ब्लॉग पर अपने तथा दूसरों के लेख व अन्य सामग्री का प्रयोग करने एवं करने देने संबंधी मानक
अब मैं इस विषय पर अपने विचार रखना चाहता हूँ। इस पोस्ट का विषय पोस्ट चोरी होने पर क्या करें नहीं, बल्कि अपने ब्लॉग पर दूसरों की सामग्री प्रयोग करने तथा दूसरों को अपनी सामग्री प्रयोग करने देने बारे है।
सबसे पहले तो यह अच्छी बात है कि हमारे चिट्ठाजगत में अब तक कोई चोर नहीं हैं, अब तक जो भी चोरियाँ हुई हैं वो चिट्ठाजगत से बाहर के लोगों द्वारा की गई हैं। लेकिन हम इस बारे में कुछ मूल बातों बारे जागरुक नहीं हैं।
किसी दूसरे के लेख का अपने ब्लॉग पर प्रयोग करना
अधिकतर मामलों में लोग कहते हैं कि भैया बस स्त्रोत का उल्लेख कर दो ठीक है, लेकिन आप यह बताइए कि अगर मैं आपका पूरा लेख अपने चिट्ठे पर लिख दूँ और साथ में लिख दूँ कि यह लेख फलां का है तो क्या आप संतुष्ट होंगे।
सब से सही तरीका यह है कि उस व्यक्ति के ब्लॉग पर जाइए और देखिए कि उसने अपनी सामग्री के प्रयोग के बारे में कुछ निर्देश दिए हैं या नहीं। हिन्दी ब्लॉगजगत में अभी ऐसा करने वाले बहुत कम हैं। अधिकतर प्रतिष्ठित इंग्लिश ब्लॉगों में इस बारे में नीतियाँ सपष्ट लिखी होती हैं। उनके पन्नों पर About, License, Copyright आदि पन्नों पर इस बारे में आपको जानकारी मिल जाएगी। अधिकतर ब्लॉगर नहीं चाहेंगे कि आप उनके लेख को प्रकाशित करें क्योंकि भाई सब लोग मेहनत और वक्त लगाकर लिखते हैं, सबका अपनी सामग्री पर हक है। उपरोक्त पन्नों पर ही आपको जानकारी मिल जाएगी कि अमुक व्यक्ति की इस बारे क्या नीतियाँ हैं।
बहुत से ब्लॉगर Creative Commons के लाइसेंस का उपयोग करते हैं, उनके ब्लॉग पर आपको क्रिएटिव कॉमन्स का आइकॉन मिल जाएगा। उस पर क्लिक करने से जो पेज खुलेगा उस पर इस बारे निर्देश दिए होंगे।
कुल मिलाकर जब तक कि कोई व्यक्ति खुद ही अनुमति नहीं देता पूरा लेख प्रकाशित करने से बचना चाहिए। अब बात आती है कि अगर किसी ने ऐसी कोई जानकारी नहीं दी है तो क्या किया जाए। सबसे अच्छा तरीका यह है कि उस से संपर्क करके इसके लिए अनुमति मांगी जाए तथा उसी अनुसार आगे काम करें।
इंग्लिश ब्लॉगजगत का मानक तरीका यह है कि अगर आपको कोई लेख पसंद आए तो उसके कुछ महत्वपूर्ण अंश उदधृत (Quote) करके 'पूरा लेख यहाँ पढ़ें' ऐसा लिख कर नीचे लेख का लिंक दे दिया जाए। यह सबसे सुरक्षित तरीका है, इस पर किसी ब्लॉगर को आपत्ति नहीं होगी बल्कि वह प्रसन्न होगा कि आपने उसे लिंक किया।
इसके अलावा एक अन्य तरीका जो खासकर तकनीकी लेखों में प्रचलित है कि आप पोस्ट के शुरु में ही मूल लेखक का नाम लिखकर बताएं कि यह पोस्ट अमुक के लेख या विधि पर आधारित है। फिर उसके लेख को अपने शब्दों में सरल करके या व्याख्या करके लिख दें। वैसे इसके लिए भी आप अनुमति ले लें तो और बेहतर है।
जब स्त्रोत ज्ञात न हो
जब किसी लेख आदि का स्त्रोत ज्ञात न हो तो लेख के अंशो की गूगल सर्च करके देखें बहुत उम्मीद है कि आपको पता चल जाएगा कि मूल लेखक कौन है। यदि एकाधिक जगह लेख मिले तो अधिक संभावना यही है कि जिसने सबसे पहले लिखा हो वही मूल लेखक है।
यदि फिर भी पता न चल पाए और आपको लेख लिखना ही लिखना है तो मेरे विचार से ऐसा किया जा सकता है कि पोस्ट के साथ यह सूचना लगा दें:
यह लेख मूलतः मेरा नहीं है, मुझे इस लेख के मूल लेखक के बारे में ज्ञात नहीं है, यदि आप इसके मूल लेखक हैं तो अपने बारे में बताएं, मैं स्त्रोत के रुप में आपका उल्लेख कर दूँगा। यदि आपको इस लेख के प्रकाशन पर आपत्ति है तो कृपया प्रमाण सहित बताइए मैं इस लेख को हटा दूँगा।
(वैसे यह सिर्फ सेफ रहने का एक तरीका हो सकता है कोई मानक नहीं है)
अगर आपको कभी मूल लेखक का पता चले तो उससे प्रकाशन हेतु निर्देश (अनुमति) ले लें। यदि वह न चाहे तो लेख हटा दें।
इसके अतिरिक्त अखबारों, पत्रिकाओं आदि से कोई समाचार लिखने के संबंध में मेरे विचार से स्त्रोत का उल्लेख करने से काम चल सकता है।
चित्रों का प्रयोग करना
किसी अन्य व्यक्ति के चित्रों के प्रयोग में भी उपरोक्त ही बात लागू होती है। अगर आप नेट पर उपलब्ध विभिन्न सेवाओं यथा फ्लिकर आदि तथा समाचार पत्र, पत्रिकाओं तथा साइटों पर उपलब्ध चित्र छापते हैं तो स्त्रोत का उल्लेख करना ही काफी है।
ऑडियो-वीडियो का प्रयोग करना
अधिकतर मामलों में हम ऑडियो-वीडियो अपने चिट्ठे पर होस्ट न करके उन्हें नेट पर विभिन्न ऑडियो-वीडियो साइटों द्वारा दिए गए कोड से अपने चिट्ठे पर लगाते हैं। इस हेतु मेरे विचार से किसी अनुमति की आवश्यक्ता नहीं है। उदाहरण के लिए यूट्यूब आदि साइटों पर यदि किसी का कॉपीराइटेड वीडियो होस्ट है तो उसे बिना अधिकार अपलोड करने वाला तथा यट्यूब दोषी होगें, अपने चिट्ठे पर लगाने वाला नहीं।
नेट पर जो तमाम वारेज (Warez) तथा टोरेन्ट (Torrents) साइटें हैं उन सब की यही पॉलिसी है कि चूंकि हम खुद संबंधित सामग्री को होस्ट नहीं करते, केवल इंडेक्स करते हैं अतः हम किसी भी मामले में दोषी नहीं।
अपने ब्लॉग की सामग्री के प्रयोग संबंधी बातें
अब बारी आती है अपने ब्लॉग की सामग्री के प्रयोग संबंधी।
अब यह तो तय है कि तकनीकी रुप से ब्लॉग चोरी रोकने का कोई तरीका नहीं है। स्क्रिप्ट आदि लगाकर राइट क्लिक को डिसेबल करके चोरी को नहीं रोका जा सकता। कोई सामान्य सा चोर भी इन तरीकों को भेद सकता है। ऐसी बचकानी हरकतों से चोरी नहीं रुक सकती।
सही काम यह है कि अपनी पोस्ट के चोरी होने के बाद शोर मचाने से अच्छा है कि पहले ही इस बारे में नीतियाँ सपष्ट की जाएं।
अपनी सामग्री के प्रयोग के बारे सपष्ट रुप से लिखें कि आप उसे पुनर्प्रकाशित होने देना चाहते हैं या नहीं, यदि हाँ तो इसके लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता है या नहीं, यदि नहीं तो स्त्रोत उल्लेख आवश्यक है या नहीं आदि।
इसके अतिरिक्त एक अच्छा तरीका है क्रिएटिव कॉमन्स के मुफ्त उपल्ब्ध लाइसेंस का प्रयोग करने का। इसका हाल ही में संस्करण ३.० जारी हो चुका है। आप इस पेज पर जाकर अपने उपयुक्त लाइसेंस का चुनाव कर सकते हैं। इसके पश्चात आपको कोड दे दिया जाएगा उसे आप अपने ब्लॉग के फुटर या साइडबार आदि में लगा सकते हैं।
ध्यान दें कि आप जो सामग्री यथा लेख, चित्र, ऑडियो-वीडियो आदि कहीं और से लेते हैं उसके लिए अधिकतर मामलों में मूल लाइसेंसधारक का ही लाइसेंस मान्य होगा, आपका नहीं।
अब आपने जो सामग्री इंटरनेट से से ली हैं जैसे चित्र आदि उन पर आप दावा नहीं कर सकते, इंटरनेट से लिए गए चित्रों को अगर आप इस्तेमाल कर सकते हैं तो कोई और भी इस्तेमाल कर सकता है।
मान लीजिए आपने फ्लिकर से लेकर चित्र प्रकाशित किए उन्हें आगे चाहे कोई आपके ब्लॉग से भी कॉपी करके छापे तो भी आप उन पर दावा नहीं कर सकते। आप केवल उसी सामग्री यथा लेख, चित्र, ऑडियो-वीडियो आदि पर दावा कर सकते हैं जो आपकी अपनी है।
वैसे ये बात तो सही है कि हद से ज्यादा नियमों का पालन करने लगें तो लिखना ही मुश्किल हो जाएगा लेकिन इतना अवश्य करना चाहिए कि दूसरों की सामग्री का इस्तेमाल करने से पहले अनुमति लें अथवा कम से कम स्त्रोत का उल्लेख करें। जैसे हमें अपनी पोस्ट की चोरी बुरी लगती है वैसे ही किसी और को भी लगेगी। आखिर कोई भी ढंग की पोस्ट लिखने में मेहनत और वक्त तो लगता ही है।
डिसक्लेमर
इस पोस्ट में लिखी गई बातें मेरे निजी विचार हैं जो इंटरनेट पर प्रचलित मानकों पर आधारित हैं। इनका कानूनी रुप से सही होना कतई आवश्यक नहीं है। इसके लिए किसी विशेषज्ञ से सलाह लें।
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7 टिप्पणियाँ:
सही समय पर अच्छा, जानकारी भरा लेख,
यह बात गौर करने योग्य है कि जब आप किसी साइट या ब्लाग से कोई चीज लेना गलत नही समझते तो आपके ब्लाग से लिया गया कोई चीज कैसे गलत हो सकता है?
सच्चई के मापदंड को सभी के लिये समान रहना चाहिये!
श्रीश जी अच्छा लेख है। जानकारी से भरा हुआ। आपके विचार और सुझाव महत्वपूर्ण हैं।
पंडित जी,
अच्छा लेख। सबक लूंगी। काफी मेहनत से लेख तैयार किया है।
मनीषा
hindibaat.blogspot.com
पंडित जी,
अब यह बताइये कि यह 3 कॉलम का प्रारुप आपने कहां से लिया है। यह अच्छा लग रहा है। दूसरा, नारद की नवीनतम पोस्टों को अपने चिठ्ठे में कैसे शामिल करते हैं, तीसरा, अपनी पिछली पोस्टों और लोगों की टिप्पणियों को कैसे ब्लाग में शामिल किया है, कृपया बतायें।
मनीषा
hindibaat.blogspot.com
अच्छी सूचनायें हैं, बंधु, धन्यवाद।
इतनी अच्छी बातें बताने और जानकारी के लिए आपका धन्यवाद पंडितजी।
क्षमा कीजिए मित्रों इंटरनेट कनेक्शन के डाउन होने से आपकी टिप्पणियों का जवाब देने में देरी हुई।
@Mahashakti,
"यह बात गौर करने योग्य है कि जब आप किसी साइट या ब्लाग से कोई चीज लेना गलत नही समझते तो आपके ब्लाग से लिया गया कोई चीज कैसे गलत हो सकता है?"
प्रमेन्द्र भैया लगता है फुरसतिया जी के फॉर्मूले से बिना लेख पढ़े टिप्पणी कर दिए हो। :)
अरे भाई मैंने कब कहा कि किसी साइट या ब्लॉग से कोई चीज लेना गलत नहीं है। ऊपर इतनी बार तो बोला है कि पहले अनुमति लो, अनुमति लो, अनुमति लो...
@Manisha,
मनीषा जी धन्यवाद ! मेहनत लगी भी और नहीं भी। इंग्लिश ब्लॉगजगत में लिखने में अधिक समय तो नहीं लगाया पर पढ़ा बहुत है। यह लेख उन्हीं मानकों पर आधारित है।
आपके सभी प्रश्नों का उत्तर एक-एक कर दे सकूँगा।
@Somesh Saxena, Pramod Singh & Shuiab,
सोमेश, प्रमोद और शुएब भाई उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद !
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