Sunday, 25 February, 2007

फंसना फंसाना सीरीज : पंद्रह यक्ष प्रश्न और उनके जवाब

काफी दिन हुए इधर एक अंग्रेजी बीमारी फैली थी। अब हमारे अमित भाई दोनों भाषाओं में लिखते हैं तो जी इनके इंग्लिश मित्रों ने इनको लगाई और इनके माध्यम से ये बीमारी हिन्दी जगत में भी फैल गई। अब यह बीमारी है बहुत खतरनाक एक बार शुरु हो जाए तो महामारी का रुप ले लेती है। वैसे रवि जी ने बताया कि यह बीमारी पहले भी एक बार चिट्ठाजगत में फैल चुकी है।

अब इधर कुछ समय से व्यस्त भी था और लाइट की पुरातन समस्या के कारण भी कुछ दिनों से चिट्ठे नहीं पढ़ पाया था। कल परसों सुबह नारदमुनि के दर्शन करने गया तो पाया कि मैथिली जी ने मुझे टैग किया है। फिर देखा कि लावण्या जी भी टैगिया चुकी हैं, हिम्मत करके आगे चिट्ठे देखने शुरु किए तो प्रत्यक्षा जी भी टैग लिए खड़ी थीं। वो तो बाकायदा मेरे चिट्ठे पर टिप्पणी भी छोड़ गई कि कहीं में पतली गली से न निकल लूँ। wink

अब भैया ये नियम तो मालूम था कि अगर बंदा पहले ही टैग होकर जवाब दे चुका हो तो दुबारा होने पर उसकी इच्छा है दे न दे। लेकिन यहाँ तो हमें इकट्ठे ही फंसा लिया गया। अब ये तो वही सिचुएशन हो गई कि इस पर्चे के आगे दस पर्चे छ्पवा कर बांट दो नहीं तो अनर्थ होगा। चिट्ठाजगत के संदर्भ में कहें तो अपने जवाब देकर पाँच और लोगों को फंसाओ नहीं तो तुम्हारा चिट्ठा कोई नहीं पढ़ेगा। ऐसी कल्पना ही करके दिल घबरा गया और मैंने फुरसतिया जी का स्मरण करके सभी प्रश्नों के जवाब देने की ठान ली। eek

सबसे पहले मैथिली जी की पोस्ट पढ़ी तो पहले उनके प्रश्नों के जवाब...

१. आपका सबसे पसंदीदा लेखक कौन है ?

जी कोई एक नहीं क्योंकि मैंने कुछ ऐसा साहित्य पढ़ा ही नहीं। बचपन मैं घर मैं रखी पुस्तकों में पौराणिक कहानियाँ पढ़ा करता था। हर तरह की कहानियाँ पढ़ना अच्छा लगता था। प्रेमचंद और रवीन्द्रनाथ की कुछ कहानियाँ बहुत अच्छी लगीं। थोड़ा बड़ा हुआ तो इंग्लिश नॉवल और कहानियाँ (हिन्दी में अनुवादित) पढ़ने का शौक हुआ, उन कहानियों में पश्चिम का लाइफस्टाइल आकर्षित करता था। १२वीं के दिनों में घर में छुपाकर जेम्स हेडली चेज के जासूसी उपन्यास पढ़ता था।

कुल मिलाकर ऐसा साहित्य प्रेमी रहा नहीं कि एक लेखक का नाम ले सकूं।

२. आपने सर्व प्रथम किस हिन्दी चिट्ठे की किस प्रविष्टि को अपने कम्प्यूटर पर कापी कर के रखा.

मैथिली जी ने बहुत स्पेशल किस्म का सवाल पूछा। शुक्र है आपने ये नहीं पूछा कि पहली पोस्ट कौन सी पढ़ी थी क्योंकि यह तो अब याद भी नहीं। पहले तो मैंने सोचा कि आपके सवाल का जवाब नहीं दे पाऊंगा पर फिर ध्यान आया कि अभी भी कम्प्यूटर में वो पोस्टें पढ़ी होगी। मैं वेबपेज कॉपी करने के लिए फायरफॉक्स एक्सटेंशन स्क्रैपबुक का प्रयोग करता हूँ अतः करीब पंद्रह मिनट की मेहनत के बाद ढूंढ ही निकाला। इस समय मेरे कम्प्यूटर में मौजूद सबसे पुरानी पोस्ट है वंदेमातरम जो ८ सितंबर २००६ को कॉपी की गई। उसके बाद दूसरे नंबर पर ६ अक्टूबर को नारद जी को कॉपी किया हुआ है। तीसरे नंबर पर जीतू भैया के पहले प्यार को कॉपी किया है ६ अक्टूबर को।

३. बचपन की कौन सी घटना आपको अब तक याद है ?

एक घटना हो तो बताऊं, बचपन के पहले सात साल बिताए अपने गांव में (जिला रुद्रप्रयाग उत्तरांचल)। वो दिन ही अलग थे चारों ओर जो पहाड़ थे उनसे बाहर की दुनिया तो देखी, जानी ही न थी। सुबह गांव के बच्चों के साथ प्राइमरी स्कूल जाना, शाम को माँ तथा बहनों के साथ खेतों में जाना। रात को कभी कभी जब बाघ गांव में घुस आता था और उसे भगाने के लिए लोग कनस्तर बजाते और शोर करते थे तो मैं माँ की गोद में छुप जाता था।

तब की तो यादें बहुत हैं कभी तसल्ली से बताऊंगा।

४. आपने अपने कम्यूटर में हिन्दी में सबसे पहले किस साफ़्टवेयर में टायप किया और कब ?

हिन्दी में टाइप करने की बात सबसे पहले बीएससी के दिनों में (सन २०००-०१ के आस पास) हुई थी तब मैंने ७ महीने इंग्लिश की टाइपिंग सीखी थी और दो महीने हिन्दी की। तो उन्ही दिनों मैंने अपने एक मित्र सतीश बात की कि कम्प्यूटर में प्रिंटिंग वगैरा के लिए हिन्दी कैसे टाइप करते होंगे, हिन्दी का तो कीबोर्ड ही अलग होता है, तो वो बोला कि शायद इंग्लिश में लिखते होंगे और वो हिन्दी में छ्पता होगा। परंतु ये सिर्फ उसका अंदाजा था। तब मेरे पास कम्प्यूटर भी नहीं था। प्रैक्टिस जारी न रहने से शीघ्र ही मैं हिन्दी की रेमिंगटन टाइपिंग भूल गया।

कुछ समय बाद हिन्दी चिप मैगजीन में मुझे एक सॉफ्टवेयर मिला सुलिपि जो भारतीय भाषाओं में टाइपिंग के लिए था, लेकिन मैंने ट्राई करके देखा ही नहीं। इसके काफी समय (लगभग तीन चार साल) बाद पिछले साल इंटरनेट पर विचरण करते हुए मुझे हिन्दीपैड नामक वर्डप्रौसेसर मिला उसमें मैंने पहली बार हिन्दी टाइप की। कुछ समय हिन्दीट्रांस भी आजमाया। परंतु इनमें केवल उसी सॉफ्टवेयर के अंदर हिन्दी टाइप हो सकती थी। फिर मुझे एक दिन मिला हिन्दीराइटर जिसने मेरी दुनिया बदल दी। तब तक मुझे अन्य IME टूल्स के बारे में नहीं मालूम था। मुझे लगा कि हिन्दीराइटर ही ऐसा एकमात्र टूल है, जिससे मैं पूरे कम्प्यूटर में कहीं भी हिन्दी टाइप कर सकता था। हिन्दी टाइप का सही मजा पहली बार अब ही आया। फिर एक दिन मैंने सोचा कि नैट पर कुछ हिन्दी शब्द खोज कर देखा जाए। गूगल से खोज करते ही मैं कुछ हिन्दी चिट्ठों पर पहुँचा और इस तरह हिन्दी चिट्ठाजगत के बारे में पता चला। फिर तो कई टूल आजमाए और अंत में जाकर बारहा IME पसंद आया। idea

५. कौन सा एसा काम है जिसे आप करना चाहते थे पर आपने नहीं किया, पहले किसी दूसरे ने कर लिया और आपको इसका अफ़सोस हुआ.

ऐसा तो कुछ खास मुझे याद नहीं आ रहा पर हाँ अक्षरग्राम की पुरानी आर्काइव्स पढ़ने के बाद मुझे लगा कि काश में भी चिट्ठाजगत में दो साल पहले आया होता। वो दिन ही कुछ अलग थे। अगर इस बारे में मेरी भावनाएं समझना चाहते हैं तो अक्षरग्राम की पहली पोस्ट से लेकर अब तक की पोस्ट पढ़िए। आप भी मेरी तरह महसूस करेंगे।

लो जी मैथिली जी के जवाब तो दे दिए अब बारी है लावण्या जी के जवाब देने की...

१. आपकी सबसे प्रिय पिक्चर कौन सी है ? क्यों ?

यह बड़ा मुश्किल सवाल है इतनी फिल्में पसंद हैं कि किसी एक का नाम नहीं ले सकता। सिर्फ यह बता सकता हूँ कि किस तरह की पसंद हैं। बचपन में और अब भी काफी हद तक पुरानी फिल्में बहुत पसंद थी। उन दिनों जब छोटा होता तो कल्पना करता था कि बड़ा होने पर मेरे पास केबल और वीसीआर होगा फिर मैं मनमर्जी की फिल्में देखा करुंगा और फिर घर वाले भी नहीं टोक सकेंगे। तब मुझे सुखी जीवन की इससे सुन्दर कल्पना नहीं सूझती थी।

बाद में नई और हॉलीवुड फिल्मों में रुझान हुआ। पसंदीदा फिल्मों की लिस्ट तो बहुत लम्बी है पर पिछ्ले दो-तीन सालों में देखी कुछ फिल्में जो अच्छी लगीं उनमें आवारा, जब जब फूल खिले, साथिया, इश्क विश्क प्यार व्यार तथा टाइटैनिक, जुरासिक पार्क, किंगकॉंग आदि। बाकी कभी विस्तार से लिस्ट बनाऊंगा।

२. आपके जीवन की सबसे उल्लेखनीय खुशनुमा घटना कौन सी है ?

कोई ऐसी खास घटना तो नहीं। लेकिन कुछ मौके याद हैं। बचपन में गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ता था। पाँचवी कक्षा में जिले भर में दूसरे तथा आठवीं कक्षा में ग्रामीण छात्रों में पहले नंबर पर आया था तो मेरी खूब वाहवाही हुई थी।

इसके अतिरिक्त वो दिन भी खुशनुमा था जब पहली बार किसी लड़की के साथ क्लास से बंक मार कर वक्त बिताया था।

३. आप किस तरह के चिट्ठे पढ़ना पसन्द करते/करती हैं ?

अब जाकर एक आसान सवाल मिला। हिन्दी चिट्ठाजगत में आने से पहले सिर्फ तकनीकी चिट्ठे पढ़ा करता था। पर अब चिट्ठाजगत में सबसे ज्यादा मजा हास्य-व्यंग्य के चिट्ठे पढ़ने में आता है। बाकी कुछ चिट्ठाकारों की शैली ऐसी है कि उनकी हर पोस्ट पढ़ते हुए रस आता है जैसे फुरसतिया जी, जीतू भाई, शुएब भाई आदि।

तकनीकी लेखों में रवि जी की शैली रुचिकर होती है। कविताएं एक नजर देख लेता हूँ रुचिकर लगी तो ध्यान से पढ़ता हूँ, वरना फुरसतिया और समीर जी के फॉर्मूले से टिप्पणी करके आगे चल देता हूं। :)

४. क्या हिन्दी चिट्ठेकारी ने आपके व्यक्तिव में कुछ परिवर्तन या निखार किया ?
बिल्कुल, एक तो अब लगता है कि पकाऊ ही सही मैं भी कुछ लिख सकता हूँ। दूसरा हिन्दीजगत में आने के बाद लगा कि नैट पर भी सचमुच के दोस्त हो सकते हैं, तीन साल नैट पर भटका पर पिछले चार-पाँच महीनों में जो मजा आया वो कभी नहीं। लगता है पहले से ज्यादा परिपक्व और समझदार हो गया हूँ। दूसरी बात हिन्दी में जितनी अच्छी तरह खुद को अभिव्यक्त किया जा सकता है इंग्लिश में कतई नहीं चाहे कोई लाख इंग्लिश का विद्वान हो।

५. यदि भगवान आपको भारतवर्ष की एक बात बदल देने का वरदान दें, तो आप क्या बदलना चाहेंगे/चाहेंगी ?

मैं वरदान मांगूंगा कि भारत में रामराज्य फिर से आ जाए, वो रामराज्य जिसके बारे में कहा गया है कि:

"दैविक दैहिक भौतिक तापा, रामराज नहिं काहुहि व्यापा"

और अंत में हाजिर हैं आखिरी टैगकर्ता प्रत्यक्षा जी के जवाब...

उन्होंने हरियाणवी स्टाइल में जवाब देने को कहा है, अब स्टाइल तो पता नहीं पर जवाब हरियाणवी में दिए देते हैं।

सब तै पहल्यां तो भाई या बात जाण कै घणी खुशी होयी अक हरियाणे तै मैं क्ल्ला कोनी। शुरु म्ह मैं सोच्चै करुं था अक चिट्ठाजगत म्ह हरियाणे का झंडा मन्नै क्ल्ले नै ई गाड़ राख्या सै। फेर बेरा लाग्या अक मिर्ची सेठ, प्रत्यक्षा जी अर मोहिन्दर भाई बी आपणे ई पड़ोसी सैं। प्रत्यक्षा जी का तो इबै बेरा लाग्या जिब उन्हांनै मेरे तै टैग कर्‍या।

ल्यो जी जवाब हाजिर सैं।

पहला: अपने जीवन की सबसे धमाकेदार ,सनसनीखेज वारदात बतायें ( अगर ऐसा कुछ नहीं हुआ है तो कपोल कल्पना भी चलेगी ,सिर्फ ऐसी कल्पना के अंत में एक स्माईली अनिवार्य )

इस्सी तो कोए बी खास बात नी होई, पर मन्नै सब तै बड़ी हिम्म्त का काम यो कर्‍या था अक म्हारे बीएड कालेज म्ह जो वाइस प्रिंसीपल होए करा थी उसकी मैं नकल कसूती काडै करुं था। एक बार कालेज म्ह टैंलेंट हंट शो होण लाग रह्‍या था जिस म्ह मिमक्री बी एक आइटम था। तो जी मन्नै हिम्मत करी अर चढ़ग्या स्टेज पै अर उसकी अर एक दूसरे टीचर की वाज काड कै सणायी। बास भाई पूरा हाल म्ह हांस हांस कै सब का बुरा हाल होग्या, पीच्छा बैठ्‍या ओ टीचर बी जम कै हांस रह्‍या था। पूरा हाल म्ह दस मिन्ट लग ताड़ियाँ बाजदी रही। पर वा मैडम की रिएक्शन कोनी बेरा लाग्यी, थी बी वा ऐन खड़ूस सी।

उस दिन पीछा पूरे कालेज म्ह इस बात तै मेरी पछाण बणगी अक यो ई ओ छोरा सै जोणसे नै रशमा मैडम की वाज सणायी थी। साल भर फरमाइशां आंदी रही अक भाई माड़ी सी रशमा मैडम की वाज सणै दे। वो दिन था अर आज का दिन उस कालेज के २५० बच्चों म्ह मेरी पछाण उसी चीज तै बणी। आज बी कोई सा मिल ज्या है तो तैड़ देसी कव्वै सै भाई तों ओ ई है न जिसना...

दूसरा: चिट्ठा जगत में भाईचारा , बहनापा सच है या माया है ?

या बात तो थाम आपणै दिल तै पूछ कै देक्खो। मानो तो भाईचारा सै ना मानो तो माया सै। इब कुछ दिन पहल्यां शुएब भाई बोल्या अक मैं हिन्दुस्तान आऊं सूं औड़ै नौकरी टोऊंगा, तो पंकज भाई होर बोल्ये अक तों आ तो सयी तेरी पूरी मदद करांगे आप्पां। ये दोनों बंदे कदै आपस म्ह मिल्ये बी कोनी, इब यो भाई चारा नी सै तो कै सै, थाम ई बताओ।

तीसरा: किसी एक चिट्ठाकार से उसकी कौन सी अंतरंग बात जानना चाहेंगे ?

कवि दोस्तां तै पूछूंगा अक उनकै घरां म्ह कितणै बन्दे उनकी कविता सुणे करां सैं। :) (स्माईली लगै राक्खी सै)

चौथा: ईश्वर को हाज़िर नाज़िर जान कर बतायें (गीता/कुरान पर भी हाथ रख कर बता सकते हैं ) टिप्पणी का आपके जीवन में क्या और कितना महत्त्व है ?

यो बी कोई पूछण की बात सै के, आपणे चिट्ठाजगत म्ह टिप्पणी की माया तै एक ई बंदा बच्या सै बिहारी बाबू, ऐनी बाकी कौणसा बंदा कै सका अक मन्नै टिप्पणियों का लालच कोनी।

भाई जिस दिन पोस्ट पै टिप्पणी को नी आंदी न्यूं लागै सै अक आज मेहनत बेकार गई, फेर काऊंटर नै देख के दिल तै तसल्ली देऊं सूं अक पड्या तो भाई कईयों नै सै। खैर ऐसी पोस्ट मेरी गिनती की होंगी जिन पै एक बी टिप्पणी कोनी आई। कम तै कम एक बी टिप्पणी आ ज्या है तो कलेजे नै कुछ ठंड सी लाग्गै सै, ऊं बेरा तो हौवे सै अक बंदे ने दिल राखण खातर की सै। बाजी फेर एक दिन टिप्पणी कोनी आंदी अर दूसरे दिन लग कई आ ज्यां हैं। कुल मिला कै बंदा जितणा पराणा होंदा जा है टिप्पणी की वैल्यू समझदा जा है। इब तो आदत पड़ गी सै अक जहाँ पोस्ट पड्डी टिप्पणी करण नै हाथां म्ह खुजली होण लाग जा सै। smile

पाँचवां: चिट्ठा लिखना सिर्फ छपास पीडा शांत करना है क्या ? आप अपने सुख के लिये लिखते हैं कि दूसरों के (दुख के लिये ;-)

चिट्ठा लिक्खणा तो जी बहुउद्देशीय सै। ज्यादातर बंदे छ्पास की पीड़ ठंडी करण खातर इसनै शुरु करैं करां सैं। कुछ कवि नामक प्राणी हौवें सैं जिनां नै देक्ख कै गली म्ह लोग भाजण लाग ज्यां हैं भागो कवि आ गया, इसे सै प्राणियाँ खातर यो बोत चोखा साधन सै पढ़ण आलै ने बी बदल म्ह टिप्पणी चइए जै करकै उसनै झक मारकै पड्णी पढ़ै सै कविता अर टिप्पणी बी करणी पड़ै सै। smile

जहाँ तक मेरी बात सै तो मन्नै के दिक्कत थी कि जुण से तो मेरे दोस्त सॉफ्टवेयर अर कम्प्यूटर के काम म्ह बड़ र्‍ये थे उन पै तो टैम को नी था मेरां पकाऊ टोटकै आजमाण का, अर जुण सै दूसरे दोस्तां पै टैम था उनां नै समझ कोनी आवै था। मेरे २४ घंटे खुजली हौवे थी अक अपणे टैक्नीकल एक्सपीरियंशां नै किस गेल शेयर करुं। फेर एक दिन मन्नै इंग्लिश ब्लॉग खोल्या अर कुछ पोस्टां लिक्खी। उन पोस्टां नै पड्ण आए Tom, Dick & Hary जिसे नामां आले अर उनकी कमेंट हो थी Nice tip man, thanx. जी सा कोनी आया। मीनवाइल मन्नै हिन्दी चिट्ठाजगत म्ह एंट्री मिली। याड़ै लिक्ख्णा शुरु कर‍या अर थोड़े ई दिनां म्ह स्कूल चोखा चल ग्या। बस तद तै जी लग र्‍या सै पोस्ट लिक्खैं सैं अर टिप्पणी की बाट देक्खें सैं। razz

बाकी कुछ बंदे कहवैं सै अक मेरे लिक्खै तै फैदा बी होज्या है कदि कदि।

ओ ह ह ह (गहरा सांस)...

तो ये हुए जी मेरे सब जवाब पूरे। अब मेरी बारी है, मैं पूरे १५ लोगों को फांसूंगा, आपने पूछा क्यों। देखो जी मुझे तीन लोगों ने फांसा, फिर मैंने जवाब भी तीनों टैग करने वालों को दिए जबकि चाहता तो एक में भी निपटा सकता था। यह पोस्ट लिखने में मेरा आज का पूरा दिन लग गया, है किसी में हिम्मत इतनी लंबी पोस्ट लिखने की (फुरसतिया जी को छोड़कर)। इसलिए मेरा हक बनता है ये, अतः तीनों की तरफ से मेरे कुल शिकार हुए ५x३=१५ twisted

अब मैं पूछूंगा अपने मनपसंद कुछ प्रश्न...

१. कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग के बारे में सबसे पहले आपने कब सुना और कैसे, अपने कम्प्यूटर में हिन्दी में सबसे पहले किस सॉफ्टवेयर में/द्वारा टाइप किया और कब, आपको उसके बारे में पता कैसे चला ?

२. आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में आगमन कैसे हुआ, इसके बारे में कैसे पता लगा, पहला हिन्दी चिट्ठा/पोस्ट कौन सा पढ़ा/पढ़ी ? अपना चिट्ठा शुरु करने की कैसे सूझी ?

(आलोक जी के लिए इस प्रश्न का संस्करण - हिन्दी में चिट्ठाकारी का विचार कैसे आया, ऐसा करते हुए मन में क्या ख्याल थे और बिना किसी मदद के शुरुआत कैसे की उस समय ?)

३. चिट्ठा लिखना सिर्फ छपास पीडा शांत करना है क्या ? आप अपने सुख के लिये लिखते हैं कि दूसरों के (दुख के लिये ;-) क्या इससे आप के व्यक्तित्व में कोई परिवर्तन या निखार आया ? टिप्पणी का आपके जीवन में क्या और कितना महत्त्व है ?

४. अपने जीवन की कोई उल्लेखनीय, खुशनुमा या धमाकेदार घटना(एं) बताएं, यदि न सूझे तो बचपन की कोई खास बात जो याद हो बता दें।

५. यदि भगवान आपको भारतवर्ष की एक बात बदल देने का वरदान दें, तो आप क्या बदलना चाहेंगे/चाहेंगी ?

प्रश्न दीर्घ उत्तरात्मक लगते हैं लेकिन इनके उत्तर दीर्घ देने जरुरी नहीं हैं, सटीक तथा सुन्दर उत्तरों के अधिक अंक दिए जाएंगे। प्रश्न लंबे जरुर हैं लेकिन अंतिम वाले को छोड़कर मुश्किल कोई नहीं।

और अब जैसा मैंने ऊपर कहा मेरे १५ शिकार:

आलोक जी - आदि चिट्ठाकार का टैग के बहाने इंटरव्यू लेना दिलचस्प रहेगा, बस डर ये है कि एक लाइन में उत्तर न दे दें।

देबाशीष दादा - चिट्ठाकारी के भीष्म पितामह देबु दा आजकल परदे के पीछे जरुर हैं लेकिन अभी चिट्ठाजगत को देने के लिए बहुत कुछ है इनके पास।

पंकज नरुला - मिर्ची सेठ अक्षरग्राम के सरपंच, सभी चिट्ठाकारों को एक मंच पर लाने का श्रेय इनको ही जाता है, उम्मीद है अपनी व्यस्त दिनचर्या में से थोड़ा सा समय इस काम के लिए निकालेंगे।

रमण कौल - सर्वज्ञ रमण जी के लिए यह काम कतई मुश्किल नहीं, चिट्ठाजगत के पुराने खिलाड़ी हैं ये भी।

संजय बेंगाणी - धृतराष्ट्र को संपूर्ण चिट्ठाजगत का हाल बताने वाले टिप्पणी सम्राट संजय जी तो चुटकी बजाते अपने संगणक द्वारा संजाल से उत्तर खोज लाएंगे।

पंकज बेंगाणी - ग्राफिक्स गुरु पंकज जी केवल मास्साब ही नहीं अच्छे लेखक भी हैं। समय का अभाव न होता तो ये सब को पीछे छोड़ देते।

शुएब - खुदा को तो बाकायदा हम बख्शेंगे नहीं। खुदा सीरीज से सबका दिल जीतने वाले शुएब भाई के जवाब भी उतने ही मजेदार होंगे।

डॉ. प्रभात टंडन - बकौल डॉक्टर साहब चिकित्सक होने के बावजूद वे खुरापाती कम नहीं। चिट्ठाकारी में कैसे रुझान हुआ जानना उत्सुक होगा।

गिरिराज जोशी 'कविराज' - संवेदनशील कविराज यदा कदा मूड में आने पर व्यंग्य भी खूब लिखते हैं। इनके जवाब पठनीय होंगे।

जगदीश भाटिया - मुन्ना भाई जल्द ही सबके भाई बन गए, इनकी धुआंधार पोस्टिंग देखकर लगता नहीं कि इन्होंने पिछले साल ही चिट्ठाकारी शुरु की।

समीरलाल - गुरुदेव के बारे में लिखना तो सूरज को दीपक दिखाना है। आजकल चिट्ठा विज्ञान पर शोध कर रहे हैं।

रत्ना सोनी - रत्ना जी की रसोई काफी दिनों से सूनी पड़ी है। उम्मीद है जल्द ही कुछ खास पकेगा।

डॉ. रामचन्द्र मिश्र - मिश्र जी व्यस्त रिसर्च कार्यक्रम के बावजूद चिट्ठाकारी के लिए वक्त निकाल ही लेते हैं। साथ ही नए नए टूल्स जैसे WLW, फ्लिकर आदि पर हाथ साफ करना भी नए भूलते।

प्रतीक पांडे - सुन्दरी साधक प्रतीक भाई के बारे में खास बात यह है कि यह पुराने चिट्ठाकारों में सबसे कम उम्र के हैं। इनकी उम्र के लोग जब डेटिंग साइटों पर वक्त बिताते हैं वे हिन्दी चिट्ठाकारी में कैसे आए जानने की इच्छा है।

हरिराम जी - हरिराम जी चिट्ठाकारी में भले ही नए हों पर हिन्दी कम्प्यूटिंग के पुराने खिलाड़ी लगते हैं । इनसे आने वाले समय में हमें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

प्रमेन्द्र प्रताप 'महाशक्ति' - जवान जहीन प्रमेन्द्र जी राष्ट्रवादी विचारों के हैं, कवि होने के अतिरिक्त समसामयिक मसलों पर भी इनकी कलम खूब चलती हैं।

दो और नाम भी लिख रहा हूँ लेकिन ये अब सक्रिय नहीं और न ही इनका कोई ईमेल पता इनके ब्लॉग पर दिया है। अतः मुश्किल है कि ये लिखें। इनके बारे में जानने की जिज्ञासा पहले से है। इन दो सज्जनों के लिए (अगर ये लिखें तो) आखरी सवाल माफ है।

ग्रेग गोल्डिंग - न्यूयार्क वासी इन सज्जन के बारे में मैं आज तक नहीं समझ पाया कि ये भारतवंशी हैं या वहीं के मूल निवासी। इनके हिन्दी प्रेम के चलते इनके बारे में जानने की दिलचस्पी पैदा होना स्वाभाविक है।

मोत्सु जी - मोत्सु जी ने बीए हिन्दी के दौरान हिन्दी में चिट्ठा लिखना शुरु किया था। जहाँ हिन्दुस्तान में ही लोगों को हिन्दी टाइप का ठीक से पता नहीं, इनका प्रयास सराहनीय है।

लो जी हम ने अपना काम पूरा किया। वैसे पहले लग रहा था कि कितना मुश्किल काम है पर एक बार लिखना शुरु करो तो अपने आप सब हो जाता है। ऊपर बताए जो लोग लिख चुके हैं उनकी मर्जी वो जवाब दें न दें वैसे मेरे सवालों का जवाब भी दे देंगे तो मुझे खुशी होगी। लेकिन जिन्होंने लोग टैग होने के बावजूद अभी तक नहीं लिखा है जैसे बेंगाणी बन्धु, शुएब आदि उन्हें मेरे जवाब देना जरुरी है, नहीं तो हम उनके चिट्ठे पर टिप्पणी... wink

अब हम रवि जी की तरह दरियादिल नहीं कि छोड़ दिया अभी तो बहुत लोग बाकी हैं, सब फंसेंगे हाँ सब।

हि हि हा हा हा (रावण वाली हँसी डॉल्बी डिजिटल साऊंड में) twisted

20 टिप्पणियाँ:

Tarun ने कहा...

बडे दिनो बाद (फुरसत में) नारद से मिलना हुआ तो पहली पोस्ट मे ही १५ सवाल और उनके जवाब, मानना पडेगा जहाँ ५ सवाल के जवाब देने में लोगों के चेहरों में हवाई उड रही है, तुम १५ ले कर हाजिर हो गये। १०० में से २०० अंक ले के पास हरयाणवी मास्साब।

antarman ने कहा...

शीर्ष जी,
आपने मेरा अनुरोध मान कर, ५ सवालोँ के जवाब बखूबी दे दीये ~~
धन्यवाद !
हँसने , हँसाने वाले लेख अक्सर, लोकप्रिय हो जाते हैँ - कविता तो
लोग बाग, सराफत के मारे , कवि का दिल रखने को , सुन/ पढ लेते हैँ :)
एक बार समाचार सुने थे कि, "दक्षिण अमरिका के ब्राज़ील देश के नगरोँ के बीच,
चलती बस मेँ, जब सारे यात्री, बैठ जावेँ, दरवाजा बँद हो जावे उसके बाद,कोई
कवि महाशय अपनी कविता पढना शुरु कर देते थे - यात्री , कहीँ जा न्ही पाते, या चलती
बस से उतर भी नहीँ पाते थे ! इसी को शायद अँग्रेज़ी मेँ "केप्टिव ओडीयन्स" कहते हैँ !!
क़वियोँ के तो ऐसे हाल हैँ
आप पढाते रहिये...और "उत्तराँचल" के किस्से अवश्य सुनायेँ ..उत्सुक हूँ ..
बम्बई मेँ ही पली बडी हुई हूँ --उत्तराँचल नाम सुनकर ही , उसे देखने को मन करता है --
इसलिये...देर न करेँ ..
स - स्नेह,
लावण्या

नितिन व्यास ने कहा...

श्रीश जी, बहुत ही बढिया लेखन, बधाई।

mahashakti ने कहा...

ई-पंडित बोले तो श्रीश जी,

टैग बोले तो जो सम्‍मान आपने मुझे दिया है उसके लिये आपको धन्‍यवाद।

मै अभी तुरन्‍त वाराणसी के लिये प्रस्‍थान कर रहा हूँ, शाम तक मै लौट आऊँगा। तो जो आपने मुझे टैगियाया (सम्‍मान दिया)है उसका उत्‍तर अवस्‍य दूँगा। विलम्‍ब होने के लिये खेद है। प्रतीक्षा कीजियेगा। :)

राजीव ने कहा...

क्या बात है!
इस महापोस्ट की एक एक पंक्ति पढ़ी। हरियाणवी वाली तो खास समझ में नहीं आयी पर अन्य बहुत खूब रहीं। आप तो इस टैगिंग मैराथन के चैम्पियन हो गये। अब यदि आलोक जी इसे देखें और SMS टाईप उत्तर दें तो मज़ा और ही रहे!

masijeevi ने कहा...

चोख्‍खी स भाई....घणी चौख्‍खी सै। यू सही झौट्टा काढ्ढा तन्‍नै।

maithily ने कहा...

आपके बारे मैं अधिक जानना बहुत अच्छा लगा.
हिन्दीपैड तो 1996 में बना था, आपकी नजर इतनी देर बाद क्यों गयी?
मैथिली

DR PRABHAT TANDON ने कहा...

बहुत खूब! सब्को खूब पकडा।
श्रीश भाई , मै तो करीब साल भर पहले हिन्दी लिखने के आसान औजार ढूंढने निकला था, शुएब और जीतू भाई को मेल कर के विधि पूछी, तब एक दिन जितेन्द्र जी ने मुझे याहू मेसेन्जर पर हिन्दी राइटर चलाने का तरीका बताया और ब्लाग लिखने के लिये सुझाव दिया। मै क्या लिखूँ , यह मेरे लिये पहेली ही थी क्योंकि मैने तो जिन्दगी मे कोई निंबध तक नही लिखा :), होम्योपैथी मे लिखने के लिये जीतू भाई ने सुझाव दिया और बस कहानी शुरू। उस दिन की याहू मेसेन्जर पर जीतू भाई के साथ वार्तालाप अभी भी मैने एक धरोहर की तरह रखी है, आप भी देखें और मुझ जैसे नौसखयिये का हिन्दी लिखना देखकर मौज लें, यहाँ
देखें

संजय बेंगाणी ने कहा...

हमने तो एक प्रश्नपत्र हल नहीं किया और आपने तीसरा भी थमा दिया :(

कोई चौथा दे मारे इससे पहले जवाब दे देने में ही भलाई है.

Pankaj Bengani ने कहा...

दरोगा मोदय,

हम तो जवाब दे दिए हैं... हमरा एनकाउनटर मत करना भाई... डर लगता है.

संजीत त्रिपाठी ने कहा...

वाह श्रीष भाई, मजा आ गया। खास "श्रीष शैली" मे लिखा है आपने। यार आप तो हरियाणवी चिठ्ठा भी शुरु कर ही दो एक।

उत्तरांचल के संस्मरण जल्द ही लिख मारो,मैं भी प्रतीक्षारत हूं…

सागर चन्द नाहर ने कहा...

हरियाणवी में जवाब पढ़ना बहुत अच्छा लगा, और हाँ वह लड़की के साथ बंक मार कर वक्त बिताने वाली घटना को विस्तार से बताइये ना :)

उन्मुक्त ने कहा...

मान गयेे आपके धैर्य को।

उडन तश्तरी ने कहा...

बहुत हिम्मती हो भाई. इतनी लम्बी जवाबदारी उठाई कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी. आज ही मैने दो जगह टैग होने का जवाब लिखा है, आप भी खोजेंगे तो सारे जबाब उसमें हैं क्योंलि वो प्रश्नोत्तरी श्रृंखला में नहीं हैं. अगर न मिलें तो बताना जरुर. :)

बहुत बढ़िया जबाब दिये: १००/१०० अंक दिये जाते हैं.

हरिराम Hariraama ने कहा...

यक्ष प्रश्नों के सही उत्तर सिर्फ युधिष्ठिर जी ही दे पाते हैं, सचमुच सही एवं सत्य (जो सामान्यता लोग अपने बारे में कभी नहीं बता पाते) उत्तर देने के लिए आप चिट्ठा-युद्ध में स्थिर टिके रहकर 'ईय़ुद्धिष्ठिर' की उपाधि के सुपात्र हैं।

Pratyaksha ने कहा...

जो सोच कर टैग किया था उसमें पूरे नम्बर दिये जाते हैं । पाँच नम्बर और हरियाणवी का ,
मन्नै घणी खुशी होयी ।

ravi_love_saini ने कहा...

नमस्कार पन्डित जी , आपका चिट्ठा पढकर मुझे बहुत अच्छा लगा . कृपया मुझे भी बताने की कृपा करे कि मै अपना चिट्ठा कैसे लिखूँ . अभी मुझे इस बारे में कुछ भी नहीं पता है . आपका नया शिष्य - रवि सैनी , किच्छा , उधम सिंह नगर , उत्तराखंड

Shrish ने कहा...

@Tarun,
खूब सारे नंबर देने का शुक्रिया तरुण भाई। मैं तो आपको भी टैग करता पर मैथिली जी ने आपको भी मेरे साथ ही टैग किया था।

@antarman,
लावण्या जी खुले में सीक्रेट बात मत कीजिए भाई, हमारे कई दोस्त कवि हैं। :)

उत्तरांचल पर चिट्ठा शुरु करने का कफी समय से सोच रहा हूँ। समय मिलने पर जरुर करुंगा।

@नितिन व्यास,
धन्यवाद नितिन जी।

@mahashakti,
जल्दी आओ प्रमेन्द्र भईया इन्तजार है आपकी पोस्ट का।

@राजीव,
राजीव जी एक एक पंक्ति पढ़ने के लिए धन्यवाद। आलोक जी देखते हैं कौन सी विधि अपनाते हैं।

@masijeevi,
इब्बै तो हरियाणवी चिट्ठा शुरु करण लाग रया सूं भाई, देखदे जाओ।

@maithily,
मैथिली जी १९९६ में मैं नवीं कक्षा में था, कम्प्यूटर से तो तब दूर दूर तक वास्ता न था।

@DR PRABHAT TANDON,
प्रभात जी ऐसे टिप्पणी करके नहीं बच सकते। खेल का नियम तोड़ना कानूनन अपराध है। :)

पोस्ट लिख कर उत्तर देना ही पढ़ेगा। कुछ भी लिखो जी कोई पेपर थोड़े ही ना है।

@संजय बेंगाणी,
सही है जी इसीलिए मैंने भी ये महापोस्ट लिख मारी। आपकी पोस्ट का इंतजार है।

@Pankaj Bengani,
पंकज जी आपका जवाब पढ़ लिया है अपुन ने, आपकी जान बक्श दी है जी। :)

@संजीत त्रिपाठी,
संजीत जी आप बचे रह गए शायद अब तक, कोई बात नहीं किसी साथी को बोलकर आपको भी फंसवाते हैं।

@सागर चन्द नाहर,
अरे भाईसा कोई खास बात नहीं थी। वो पहली पहली बार तो बंदे को लड़की से सिर्फ बात करना ही भी बहुत अच्छा लगता है।

@उन्मुक्त,
ओ जी आपके धैर्य (लिनक्स में काम करना)के आगे ये धैर्य तो कुछ भी नहीं। धन्यवाद !

@उडन तश्तरी,
१०० नंबर देने के लिए शुक्रिया समीर जी, लेकिन आपने मेरे पहले दो प्रश्नों के उत्तर नहीं दिए।

@हरिराम Hariraama,
हरिराम जी उपाधि के लिए शुक्रिया। आपके जवाबों का इंतजार है।

@Pratyaksha,
प्रत्यक्षा जी पास करने का शुक्रिया। हरियाणवी का एक चिट्ठा शुरु करण जा रया सूं। पड्ड्ण आदें रईयो।

@ravi_love_saini,
रवि जी आपके पास नए Blogger पर एक ब्लॉग है ही। एक अन्य ब्लॉग हिन्दी के लिए बना डालिए। वैसे में आपका प्रश्न जरा समझा नहीं आप सिर्फ ब्लॉग लिखने के बारे में जानना चाहते हैं या हिन्दी में ब्लॉग लिखने के बारे में ? कृपया सपष्ट करें।

जहाँ तक बात है हिन्दी में लिखने की तो आप हिन्दी में टाइप कर ही रहे हैं। बस उसी टूल से ब्लॉग में भी लिखिए।

वैसे विस्तार से बताने के लिए आपको मेल कर रहा हूँ।

Anonymous ने कहा...

talented aadmi ho !

हिमांशु ने कहा...

श्रीष,

पिछले कुछ दिनों से फिर से हिन्दी में लिखने की सोच रहा हूँ, पर सोच रहा हूँ, की अब रहने ही दूँ.

एक बात मुझे बहुत दुखी करती है की हिन्दी ब्लौग जगत पर आज कल मुझे वही चीजें पढने को मिल रही हैं, जिनसे मैं बचना चाहता हूँ.

उदाहरण के लिये, हिन्दु-मुस्लिम के बीच के पंगे, हिन्दु मुस्लिम-भाई भाई ... आदि आदि.

कोई भी आदमी किसी ढंग के विषय पर तो लिखना ही नहीं चाहता है.

lifehacker.com पर जा कर देखिये, यह भी वर्ड-प्रेस पर चलने वाला ब्लौग है, पर इसके लेख बहुत मजेदार हैं.

क्या कभी हिन्दी में तकनीकी जानकारी वाला कोई साइट मिलेगा भी की नहीं ??

क्या लाइफ-हैकर जैसे ब्लौग लिखना इतना कठिन है ???

हाल की प्रविष्टियाँ