Monday, 5 February, 2007

अपने चिट्ठे का नाम हिन्दी में क्यों नहीं रखते

ब्लॉग शीर्षक तथा डिस्पले नाम हिन्दी में रखने संबंधित कुछ मुद्दे

दो-एक दिन पहले की बात है नितिन भाई के चिट्ठे पर मैंने टिप्पणी की कि वे अपने चिट्ठे का शीर्षक हिन्दी में क्यों नहीं लिखते, उन्होंने चिट्ठे का शीर्षक तो नहीं बदला लेकिन हिन्दी में बना हैडर लगा दिया। नितिन भाई को गूगल पेज रैंक का बहुत ख्याल रहता है न शायद इसलिए। wink खैर इसके लिए भी मैं उनका शुक्रगुजार हूँ।

वैसे चिट्ठे के नाम से तात्पर्य सिर्फ हैडर इमेज से नहीं, ब्लॉग टाइटल से है जो कि ब्राउजर के टाइटल बार तथा टैब के ऊपर लिखा आता है जो कि ब्लॉग की सैटिंग्स में डाला जाता है।

पहले तो मेरा प्रश्न है कि यदि ब्लॉग हिन्दी में है तो उसका नाम भी हिन्दी में ही होना चाहिए। इंग्लिश में नाम रखने का क्या तुक है। जिसे हिन्दी आती होगी वही तो आपका चिट्ठा पढ़ेगा, सिर्फ इंग्लिश जानने वाला तो नहीं| evil

एक अन्य कारण जो मुझे लगता है कि कुछ लोगों का विचार हो सकता है कि इससे सर्च इंजनों के द्वारा पाठक बढ़ेंगे। अब माना आपके चिट्ठे का नाम है Shrish Ka Blog. तो प्रथम बात तो कोई इस सर्च टर्म को सर्च करेगा नहीं। दूसरे यदि संबंधित सर्च में आपके ब्लॉग का नाम शामिल भी हो तो वह बहुत पीछे होगा जहाँ तक खोजकर्ता जाएगा नहीं क्योंकि जब तक कि आपने खास भाषा न सैट की हो दूसरी भाषाओं के सर्च परिणाम बहुत पीछे आते हैं।

खैर यदि खोजकर्ता वहाँ तक गया भी तो चिट्ठे की हिन्दी में Summery देखकर आएगा नहीं। उदाहरण के लिए कभी-कभी मेरे सर्च रिजल्टस में चाइनीज और रशियन पेज आ जाते हैं पर मैं उन्हें देखता नहीं क्योंकि मुझे वो भाषाएं आती नहीं, यद्यपि इनके लिए तो ट्रांसलेशन भी उपलब्ध है पर उसी विषय पर इंग्लिश के पेज होते हुए मुझे क्या आफत आई है जो आधी-अधूरी ट्रांसलेशन पढूं। फिर हिन्दी के लिए तो ट्रांसलेशन भी उपलब्ध नहीं। sad

हिन्दी चिट्ठों का सर्च इंजनों से अभी अधिक प्रेम नहीं क्योंकि English शब्दों की सर्च हेतु वो हिन्दी चिट्ठे दिखाता नहीं और हिन्दी के प्रयोगकर्ता सर्च इंजनों की बजाय नारद आदि साधनों का प्रयोग करते हैं। इस बारे में अपने अनुभव कभी विस्तार से रखूँगा।

अतः मेरा सभी साथियों से अनुरोध है कि यथासंभव अपने चिट्ठे का नाम हिन्दी में ही रखें। यदि विजुअल अपील के लिए इंग्लिश में भी रखना चाहें तो हैडर इमेज बनाकर उसमें साइड में लिख दें। लेकिन यह भी सत्य है कि हिन्दी या अंग्रेजी में नाम रखना चिट्ठाकार का विशेषाधिकार है, हम तो इस बारे में केवल अनुरोध कर सकते हैं।

अब तक मैं कई चिट्ठाकारों से इस बारे में अनुरोध कर चुका हूँ और खुशी की बात ये है कि उन सब ने मेरा अनुरोध स्वीकार किया। इनमें रंजना भाटिया जी, गिरीन्द्र नाथ झा जी तथा नितिन हिन्दुस्तानी जी आदि शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त रविरतलामी जी के ब्लॉग का शीर्षक भी इंग्लिश में है। कई बार मैंने सोचा लेकिन संकोचवश उनसे इस बारे में कह नहीं पाया क्योंकि उनके प्रति मेरे दिल में बहुत सम्मान है। यद्यपि प्रथम चिट्ठाकार आलोक भाई थे लेकिन हिन्दी कम्प्यूटिंग से जुड़े वरिष्ठतम व्यक्ति रवि जी ही हैं। उन्होंने यदि शीर्षक इंग्लिश में रखा है तो इसका कुछ खास कारण अवश्य ही होगा।

यहाँ पर एक बात थोड़ी अटपटी है। कल संजाल-भ्रमण के दौरान मैं एक चिट्ठे गरम-चाय पर पहुँचा, सुना है उसकी फीड में कुछ दिक्कत है इसलिए नारद पर नहीं दिखता। तो वहाँ पर रवि जी की एक टिप्पणी देखी।

इस हिन्दी ब्लॉग का शीर्षक अंग्रेज़ी में क्यों है ?
...

(उस समय उस चिट्ठे का शीर्षक इंग्लिश में रहा होगा, अब नहीं है।)

यह आश्चर्यजनक है कि यह बात कहने वाले रवि जी इस बात पर स्वयं ध्यान नहीं दे रहे (उस समय तो वे छींटे और बौछारें पर थे)। रवि जी कृपया इस बारे में मेरी जिज्ञासा शांत करें। question

चिट्ठे तथा टिप्पणियों पर डिस्पले नाम

दूसरी बात संबंधित है नितिन जी के ही ब्लॉग पर समीर जी की एक टिप्पणी को लेकर। वहां टिप्पणी में समीर लाल जी बोले की मैंने अपना डिस्पले नाम इंग्लिश में क्यों रखा है, हिन्दी में क्यों नहीं।

यूँ तो नाम में कुछ धरा नहीं है, अच्छा लिख रहे हो, लोग आते ही रहेंगे मगर श्रीश बाबू की बात में दम है. वैसे श्रीश, आप भी प्रोफाइल में अपना नाम हिन्दी में करो...ये क्या है कि Shrish said... :) विचार करना. आवश्यक तो नहीं है.

अब इस बारे में पहले एक जगह (शायद चिट्ठाचर्चा) पर रवि जी भी टिप्पणी कर चुके हैं। मैं भी वही कारण दोहराऊंगा। यदि प्रोफाइल में डिस्पले नेम हिन्दी में कर दिया जाए तो वह आपके सभी चिट्ठों पर हिन्दी में ही दिखेगा। अब यदि आप अंग्रेजी में भी चिट्ठा लिखते हैं तो वह उस पर भी हिन्दी में ही दिखेगा जो कि अवांछित है क्योंकि अंग्रेजी चिट्ठे के पाठक पूरे विश्व से होते हैं। इस बारे में वो सब साथी समझ सकते हैं जिनके दोनों भाषाओं में चिट्ठे हैं।

यह बात ब्लॉगर तथा वर्डप्रैस.कॉम दोनों पर लागू होती है। ऐसा कोई तरीका मौजूद नहीं जिससे अलग-अलग चिट्ठों पर अलग-अलग नाम दर्शाया जा सके।

वर्डप्रैस.कॉम पर रहने के दौरान मैंने इस बारे में काफी कोशिश करके देखी। मैंने इस बारे में एक बार वर्डप्रैस.कॉम टीम को भी फीचर रिक्वेस्ट भेजी थी जिसका जवाब नकारात्मक आया। इस का सार कुछ इस तरह से था।

Me: Dear Sir, I am having two blogs on WP.Com, one is in English and another in Hindi (National language of India).

Now If I set my display name to be in Hindi on my Hindi blog, it appears so also on my English blog. Is it possible to have different display name on different blogs. Lots of people from India are using WP.Com for blogging in various Indic languages e.g Hindi, Tamil, Urdu etc. If this can be made possible they all will be benefited.

WP.Com Team: Hi, I'm sorry but that just isn't possible. The username is unique and it can only be attached to one display name. It's also the case that many English speakers would like this but I tell them the same thing - they need another account. My apologies for not being able to help more.

अब पहले मैंने अपना ब्लॉगर डिस्पले नेम हिन्दी में ही कर लिया था लेकिन अक्सर मुझे इंग्लिश ब्लॉग्स पर टिप्पणी करनी होती है, जिससे वहाँ भी डिस्पले नेम हिन्दी में आ जाएगा और न तो वह ब्लॉगर हिन्दी समझ पाएगा और वैसे भी उसके सिस्टम पर हिन्दी की जगह कचरा दिखाई देगा। इसके अतिरिक्त अपने इंग्लिश के चिट्ठे को पुनर्जीवित करके ब्लॉगर पर लाने वाला हूँ जो कि हिन्दी-ब्लॉगिंग का चस्का लगने के समय से बंद पड़ा है। हाँ इसके बाद वर्डप्रैस.कॉम में हिन्दी में नाम कर दूँगा। वर्डप्रैस आदि दूसरे चिट्ठों में तो हमेशा हिन्दी में ही नाम लिखता हूँ।

अतः सपष्ट है कि निकट भविष्य में भी इस बारे में कुछ नहीं हो सकता। तो निष्कर्ष यह है कि जिन साथियों का केवल हिन्दी ब्लॉग है/हैं वो तो डिस्पले नेम को बिना देरी हिन्दी में कर दें। परंतु जिनके हिन्दी के अतिरिक्त इंग्लिश में भी ब्लॉग हैं उनके लिए फिलहाल इंग्लिश नाम का प्रयोग करना मजबूरी है। sad

अपडेट: कुछ समय पूर्व पता चला है कि हिन्दी में डिस्पले नाम वाले लेखकों (ब्लॉग नाम नहीं) की नारद पर न तो फोटो आ रही है और न ही पुराने लेखों का संग्रह (Author Archive). इस बारे में नारद जी का कहना है कि ऐसा किसी तकनीकी कारण के चलते संभव नहीं हो पा रहा है। भविष्य में हिन्दी नाम वाले लेखकों के चित्र तो शामिल किए जाने हेतु प्रयास किए जा रहे हैं परंतु आर्काइव वाले मसले का कोई हल निकट भविष्य में नहीं है। अतः फिलहाल लेखक नाम इंग्लिश में ही रखना उपयुक्त है। इस बारे में चिट्ठाकार समूह पर यह पोस्ट पढ़िए।

5 टिप्पणियाँ:

Raviratlami ने कहा...

"... यद्यपि प्रथम चिट्ठाकार आलोक भाई थे लेकिन हिन्दी कम्प्यूटिंग से जुड़े वरिष्ठतम व्यक्ति रवि जी ही हैं। उन्होंने यदि शीर्षक इंग्लिश में रखा है तो इसका कुछ खास कारण अवश्य ही होगा।..."

आपने सही प्रश्न पूछा है. एक दफ़ा कुछ इसीतरह की बात सुरेंद्र मोहन पाठक से पूछी गई थी तो उन्होंने उत्तर दिया था- यह उस (सूअर के बाल वाले) कम्बल की तरह है जो मुझे पता है कि गड़ रहा है, परंतु मैं उसे उतार कर नहीं फेंक सकता चूंकि फिर मुझे ठंड लगती है. यानी कि न निगलते बने न उगलते.

परंतु यहाँ कारण भी दर्शाना होगा. आलोक का पहला ब्लाग था नौदोग्यारह. उन्होंने इसका नाम रखा था 9-2-11. संभवतः उनके सामने भी ब्लॉगर में हिन्दी में नाम रखने में असुविधा रही हो. तो जब मैंने हिन्दी में ब्लॉग लिखना प्रारंभ किया तो ब्लॉगर के कई टैम्प्लेट में (हेडर में) हिन्दी प्रदर्शन की सही सुविधा नहीं थी. मेरे बार बार कोशिश करने के बाद भी उसमें हिन्दी शीर्षक नहीं बना (मुझे उसकी ज्यादा जानकारी भी नहीं थी तब, और हम सब सीख रहे थे) कुल मिलाकर हिन्दी में दर्जन भर ब्लॉग थे. तब उस समय हिन्दी ब्लॉग को नजर में लाने के लिए मैंने यह नाम - रवि रतलामी का हिन्दी ब्लॉग रखा था - ताकि लोगों को मालूम हो कि हिन्दी में भी ब्लॉग लिखे जा सकते हैं. ब्लॉग लिखने से सालों पहले जिओसिटीस पर मेरा हिन्दी में पृष्ठ था (अब भी है) - पहले पीडीएफ़ में और बाद में यूनिकोड में. तब तो मेरा अंग्रेज़ी का ब्लॉग भी नहीं था.उसमें भी सारा शीर्षक इत्यादि अंग्रेज़ी में ही है.

बाद में भाई ई-स्वामी जी की कृपा से सालेक भर छींटे और बौछारें में भी रहे, परंतु मेरे व्यावसायिक रुझान के चलते मैं फिर ब्लॉगर के अपने चिट्ठे पर वापस आया. तब मैं फिर से शुरूआत कर सकता था, और शायद छींटे और बौछारें नाम से ही, परंतु उसी समय मुझे माइक्रोसॉफ़्ट का हिन्दी पुरस्कार मिलने की घोषणा हुई (जो कि आज तक नहीं मिली, सिर्फ घोषणा ही साबित हुई और शायद किसी को भी नहीं मिली)तो मैंने उस नाम को रहने दिया.

और जब एक बार नाम चल चुका है तो उसे बदलने में क्या तुक? नाम में क्या रखा है?

बाद में मैंने कई लोगों को समझाया कि ऐसे नाम मत रखो नहीं तो बाद में बदलने में मुश्किल पड़ती है.

उम्मीद है बात कुछ साफ हुई होगी. अन्यथा मैं बाहर भी और घर में भी इस बात के लिए गाली खाता हूँ कि मैं कहना कुछ चाहता हूँ, कह कुछ देता हूँ, और सोचता हूँ कि मैंने तो साफ बात कही है,तो लोगों ने दूसरा अर्थ क्यों ले लिया!

उडन तश्तरी ने कहा...

जिज्ञासा कुछ शांत हुई. मगर आप इतना संकोच न किया करो:

इसके अतिरिक्त रविरतलामी जी के ब्लॉग का शीर्षक भी इंग्लिश में है। कई बार मैंने सोचा लेकिन संकोचवश उनसे इस बारे में कह नहीं पाया

--बहुत संकोची हो, यार!!! :) ;)

Shrish ने कहा...

अर्थात मेरा विचार सही था कि हिन्दी के सबसे पुराने सिपाही के पास ऐसा करने का कोई कारण जरुर होगा।

"कुल मिलाकर हिन्दी में दर्जन भर ब्लॉग थे. तब उस समय हिन्दी ब्लॉग को नजर में लाने के लिए मैंने यह नाम - रवि रतलामी का हिन्दी ब्लॉग रखा था - ताकि लोगों को मालूम हो कि हिन्दी में भी ब्लॉग लिखे जा सकते हैं."


हाँ यह बात मैं समझ सकता हूँ, उस समय यह नाम (Raviratlami ka Hindi Blog)रखने से काफी लाभ हुआ होगा। खैर आपका तो केस अलग है। लेकिन नए ब्लॉगरों के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता।

हाँ यह सही है कि चले हुए ब्लॉग का नाम बदलना ठीक नहीं होता पर नाम न बदलकर केवल लिपि बदलने से नाम तो नहीं बदलता। जैसे रंजना जी के ब्लॉग का नाम पहले था - Kuch Meri Kalam Se बाद में उन्होंने इसे कर दिया - कुछ मेरी कलम से यह अधिक सुन्दर भी है और सार्थक भी।

Tarun ने कहा...

भैय्या तुम्हारे चिट्ठे का टाईटल सिर्फ बॉक्स जैसा ही नजर आ रहा है

Shrish ने कहा...

@तरुण,
इधर तो सब सही दिख रहा है जी, आपके सिस्टम में ही कुछ लोचा लगता है।

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