसूस हुई तो ब्लॉगर की हैल्प से पता चला कि इसके लिए HTML template में संपादन करना होगा। अब उन दिनों मुझे HTML का सिर पैर कुछ भी पता नहीं था, साथ ही इस हेतु नेट पर उपलब्ध संसाधनों का भी ज्ञान नहीं था। तो मुझे बहुत दिक्कत हुई।

» श्रेणियाँ (कैटेगरी) नहीं थी।

उन्हीं दिनों मुझे कैटेगरी (श्रेणियाँ) के बारे में भी पता चला जो कि ब्लॉगर में उपलब्ध नहीं थी। यह तब ब्लॉगर की सबसे बड़ी कमी मानी जाती थी। वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम के चिट्ठों पर इस फीचर को देखकर तथा इसका लाभ/उपयोग जानकर मुझे बड़ा रश्क हुआ। यह उस समय के दौर में ब्लॉगर से वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम पर जाने का एक मुख्य कारण हुआ करता था।

» थीम्स बदलना लंबा और मुश्किल काम था।

इसके अतिरिक्त एक अन्य बात ये थी कि तब ब्लॉगर में थीम बदलना बड़ा मुश्किल काम था, इसके लिए टैम्पलेट डाउनलोड कर कॉपी-पेस्ट करना पड़ता था। जो कि मेरे जैसे नए आदमी के लिए काफी मुश्किल और उबाऊ काम था।

कुल मिलाकर उस समय ब्लॉगर में ढंग के काम करना सिर्फ उन्हीं के बस का था जो HTML अच्छी तरह जानते हों। मुझे तो टैम्पलेट पर तब हाथ लगाते भी डर लगता था कहीं कुछ गड़बड़ हो गई तो गया काम से।

तो जी मैंने विकल्पों की तलाश आरंभ की, नेट पर कई ब्लॉगिंग टूल्स के बारे में पढ़ा तो पता चला कि एक अन्य सेवा वर्डप्रैस भी काफी प्रचलित और प्रसिद्ध है। उससे कुछ ही समय पहले वर्डप्रैस.कॉम सेवा शुरु हुई थी। कुछ समय तो मुझे वर्डप्रैस और वर्डप्रैस.कॉम का फर्क ही नहीं समझ आया था। इस दौरान मैंने वर्डप्रैस.कॉम के कुछ चिट्ठे देखे उनकी सुन्दर थीम्स ने मेरा मन मोह लिया। साथ ही कैटेगरी की सुविधा भी थी। मैंने WP.Com पर एक ब्लॉग बनाया और उसका आसान संचालन, साइडबार विडगेट्स आदि देख कर अत्यंत प्रभावित हुआ। उस समय मुझे लगा कि लोग होस्टिड वाला WP का झंझट क्यों करते हैं जब इस में भी सब उसी तरह है। यह तो बाद में WP.Com प्रवास के दौरान धीरे-धीरे उसकी सीमाएं तथा कमियाँ मेरे सामने आती गई।

smile_baringteeth वे कारण जिनसे मेरा WP.Com से मोह-भंग हुआ।

» HTML template संपादित नहीं कर सकते।

WP.Com में मेरी एक फेवरिट थीम होती थी Simpa, लेकिन उसमें एक कमी थी कि हेडर इमेज लगाने का विकल्प नहीं था। अब यदि में टेम्पलेट संपादित कर सकता तो इस थीम में भी हेडर इमेज जोड़ सकता था। इसी तरह में फुटर टेक्स्ट भी नहीं बदल सकता था। इसके अतिरिक्त आप फेवीकॉन आदि नहीं बदल सकते।

WP.Com में टैम्पलेट संपादन की आज्ञा न आज है और न ही भविष्य में कभी मिल सकेगी क्योंकि वहाँ थीम सभी प्रयोगकर्ताओं में शेयर होती हैं अतः यदि एक यूजर अपनी थीम संपादित करेगा तो सभी की साथ में बदल जाएगी। एकमात्र उपलब्ध विकल्प है CSS संपादन, लेकिन वह पेड विकल्प के रुप में उपलब्ध है।

» फ्लैश प्रयोग नहीं कर सकते।

एक बार मैंने एक ब्लॉग पोस्ट में एक ई-कार्ड जो कि आम तौर पर फ्लैश फॉर्मेट में होते हैं जोड़ने की सोची। दिया गया कोड प्रयोग करने तथा पोस्ट पब्लिश करने पर फ्लैश आया नहीं। Faq तथा फोरम से पता चला कि Embed टैग वर्जित है अतः फ्लैश प्रयोग नहीं कर सकते। इस कारण आप ई-कार्ड, ऑनलाइन गेम्स आदि चिट्ठे पर नहीं लगा सकते।

» Java Script वर्जित तथा सीमित HTML टैग।

एक बार भाई रमण कौल जी के चिट्ठे के साइडबार में हिन्दी ब्लॉगर सूची देखी तो पाया कि उसके लिए कोड Java Script में है, अतः लगा नहीं सकता था। तो मैंने उनसे पूछा कि क्या केवल HTML के प्रयोग द्वारा मैं ऐसी ड्रॉपडाउन मीनू वाली सूची बना सकता हूँ, उन्होंने मुझे उसके लिए सैम्पल HTML कोड दिया, उसे मैंने अपने चिट्ठे के साइडबार में लगाया तो बात बनी नहीं, Faq/फोरम में खोज करने पर मालूम हुआ कि Form टैग वर्जित है। अतः WP.Com के चिट्ठे पर कहीं भी ड्रॉपडाउन मीनू नहीं लगा सकते।

अधिकतर बार मैंने पाया कि कुछ मामलों को छोड़कर Java Scripts के लिए समांतर HTML कोड उपलब्ध नहीं होता। अर्थात HTML , Java Script वाला काम नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त कई उपयोगी HTML टैग वर्जित हैं।

चिट्ठों के लिए कई तरह की थर्ड-पार्टी टूल्स तथा सेवाएं आजकल प्रचलित हैं जो मेरे इस नए चिट्ठे के साइडबार में आप देख सकते हैं। उपरोक्त कारणों से आप उन्हें WP.Com के चिट्ठे पर नहीं लगा सकते।

» सीमित पॉडकास्टिंग विकल्प।

WP.Com में आप केवल गूगल वीडियो, यूट्यूब, डेलीमोशन वीडियो तथा ग्रुपर वीडियो लगा सकते हैं। ऑडियो में एकमात्र विकल्प Odeo है। इसका कारण यह है कि ऑडियो-वीडियो पोस्ट करने हेतु कोड में Embed टैग होता है जो कि जैसा पहले मैंने बताया वर्जित है।

कहने की जरुरत नहीं कि आजकल एक से बढ़कर एक पॉडकास्टिंग सेवाएं मुफ्त में उपलब्ध हैं। कई साइटों पर मजेदार और उपयोगी ऑडियो-वीडियो हैं जो कि हम WP.Com पर लगा सकते नहीं।

और तो और Odeo का जो प्लेयर उपलब्ध है वो बड़ा और भद्दा है। जबकि इसी के कई सुन्दर और कॉम्पेक्ट प्लेयर Odeo साइट द्वारा उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए इस पेज पर अंतिम दो प्लेयर देखिए।

» पोल वगैरा नहीं लगा सकते।

अपनी सुपरहिट पोस्ट बारहा, हिन्दीराइटर तथा इंडिक IME की तुलनात्मक समीक्षा में मुझे पोल लगाने की जरुरत महसूस हुई। मैं पोल के रिजल्ट इस पोस्ट में शामिल करना चाहता था। कुछ साइटों से कोड लेकर लगाया तो बात बनी नहीं (इस पेज पर देखिए)। फोरम में सर्च किया तो पता लगा कि पोल नहीं लगा सकते यदि एकाध तरीका था भी तो बहुत सीमित सा। मजबूरन मुझे परिचर्चा में पोल रखकर उसका लिंक पोस्ट पर देना पड़ा लेकिन जितने पाठक उस पोस्ट को पढ़ने आए उसमें से केवल ४ लोग उस पोल पर गए जिससे कि पोल का उद्देश्य ही खत्म हो गया। अब यदि वही पोल चिट्ठे पर रखा जाता तो मेरा उद्देश्य पूरा हो जाता।

जैसा कि देवाशीष भाईसाहब ने चिट्ठाचर्चा पर कहा मैं संवाद की महिमा में बहुत यकीन रखता हूँ, मुझे अक्सर कई मामलों पर साथी चिट्ठाकारों तथा पाठकों की राय लेने की आवश्यकता होती है जिसके लिए पोल एक श्रेष्ठ माध्यम है। और ये वहाँ पर संभव नहीं था।

» भविष्य में भी कोई उम्मीद नहीं।

अगर WP.Com के Faq/फोरम में पढ़ा जाए तो ये बात समझ आती है कि Java Script, Embed टैग, टैम्पलेट संपादन आदि सुविधाएं कभी हासिल नहीं होंगी। इसके अतिरिक्त कई अन्य काम नहीं किए जा सकते जैसे कि विज्ञापन यथा एडसेंस आदि लगाना। अब मैं तो इसका प्रयोग करता नहीं पर कई चिट्ठाकारों के लिए यह बहुत जरुरी है।

कुछ समय पहले ब्लॉगर ने नई सुविधा दी कि आप चाहें अपना डोमेन नेम भी चिट्ठे के लिए प्रयोग कर सकते हैं। रमण भाई के चिट्ठे पर यह खबर पढ़ी तो मैंने कहा कि WP.Com वाले यह सुविधा पहले से दे रहे हैं। रमण जी ने ध्यान दिलाया कि इसमें यह सुविधा Paid है, जबकि मैं इसे मुफ्त समझता था। इसी दिन से मेरे दिमाग में ब्लॉगर पर जाने के बारे में विचार आने लगे।

अगर उनका अब तक का ट्रैंड देखा जाए पता चलता है कि WP.Com वाले यदि कोई सुविधा देते भी हैं तो उसके लिए शुल्क वसूल करते हैं। यदि भविष्य में वो कोई छूट जैसे विज्ञापन लगाना आदि देंगे भी तो उसकी फीस वसूलेंगे। smile_sarcastic

अब भी मुझे ब्लॉगर में एक कमी दिखती थी - सुन्दर थीम्स का अभाव। इसी दौरान मुझे कई चिट्ठे दिखे जो कि अत्यंत सुन्दर और व्यवस्थित थे, बल्कि एकाध बार तो देखकर मैं जान ही नहीं पाया कि ये ब्लॉगर द्वारा संचालित हैं। अर्थात यदि थोड़ी मेहनत की जाए तो आप ब्लॉगर के चिट्ठे को मनचाहा रुप दे सकते हैं।

सीनियरों की राय को मैं हमेशा तवज्जो देता हूँ अतः मैंने रविरतलामी जी से सलाह ली जो ब्लॉगर के पुराने समर्थक हैं। उनका एक तर्क काफी सही लगा कि ब्लॉगर गूगल के हाथों में है अतः इसका भविष्य उज्जवल है।

इधर नए ब्लॉगर (पूर्व में ब्लॉगर बीटा) के आने के समय से ही इसकी काफी चर्चा और तारीफ सुनने को मिल रही थी। अंतिम पड़ताल के तौर पर मैंने एक टैस्ट ब्लॉग बनाया और इसकी फीचर्स की जाँच की तो पाया कि इसकी कार्यविधि अब बिल्कुल वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम जैसी है। ब्लॉगर ने अपनी अधिकतर कमियाँ जैसी कैटगरी न होना, मुश्किल थीम परिवर्तन, पोस्ट-पब्लिशिंग आदि दूर कर ली थी। वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम से भी बेहतर साइडबार विडगेट्स यथा टेक्स्ट, पिक्चर, लिंक-लिस्ट, फीड आदि उपलब्ध हैं। Fonts and Colors के द्वारा बिना HTML संपादन के भी चिट्ठे का रंग-रुप बदला जा सकता है। इसके अतिरिक्त अब पूरे चिट्ठे पर पोस्ट, साइडबार विडगेट्स आदि के साथ एडिट लिंक दिए गए हैं जिसने चिट्ठे का संचालन बहुत आसान कर दिया है। कुल मिलाकर ब्लॉगर ने WP.Com की सुविधाएं तो अपनाई ही कई नई सुविधाएं भी दीं।

अब ब्लॉगर पर आने के मेरा अंतिम फैसला हो ही गया। आगे आपको पता ही है कि काफी टाइम पुरानी पोस्टों को इधर लाने का तरीका सोचता रहा। फिर १५-१६ दिन गायब रहकर पुरानी पोस्टें इधर लाया, चिट्ठे पर रंग-रोगन वगैरा किया आदि।

smile_embaressed WP.Com की कुछ फीचर्स जिनकी अब भी याद आती है/कमी महसूस होती है।

» सुन्दर थीम्स।

अब इस बारे में क्या कहूँ, सुन्दर थीम्स वर्डप्रैस/वर्डप्रैस.कॉम की एक बहुत बड़ी खासियत है, उनका रंग-संयोजन, मोहक डिजायन आदि की जितनी तारीफ की जाए कम है। बिना किसी मेहनत (संपादन आदि) के इनका आनन्द उठाया जा सकता है। यद्यपि WP.Com हेतु सीमित ही थीम्स उपलब्ध हैं लेकिन दो थीम्स Regulus और Simpa मुझे बहुत पसंद थीं।

» इंटीग्रेटिड सर्विसिज।

अनेक इंटीग्रेटिड सर्विसिज जैसे Stats, Friend Surfer, Tag Surfer, Blogs of the day, My Comments आदि बहुत ही उपयोगी और मजेदार थी। इसके अतिरिक्त WP.Com वाले ऐसी सेवाएं अक्सर जोड़ते रहते हैं।

» सॉरी, नो स्माईली।

स्माईलगिरी की महता तो गुरुवर समीरानन्द जी से बेहतर तो कौन बता सकता है। ब्लॉगर ग्राफिक स्माईली नहीं दिखाता न ही पोस्ट में न ही टिप्पणियों में। :(

» टिप्पणी सिस्टम।

ब्लॉगर पोस्टिंग के मामले में जितना उदार है टिप्पणी के मामले में उतना ही कंजूस। केवल दो ही टैग उपलब्ध हैं - Bold तथा Italic के लिए.

जबकि WP.Com में Blockquote, Code आदि काफी उपयोगी टैग उपलब्ध है।

WP.Com टिप्पणियों को अलग-अलग रंगों में सुन्दर रुप से दिखाता है जिससे वो और पठनीय बन जाती हैं। इसके अतिरिक्त ब्लॉगर में टिप्पणी के लिए एक अलग पेज खुलता है जो खीझभरा है जबकि WP.Com में पोस्ट वाले पेज पर ही इस कार्य हेतु बॉक्स होता है। पाठक गण स्माईली नहीं लगा सकते यह भी बहुत बड़ी कमी है। ब्लॉगर का टिप्पणी सिस्टम मुझे काफी खलता है, इस बारे में विस्तार से एक पोस्ट लिखूँगा।

और भी कई बातें हैं जिनकी कमी खलती है। परंतु पते की बात यह है कि ब्लॉगर में जुगाड़ (हैक) द्वारा अधिकतर ऐसे काम किए जा सकते हैं। यह ब्लॉगर का एक बहुत ही स्ट्रॉन्ग प्वांइट है। thumbs_up

इसके बावजूद आज भी कहूँगा कि अपने आसान संचालन तथा इंटीग्रेटिड सर्विसिज के कारण पूरी तौर से अनुभवहीन, नौसिखिए तथा नॉन-टेक्नीकल व्यक्ति के लिए WP.Com ही बेहतर है। परंतु यह सपष्ट है कि एक एडवांस्ड ब्लॉगर (चिट्ठाकार) के लिए WP.Com उपयुक्त नहीं।

ब्लॉगर पर थोड़ा समय बिताने के बाद 'ब्लॉगर-हैक्स' सीरीज चालू करुँगा। मुझे आशा है नई जगह पाठशाला अच्छी जमेगी। हाँ WP.Com पर भी कुछ कक्षाएं लगाऊँगा लेकिन कुछ समय बाद।

उम्मीद है वो कारण सपष्ट कर पाया हूँ कि मैंने ये दल-बदल क्यों किया। अगर आप अभी तक ये पोस्ट पढ़ रहे हैं तो धन्यवाद ! smile_regular

20 टिप्पणियाँ:

Jitendra Chaudhary ने कहा...

अब तुम्हरा का कहें, इधर उधर भटक रहे हो बार बार, लगातार। अब कल को कोई तीसरा कुछ नयी चीज लगाएगा तो वहाँ टहल जाओगे? तुम्हारा हाल अगर नटशैल मे कहा जाए तो फिल्म खून भरी मांग वाले कबीर बेदी की तरह हो गया है।
रेखा------>सोनू वालिया------->रेखा
अपने घर मे जाओ, सबसे ज्यादा सुखी। पूरी आजादी, लेकिन जिम्मेदारी बढ जाती है। खैर, भैया, कभी ना कभी तो घर बसाना ही पड़ता है, आज नही कल, कभी ना कभी तो मोह भंग होगा ही इस ब्लॉगर से भी।

Pankaj Bengani ने कहा...

मास्टरजी आप चाहे किसी भी विद्यालय में पढाएँ हम तो वही एडमिशन ले लेंगे... तो भई लेक्चर लगाते रहिए बस...


वैसे वेलकम टु द क्लब.. अपने ब्लोगर वाले हैं.. ;-)

Shrish ने कहा...

बात तो सही कही आपने कि अपने घर जैसा सुख कहीं नहीं मिलता। पर अब यहीं ठहरने का निश्चय है क्योंकि अभी जिम्मेदारी उठाने का न वक्त है न पूर्णरुप से आत्मनिर्भर हूँ।

"अब कल को कोई तीसरा कुछ नयी चीज लगाएगा तो वहाँ टहल जाओगे?"

काफी सोच-समझ कर इधर का रास्ता पकड़ा है जी। यहाँ लगभग सब जुगाड़ लगाए जा सकते हैं सिवाय PGP Script जैसी अति-आधुनिक चीजें पर ऐसी चीजों से मेरे ख्याल से इस जन्म में पाला पड़ेगा नहीं। फिर हिन्दी के वरिष्ठ ब्लॉगर रविरतलामी जी और अंग्रेजी के वरिष्ट ब्लॉगर अमित अग्रवाल जी अगर इतने सालों से यहाँ डटे हैं, उनका काम धांसू चल रहा है तो मेरा तो मजे से चल जाना चाहिए।

Hindi Blogger ने कहा...

मैं शुरू से ब्लॉगर पर ही रहा हूँ...वो भी पुराने वाले पर. काम चल रहा है, सो बना हुआ हूँ. लेकिन आपके लेख को पढ़ कर तो लग रहा है कि ब्लॉगर पर बने रहना कोई बुरा फ़ैसला नहीं है. ब्लॉगर और वर्डप्रेस के बारे में इतनी सारी जानकारी देने के लिए धन्यवाद!

RCMishra ने कहा...

ब्लॉगर पर आने के लिये बधाई।
Wordpress Style का टिप्पणी बॉक्स भी ब्लॉगर Templates पर उपलब्ध है। मैने कुछ दिन प्रयोग किया था।
मैने अपने सर्वर पर भी Wordpress स्थापित करके देख लिया है, वहाँ बहुत Customization किया जा सकता है, Adsense मनचाहे स्थान पर लगा सकते हैं। पर मेरे जैसे Non-technical के नया ब्लॉगर बहुत ही अच्छा है।

Raviratlami ने कहा...

बहुत बढ़िया तुलना.
नए ब्लॉगर के एजेक्स आधारित तकनीक तथा विजेट्स के कमाल आपको अंग्रेज़ी चिट्ठों में नित नए देखने को मिल जाएंगे. कुछ समय बाद चिट्ठों के थीम की भी कमी नहीं रहेगी.

परंतु, जाहिर है, बहुत सारी सुविधाएँ दोनों जगह नहीं मिल सकतीं.

ब्लॉगर हैक्स श्रेणी के लेखों का इंतजार रहेगा, खासकर हिन्दी चिट्ठों की उपयोगिता के मद्देनजर.

संजय बेंगाणी ने कहा...

वाह! क्या तुलनात्मक लेख लिखा है. सारे संशय दूर हो गए.
अब जो भी कहेगा किस पर ब्लोग बनाऊं, आपकी यह पोस्ट थमा देंगे. पढ़लो और निर्णय लो.

Shrish ने कहा...

@ Pankaj Bengani,
पंकज जी सपोर्ट के लिए धन्यवाद। अच्छा एक बात नहीं समझ आई। ब्लॉगर पर अपने डोमेन नेम का विकल्प अभी आया है। आप पहले से 'मंतव्य' के लिए ब्लॉगर का प्रयोग करते हैं तथा डोमेन नेम भी अपना प्रयोग करते हैं। पुराने ब्लॉगर में ऐसा केवल FTP द्वारा पोस्ट पब्लिशिंग से ही संभव था। क्या आप इसी विधि से ही पोस्ट पब्लिश करते हैं। जरा ये चक्कर समझाइए।

और पंकज भैया नए ब्लॉगर पर कब आ रहे हो ?

@ RCMishra,
वर्डप्रैस स्टाइल के टिप्पणी बॉक्स के बारे में सुना है कि उसमें कुछ सुरक्षा संबंधी लोचा है। वैसे उस बारे में भी कभी ट्राई करने की सोचा तो है।

फिलहाल ब्लॉगर पर एक ही दिक्कत आ रही है। WLW के साथ इसकी कैमिस्ट्री पूरी तरह से बैठ नहीं रही, ये आप भी जानते ही हैं।

वर्डप्रैस का फैन होने के बावजूद अभी इसके चक्कर में क्यों नहीं पड़ना चाहता यह भी जल्द ही बताऊँगा।

@ Raviratlami,
रवि जी शुक्रिया, आपने डिसीजन लेने में काफी मदद की है। ब्लॉगर से संबंधित लेख जल्द ही शुरु करता हूँ।

@ संजय बेंगाणी,
संजय भाई, ये लेख तो सिर्फ साथियों की जिज्ञासा शांत करने हेतु था। आगे दो लेख लिखने की योजना है जिनके बाद यह प्रश्न पूरी तरह हल हो जाएगा कि चिट्ठा किस पर बनाया जाए।

उडन तश्तरी ने कहा...

बहुत ज्ञानवर्धक और तुलनात्मक लेख. आने वाले समय में लोगों के संशय दूर करने में यह लेख बहुत सहयोगी सिद्ध होगा.
ब्लागर पर स्वागत है, हम भी शुरु से यहीं पर जमें हैं. बधाई.

सागर चन्द नाहर ने कहा...

आसान संचालन तथा इंटीग्रेटिड सर्विसिज के कारण पूरी तौर से अनुभवहीन, नौसिखिए तथा नॉन-टेक्नीकल व्यक्ति के लिए WP.Com ही बेहतर है।

फ़िलहाल तो अपन भी उसी नौसखिये वाली श्रेणी में आते हैं सो अभी WP से ही काम चला लेते हैं आगे देखा जायेगा।
इस लेख में इतनी तकनीकी बातें की है कि आधा लेख तो अपने सर के उपर से गया।

जगदीश भाटिया ने कहा...

बहुत सही तुलना की आपने।
जावा न लगाने देने के पीछे वर्ड्प्रैस का तर्क है सुरक्षा। तो यह जानना रुचिकर होगा कि ब्लागर क्या वर्डप्रैस से कम सुरक्षित है?

ब्लागर पर टिप्पणी करना भी कई बार मुश्किल हो जाता है :(

जगदीश भाटिया ने कहा...
This post has been removed by a blog administrator.
Shrish ने कहा...

@ Hindi Blogger,
हिन्दी ब्लॉगर जी, नए ब्लॉगर पर आ जाइए, सीन बदल चुका है। बहुत मजा आएगा आपको। हाल ही में मनीषा ने भी शिफ्ट किया है।

@ सागर चन्द नाहर,
अरे सागर भाई, हम कौन सा कोई आईटी उद्योग से हैं, वो तो गूगलदेव और W3Schools की कृपा है।

@ जगदीश भाटिया,
भाटिया जी, इतना तो सच है कि वर्डप्रैस.कॉम के चिट्ठे फटाफट खुलते हैं (खुलेंगे क्यों नहीं लिखने के अलावा कुछ करने देते हैं :))

हाँ ब्लॉगर पर टिप्पणी में अक्सर दिक्कत होती है। इस बारे में भी लिखने वाला हूँ।

Ajay ने कहा...

nice pandit ji bahut badiya kaam kiya hai aapne maine aapka blog achank hi site ko search karte hue pada mujhe ye jankar bahut hi khusi hui hai ki blog hindia me bhi likh sakte hai.

Badhai ho

I am from bhopal
my name is ajay

Thanks

Raman Kaul ने कहा...

श्रीश, वर्डप्रेस में जो अच्छाइयाँ हैं, वे वर्डप्रेस.ऑर्ग पर हैं, न कि वर्डप्रेस.कॉम पर। यानी वर्डप्रेस डाउनलोड कर के, अपने सर्वर पर स्थापित कर के, आप अपनी साइट पर कुछ भी करने में स्वतन्त्र रहते हैं - पर उस के लिए डोमेन नेम चाहिए, होस्ट चाहिए। वर्डप्रेस.कॉम ब्लॉगस्पॉट के सामने कहीं नहीं टिकता, इस कारण आप ने बहुत अच्छा किया ठिकाना बदल कर। वर्डप्रेस.कॉम में एक और कमी यह है कि वह आप को गूगल विज्ञापन नहीं लगाने देता। ज़रूरी नहीं कि आप लगाना चाहते हों, पर यह प्रतिबन्ध क्यों? फिर यदि आप का चिट्ठा सफल है, तो क्यों न उस का लाभ उठाया जाए, कुछ नहीं तो वेब होस्टिंग का ही खर्चा निकल आएगा। और वास्तविक सफलता तो तब होगी, जब कुछ सफल ब्लॉगरों की तरह आप ब्लॉगिंग को अपना पेशा बना सकें - वह हिन्दी की भी जीत होगी और हिन्दी चिट्ठाकारी की भी।

Shrish ने कहा...

@ Ajay,
धन्यवाद अजय जी, मैं आपकी हैरानी समझ सकता हूँ, एक समय मुझे भी इस बारे में पता नहीं था और पहली बार कुछ हिन्दी ब्लॉग देखकर मैं भी आश्चर्यचकित हुआ था। फिर मैंने भी हिन्दी ब्लॉगिंग शुरु की और देखते ही देखते सिर्फ दो-तीन महीनों में ही मेरे यहाँ बहुत से मित्र बन गए।

मैं आपके प्रोफाइल पर गया था पर 'Access Denied' का संदेश मिला। मैं शीघ्र ही हिन्दी ब्लॉगिंग संबंधी कुछ लेख लिखने वाला हूँ। कृपया अपना ईमेल पता दें ताकि मैं आपको सूचित कर सकूं।

@ Raman Kaul,
रमण जी, मैं भी ब्लॉगर पर जरा दूर की सोच कर ही आया हूँ। अब आज नहीं तो हो सकता है मुझे कुछ समय बाद एडसेन्स लगाने की जरुरत पड़े। उस दिन ब्लॉगर पर आना और सार्थक होगा।

रह गई बात कुछ रेयर केसिज में जैसे PGP Script आदि जैसी चीजों का मुझे थोड़ा बहुत प्रयोग करना पड़ जाए तो आजकल उसके लिए भी मुफ्त के जुगाड़ मौजूद हैं जिनसे थोड़ा बहुत काम तो चलाया ही जा सकता है।

Tarun ने कहा...

ऐसा है भैय्या कि तुम नेट के किसी भी कोने पर रहो बस उस कोने का पता देते रहियो, हम वही आके पढ लिया करेंगे। पढने वालों के लिये क्या ब्लोगर क्या वर्डप्रेस वो तो पंडितजी को पडने आते हैं।

उन्मुक्त ने कहा...

मैं तो दोनो नाव पर पैर रखे हूं। ब्लौगर और वर्ड-प्रेस दोनो पर लिखता हूं। बस चिट्ठों का उद्देश्य अलग अलग है।

Shrish ने कहा...

@ Tarun,
आपके प्यार के लिए शुक्रिया तरुण भाई।

@ उन्मुक्त,
उन्मुक्त भाई, आपके मिलते-जुलते दो-तीन चिट्ठों से में भ्रमित हूँ। कृपया ये बताएं आपका मुख्य वाला चिट्ठा कौनसा है।

उन्मुक्त ने कहा...

श्रीष जी, मैं तीन चिट्ठे लिखता हूं। मुख्य चिट्टा ब्लॉगर में उन्मुक्त है। दूसरा चिट्टा वर्ड प्रेस पर छुटपुट है। इसमें अन्तरजाल पर जो आता रहता है उस पर लिखता हूं। तीसरा चिट्ठा लेख है। मैं जो उन्मुक्त चिट्ठे पर कड़ियों में लिखता हूं उसे एक जगह कर इस चिट्ठे पर डालता हूं। इसके बाद उसको हिन्दी वीकिपीडिया पर भी डालता हूं।
मैं पॉडकास्ट बकबक नाम से करता हूं।

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