हिन्दी में व्यावसायिक चिट्ठाकारी का वर्तमान और भविष्य
Present & Future of Professional Blogging in Hindi
आजकल हिन्दीजगत में व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर चर्चा का दौर जारी है। पहले धुरविरोधी ने इस मामले को उठाया, फिर मसिजीवी ने कुछ प्रश्न पूछे और रविरतलामी जी ने इस पर काफी जानकारी पूर्ण लेख लिखा। पहले भी रह-रहकर यह मामला चर्चित रहा है। अतः काफी समय से इस पर अपने विचार व्यक्त करने की सोच रहा था।
जब भी व्यावसायिक चिट्ठाकारी की बात आती है अमित अग्रवाल (Digital Inspiration) का नाम जरुर आता है। यह स्वाभाविक भी है क्योंकि वे भारतीय ब्लॉगरों में सर्वाधिक पाठक संख्या रखते हैं। इसके अतिरिक्त GigaOM (ओम मलिक), Quick Online Tips आदि सर्वाधिक पाठक संख्या वाले भारतीय ब्लॉग हैं। इनमें से प्रोफेशनल ब्लॉगिंग में अमित ही आगे हैं अन्य ब्लॉग या तो नॉन-प्रोफेशनल हैं या उनसे इस मामले में पीछे हैं। अपनी एक पोस्ट में उन्होंने अपनी आय के बारे में बताया है जिसमें उस दिन की आय १००० डॉलर दर्शायी गई है।
सबसे पहले अमित जी की सफलता के कुछ कारण गिनाना चाहूँगा।
» अमित उच्च शिक्षित हैं वे आईआईटी रुड़की से स्नातक हैं। इसके अतिरिक्त उनका तकनीकी ज्ञान बहुत विस्तॄत है वे हर तकनीकी क्षेत्र में दखल रखते हैं।
» अमित की लेखन शैली मौलिक है। जहाँ अन्य तकनीकी ब्लॉग घिसी-पिटी खबरों और विषयों पर ही केंद्रित रहते हैं, वहीं अमित का विषय का प्रस्तुतिकरण हमेशा नवीनता लिए होता है।
» उनकी पाठकों की नब्ज पर गहरी पकड़ है, कई अन्य तकनीकी ब्लॉग जो आम पाठक को समझ न आने वाले हाई-फाई किस्म के अनुपयोगी तकनीकी समाचारों तथा लेखों से भरे होते हैं वहीं अमित अपने पाठकों की रुचि के अनुरुप उपयोगी लेख लिखते हैं।
» तकनीकी ज्ञान के अतिरिक्त उनकी लेखन शैली भी कमाल की है। उनकी पोस्ट पढ़ते हुए लगता है जैसे एक-एक शब्द नाप-तोल कर लिखा गया हो। एकदम सटीक, उम्दा, सारगर्भित तथा कसा हुआ लेखन।
» वे अपने ब्लॉग की मैंटीनेन्स, प्रमोशन तथा क्वालिटी पर काफी ध्यान देते हैं, इसके लिए वे काफी समय देते हैं।
यह सब लिखने से मेरा आशय है कि किसी भी प्रोफेशनल ब्लॉगर की सफलता देखने के साथ साथ उसकी योग्यता और मेहनत भी देखिए। अब ध्यान देने योग्य बात हे है कि प्रोफेशनल ब्लॉगों में से ज्यादातर तकनीकी अथवा अन्य क्षेत्र विशेष से हैं। खिचड़ी ब्लॉग इस मामले में कम ही सफल हैं। इस स्तर की व्यावसायिकता के लिए आवश्यक है कि फुल टाइम ब्लॉगिंग करें तथा अपने फील्ड में एक्सपर्ट हों चाहे वह फिर तकनीकी हो या कुकिंग। दूसरे नम्बर पर पार्ट टाइम ब्लॉगर हैं जो भिन्न उदेश्यों से भी लिखते हैं अतः जितनी कमाई हो जाए संतुष्ट हैं। इस विषय में अमित का यह लेख भी पठनीय है।
हाँ सभी इंग्लिश ब्लॉग भी कमाई के मामले में अव्वल नहीं। वहाँ भी सीमित पाठक संख्या वाले ब्लॉग हैं। इस मामले में केवल हिन्दी वाले ही कुएं के मेंढक नहीं, इंग्लिश ब्लॉगरों में नवयुवकों की एक जमात है जो अधिकतर तकनीकी क्षेत्रों यथा अभियांत्रिकी या कम्प्यूटर विज्ञान में अध्यनरत हैं। यद्यपि वे काफी अच्छा लिखते हैं लेकिन उनका पाठक वर्ग आपस में ही सीमित है।
अब बात आती है वापस हिन्दी जगत पर।
हिन्दी चिट्ठाजगत में व्यावसायिकता में निम्नलिखित बाधाएं हैं।
» सबसे बड़ा अवरोध न्यून पाठक संख्या है। हिन्दी ब्लॉगिंग के बारे में अभी भी बहुत कम लोगों को पता है। लाखों इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं की तुलना में हिन्दीजगत के बारे में मुश्किल से ५०० लोग जानते होंगे। अब यह बताने की आवश्यकता नहीं कि विज्ञापनों से आय का सीधा संबंध पेज लोड तथा क्लिक्स की संख्या से है।
» इंग्लिश ब्लॉग्स पर आने वाले बहुसंख्यक पाठक गूगल आदि सर्च इंजनों से आते हैं, यद्यपि गूगल, याहू आदि में अब यूनीकोड का पूर्णतया सपोर्ट है लेकिन वही पुराना कारण, चूँकि अधिकतर लोगों को नैट पर हिन्दी की उपस्थिति के बारे में पता ही नहीं अतः वे हिन्दी शब्द सर्च करते नहीँ। इसके अतिरिक्त उन्हें हिन्दी शब्द टाइप करने का तरीका भी नहीं मालूम।
रही बात इंग्लिश सर्च तो उसमें यदि हिन्दी ब्लॉग से पेज होते भी हैं तो बहुत पीछे, वहाँ तक पाठक जाता नहीं। गूगल पेज रैंक कम होने के यही कारण हैं।
» गूगल, याहू तथा एमएसएन को छोड़कर अन्य कम्पनियों ने हिन्दी में विज्ञापन शुरु नहीं किए लेकिन ये इतना बड़ा मसला नहीं।
» अधिकतर भारतीय या तो पाइरेटिड सॉफ्टवेयरों के आदी हैं या फिर ओपन सोर्स मुफ्त सॉफ्टवेयरों के प्रयोगकर्ता अतः मसिजीवी की यह बात भी कुछ हद तक सही है कि, "हिंदी ब्लाग पाठक विज्ञापनों को क्लिक करने से विशेष रूप से परहेज करते हैं"।
» अधिकतर हिन्दी ब्लॉग खिचड़ी ब्लॉग हैं। तकनीकी, साहित्य, हास्य-व्यंग्य, फोटोब्लॉग, पॉडकास्ट सब एक ही में। जिस कारण पाठकों को पठन-सामग्री व्यवस्थित रुप में नहीं मिल पाती।
यह हुए कुछ कारण परंतु मुख्य कारण कम पाठक संख्या ही है। परंतु अब परिदृश्य बदल रहा है।
उम्मीद की किरण
» हिन्दीब्लॉगिंग के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। इलैक्ट्रोनिक तथा प्रिंट मीडिया में चर्चा के कारण तथा नित नए हिन्दी वेबसाइटों के शुरु होने से आम जन तक इसका प्रसार हो रहा है। हाल ही में नए चिट्ठाकारों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
इसके अतिरिक्त अधिकतर सर्च इंजन यूनीकोड सपोर्ट कर रहे हैं। मेरे ब्लॉग पर कई पाठक हिन्दी शब्द सर्च करते हुए पहुँच रहे हैं।
» हिन्दी लिखने के ऑनलाइन टूल्स की संख्या बढ़ती जा रही है जिससे हिन्दी लिखना सरलतम होता जा रहा है जिससे इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं में इसके प्रति भय कम हो रहा है।
» विंडोज के नए संस्करण विस्टा में हिन्दी का पूर्णतया समर्थन मौजूद है, इसमें हिन्दी टैक्स्ट पढ़ने के लिए कुछ करने की जरुरत नहीं। दो तीन साल बाद इसके प्रचलित हो जाने पर कम्प्यूटर तथा इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं में हिन्दी का रुझान अवश्य बढ़ेगा।
» जैसा कि रवि जी ने बताया गूगल एडसेन्स हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं को अपना रहा है जिससे पाठकों को Context Sensitive विज्ञापन मिलने से वह उन्हें क्लिक करने को प्रोत्साहित होगा।
» हाल ही में अलग-अलग विषयों पर केन्द्रित ब्लॉग्स की संख्या बढ़ी है जैसे सिलेमा, डेस्कटॉप यंत्र, मीडिया युग, देसी टून्स, अंतरिक्ष आदि। इसके अतिरिक्त हिन्दी जगत से हर क्षेत्र से लोग जुड़ रहे हैं जिसमें तकनीक, विज्ञान, साहित्य तथा मीडिया आदि शामिल हैं।
परंतु हमें समय का इन्तजार करने के बजाय इस दिशा में स्वंय भी कुछ प्रयास करने होंगे। हिन्दी ब्लॉगिंग को लोगों तक पहुँचाना होगा।
इस बारे में मेरे कुछ सुझाव इस प्रकार हैं।
» लाख टके की बात यह है कि हमें पाठक संख्या बढ़ानी होगी इसके लिए सर्च इंजन ऑप्टिमाईजेशन, सोशल नैटवर्किंग सेवाओं आदि के साथ साथ सभी को चाहिए कि वे अपने साथियों को हिन्दीजगत से जोड़ें।
» आप जिस क्षेत्र से संबंधित हैं जिसमें विशेषज्ञ हैं उस बारे में ब्लॉगिग करें चाहे वह फिर तकनीक, चिकित्सा, साहित्य, मीडिया से लेकर कुकिंग, बागवानी ही क्यों न हो। विभिन्न विषयों पर केन्द्रित ब्लॉग्स आरंभ किए जाएं। अगर आपकी एकाधिक क्षेत्रों में रुचि है तो खिचड़ी ब्लॉग बनाने की बजाय एकाधिक ब्लॉग बनाएं।
» यह न सोचें कि आज आपके लिखे को पर्याप्त पाठक या कमेंट्स नहीं मिल रही। रवि जी के अनुसार लिखते हुए आप इतिहास बना रहे होते हैं अतः अच्छा तथा सारगर्भित लिखने का प्रयास करें। एक बार हिन्दी सर्च के प्रचलित हो जाने के बाद आपका लिखा हुआ बहुतायत से पढ़ा जाएगा।
» पूरे ब्लॉग को विज्ञापनों को न पाट दें। एक ही जगह पर लगाने की बजाय पूरे ब्लॉग पर समान तरीके से व्यवस्थित करें ज्सिसे कि वह दिखने में भी भद्दा न लगे और पाठक उस पर ध्यान भी दे।
» वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमें Per Clicks की बजाय Per Page Loads वाले विज्ञापनों तथा अन्य विकल्पों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।
निष्कर्ष
सपष्ट है कि आज की तारीख में हिन्दी ब्लॉगिंग को कोई फुल टाइम ब्लॉगिंग कैरियर के तौर पर नहीं अपना सकता। फिलहाल इससे केवल इंटरनैट और वेब होस्टिंग आदि का खर्चा निकल सकता है। इंग्लिश ब्लॉग्स जितनी न सही संतोषजनक आय हो ही सकती है। यह तय है कि भविष्य में पाठक संख्या निश्चित रुप से बढ़ेगी जिससे पेज हिट्स और अंततः आय बढे़गी। अतः रविजी के शब्दों में, "बेहतर यही होगा कि आप तैयार रहें"।
अगर आप विषय विशेष पर लिखते हैं और प्रोफेशनल ब्लॉगिंग के बारे में जरा भी सीरियस हैं तो वर्डप्रैस.कॉम को छोड़कर ब्लॉगर या वर्डप्रैस पर आ जाएं, क्योंकि वहाँ विज्ञापन लगाने की अनुमति नहीं है। आपका आज का लिखा हुआ भविष्य में भी कमाई करेगा।
हो सकता है यह लेख आज से चार-पाँच साल बाद किसी पाठक द्वारा पढ़ा जा रहा हो और वह हँस रहा हो कि ऐसे भी कभी दिन थे जब हिन्दी में व्यावसायिकता की संभावना बारे संदेहपूर्ण रुप से बात की जाती थी।
अपडेट: मैंने अमित जी से अनुरोध किया था कि वे इस बारे में हिन्दी ब्लॉगजगत को कुछ सुझाव दें। उन्होंने अपने सुझाव इस पोस्ट में दिए हैं: Professional Blogging in Indian language Hindi
अमित जी का इसके लिए धन्यवाद !
संबंधित कड़ियाँ
व्यावसायिक चिट्ठाकारिता - बारंबार पूछे जाने वाले प्रश्न
पेशेगत हिंदी ब्लागवाद से अभी कितना दूर हैं हम???
हिन्दी ब्लाग नोट छापने की मशीन नहीं है!
व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर टिप्पणी
हिन्दी ब्लॉगिंग का व्यवसायिक भविष्य
हिन्दी चिट्ठाकारिता के नवीन आयाम
ऑनलाइन हिन्दी और चिट्ठाकारिता





15 टिप्पणियाँ:
बढ़िया लिखा है। सुझाव अच्छे हैं। आप इससे संबंधित मेरे इन लेखों का संदर्भ भी जोड़ सकते हैं -
http://srijanshilpi.com/?p=39
http://srijanshilpi.com/?p=42
वाह श्रीश, अगर इसी गंभीरता से तकनीकी बातें लिखते रहे तो ये मान लो कि रेस में आप ही का नंबर पहला है :)
पंडित जी,
बहुत ही बढ़िया आपने लेख लिखा और हिंदी चिठ्ठाकारी की दुनिया में व्यवसायिकता पर बहस को आगे बढ़ाया । साधुवाद स्वीकारें।
मेरे ख्याल से जैसे हिंदी पत्रिकाओं का हाल है कि कोई भी स्तरीय एक विषय की पत्रिका नहीं है वैसा ही हाल हिंदी ब्लागिंग का है। कोई भी विशेषज्ञ ब्लाग न होकर खिचड़ी ही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पाठकों का न होना है। अधिकतर पाठक या तो स्वयं हिंदी ब्लागर हैं या देश की भाषा के पेमवश इंटरनेट पर विचरण करते प्रवासी भारतीय। जब तक पाठक नहीं होंगे व्यवसायिकता भी नहीं बढ़ेगी और विशेषज्ञ हिंदी ब्लाग भी नहीं बनेंगे।
वैसे, आप अपने ब्लाग को कब व्यवसायिक कर रहे हैं?
मनीषा
http://hindibaat.blogspot.com
पंडित जी,
बड़े दिनों से मेरे मन-मस्तिष्क में इस तरह के ढ़ेरों प्रश्न उमड़ रहे थे। आज मुझे, मेरे सभी प्रश्नो के उत्तर मिल गये। इस सारगर्भित लेख के लिए आपका धन्यवाद।
इतने सुन्दर लेख को पढ़ कर मैं भी यही कहूंगा जो रवि साहब ने उपर कहा है कि ....रेस में आप ही का नंबर पहला है।
अग्रिम शुभकामनायें और सुन्दर लेख के लिये बधाई
॥दस्तक॥
जी शुक्रिया, इस पोस्ट के लिए। आशा करता हूँ कि आपको अहसास है कि ये पौस्टें ही इतिहास निर्माण का गारा-मिट्टी हैं।
अब बात बची है कि क्यों हिंदी ब्लॉगों का पाठक समुदाय छोटा है। हम इस विषय पर सोच रहे हैं। आप भी सोचिए और सोच को बांटिए।
हिंदी ब्लॉगिंग की व्यावसायिक संभावनाओं पर इतनी अच्छी जानकारी इससे पहले मेरे सामने नहीं आई थी. धन्यवाद.
बहुत बहुत धन्यवाद इस लेख के लिये!
बहुत ही बढ़िया लेख, साधुवाद स्वीकारें!!
बात तो सही कह रहें हैं।
श्रीश जी, बहुत ही जानकारी पूर्ण लेख है। इसके लिये धन्यवाद।
"हो सकता है यह लेख आज से चार-पाँच साल बाद किसी पाठक द्वारा पढ़ा जा रहा हो और वह हँस रहा हो कि ऐसे भी कभी दिन थे जब हिन्दी में व्यावसायिकता की संभावना बारे संदेहपूर्ण रुप से बात की जाती थी।"
सच कहा ! कुछ दिनों पहले तक हम लोग ऐसे औपरेटिंग सिस्टम के साथ जूझते थे, जो यूनीकोड ही नहीं सपोर्ट करते थे.
यह सोच कर बङा अजीब लगता है की कुछ ही साल पहले हिन्दी में लिखना भी संभव नहीं था :)
पर अब तो हिन्दी के लिये हर तरह के टूल उपलब्ध हैं. अब जिन्दगी कितनी आसान हो गयी है :)
यह लेख अच्छा, जानकारी पूर्ण है। अच्छा लगा। बधाई!
बहुत खुब, पंडित जी. बहुत सोच समझ कर, सुव्यवस्थित ढंग से आपने अपनी पूरी बात कही. अच्छा लगा पढ़ कर. बधाई.
आप ने सही लिखा, कुछ समय पहले तक हिन्दी लिखने के इतने टूल नहीं थे। आज विविध विषयों पर ब्लॉग्स में लिखा जा रहा है और पाठक संख्या भी बढ़ रही है। यही नहीं, हिन्दी शब्द यदि गूगल में खोजा जाए तो अधिकतर लिंक्स हिन्दी चिट्ठाकारों की और कुछ सरकारी साइट्स की होतीं हैं।
टिप्पणी करें
लिंक करें