अथ श्री पॉडकास्टिंग महापुराण
हिन्दी चिट्ठाजगत में पॉडकास्टिंग का प्रचलन अभी भी सीमित ही है (बोल तो ऐसे रिया है जैसे खुद पता नी कितने पॉडकास्ट कर रखे हों)यद्यपि इस बारे में जागरुकता बढ़ रही है। अभी तक एक भी नियमित पॉडकास्टिंग ब्लॉग नहीं है, अगर एकाध हुआ तो उस पर नियमित प्रसारण नहीं होता। बाकी कुछ साथी एकाध बार करके शौक पूरा कर लेते हैं। अतः पॉडकास्टिंग बारे जागरुकता बढ़ाने हेतु लेखों की श्रृंखला शुरु करने जा रहा हूँ। आज के लेख में पॉडकास्टिंग का एक संक्षिप्त परिचय दे रहा हूँ।
पॉडकास्ट से तात्पर्य एक अथवा एकाधिक डिजिटल मीडिया फाइल से है जो कि इंटरनैट पर फीड के द्वारा प्रसारित की जाती है जिसे कि कंप्यूटर तथा पोर्टेबल मीडिया प्लेयरों जैसे आईपॉड तथा स्मार्टफोन आदि द्वारा सुना जा सकता है। इस प्रक्रिया को पॉडकास्टिंग कहा जाता है। पॉडकास्ट बनाने तथा प्रसारित करने वाले को पॉडकास्टर कहा जाता है। इसके अतिरिक्त किसी पॉडकास्ट शो में होस्ट की भूमिका निभाने वाले को पॉडकास्ट जॉकी कहा जाता है। इसके अतिरिक्त वीडियो युक्त पॉडकास्ट को वीडियो पॉडकास्ट या वॉडकास्ट कहा जाता है।
ब्लॉग के द्वारा प्रसारित किए जाने वाले पॉडकास्ट को ब्लॉगकास्ट कहा जाता है जो कि स्वाभाविक रुप से ब्लॉग और पॉडकास्ट से बना पोर्टमैन्टो शब्द है। एक ब्लॉगकास्ट में मीडिया फाइल के साथ कुछ टैक्स्ट सारांश (मीडिया फाइल के बारे में) होता है जिससे वह सर्च इंजनों द्वारा इंडैक्स कर लिया जाता है जिससे कि संबंधित पॉडकास्ट सर्च किया जा सके। सामान्य शब्दों में कहें तो ब्लॉगर अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट में कोई मीडिया फाइल (ऑडियो/वीडियो) डालता है जिसे पाठक ब्लॉग पर आकर अथवा आरएसएस फीड द्वारा देख/सुन सकता है। सामान्य तौर पर ब्लॉग के मामले में चिट्ठाकार ही पॉडकास्टर तथा पॉडकास्ट जॉकी होगा। ब्लॉगिंग की तरह ही पॉडकास्टिंग में भी कोई बंदिश नहीं है, आप अपने मर्जी के विषय पर पॉडकास्ट कर सकते हैं।
पॉडकास्ट एक पोर्टमैन्टो शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है, एप्पल (Apple) के पोर्टेबल म्यूजिक प्लेयर आईपॉड (IPod) तथा ब्रॉडकास्ट (Broadcast) से। पॉड का अर्थ है एक कंटेनर अतः पॉडकास्टिंग से अर्थ हुआ कंटेनर से ब्रॉडकास्टिंग। यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि पॉडकास्टिंग की शुरुआत आईपॉड से ही हुई थी। बाद में इसे इंटरनैiट पर अन्य साधनों जैसे वेबसाइटों, ब्लॉगों आदि पर भी प्रयोग किया जाने लगा। पॉडकास्टिंग का इतिहास विकिपीडिया पर यहाँ पढ़ा जा सकता है।
पॉडकास्टिंग कैसे प्रचलन में आई
यद्यपि सैकड़ों डिजिटल म्यूजिक प्लेयर हुए हैं लेकिन आईपॉड अपनी विशिष्टताओं के कारण इनमें सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रचलित हुआ। इसमें वॉइस रिकॉर्डिंग का भी फंक्शन था जिसे mp3 फॉर्मेट में इंटरनैट पर अपलोड किया जा सकता था। इन फाइलों को अन्य आईपॉड प्लेयरों में iTunes सॉफ्टवेयर के जरिए सुना जा सकता है। इस तरह आईपॉड के जरिए संगीत के प्रसारण (ब्रॉडकास्टिंग) के कारण ही इसे पॉडकास्टिंग कहा जाने लगा। चूंकि mp3 फॉर्मेट अधिकतर सभी प्रकार के हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर प्लेयर सपोर्ट करते हैं अतः बाद में इसका प्रचलन अन्य माध्यमों में भी हो गया।
आरंभ में इसका उपयोग पर्सनल रेडियो शो के तौर पर किया गया। परंतु बाद में इसका उपयोग शिक्षा संबंधी तथा सार्वजनिक क्षेत्रों के कार्यों हेतु भी किया जाने लगा। यह विधा सन २००४ से अधिक लोकप्रिय होना आरंभ हुई। नैट पर ब्लॉगिंग के लोकप्रिय होने के साथ ही यह विधा इससे जुड़ गई और इस तरह ब्लॉगकास्टिंग का जन्म हुआ।
यद्यपि कई पॉडकास्टरों की वेबसाइटें मीडिया फाइल की डायरेक्ट डाउनलोडिंग या स्ट्रीमिंग भी प्रदान करती हैं लेकिन पॉडकास्ट की विशेषता है कि यह ऐसे डिजिटल ऑडियो फॉर्मेटों का उपयोग करता है जो कि आरएसएस या एटम फीड का उपयोग कर विभिन्न सॉफ्टवेयरों द्वारा स्वतः डाउनलोड कर लिया जाता है।
पॉडकास्टिंग कई तरीके से की जाती है। कुछ वेबसाइटें पूरी तरह से पॉडकास्टिंग हेतु समर्पित होती हैं उदाहरण के लिए IndiCast तथा Podtech.net आदि। हिन्दी पॉडकास्टों के लिए एक सेवा आरंभ की गई थी ब्लॉगनाद जो कि काफी समय से तकनीकी कारणों से बंद है। इसके नवीन और उन्नत संस्करण पर काम चल रहा है। फिलहाल इसके कुछ पुराने एपिसोड यहाँ सुने जा सकते हैं। कुछ साइटों पर पॉडकास्टिंग के लिए सैक्शन निर्धारित होते हैं जैसे तरकश पर पॉडकास्ट सैक्शन। जहाँ तक चिट्ठों का सवाल है हिन्दी में पॉडकास्ट का अधिक चलन न होने से ऐसा कोई चिट्ठा नहीं है जो पूरी तरह पॉडकास्ट के लिए समर्पित हो। विभिन्न चिट्ठों पर यदाकदा चिट्ठाकार पॉडकास्ट डालते हैं। यह सुझाव दिया जाता है कि आप अपने ब्लॉग पर पॉडकास्ट वाली पोस्ट में पॉडकास्ट, Podcast, पॉडकास्टिंग, Podcasting आदि टैग डालें।
पॉडकास्ट सुनना
रही बात पॉडकास्ट सुनने की तो आईपॉड के जरिए तो इसे सुना ही जा सकता है। इसके अतिरिक्त iTunes सॉफ्टवेयर (QuickTime Player के नए वर्जनों में यह इनबिल्ट आ रहा है) की मदद से आप इंटरनैट से पॉडकास्ट डाउनलोड करिए तथा iPod को पीसी से सिंक करके उसमें ट्राँसफ्रर कर दीजिए। अब उन्हें ऑफलाइन भी सुना जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त सॉफ्टवेयर प्लेयरों द्वारा ऑनलाइन सुनने के अलावा डाउनलोड करके जब मर्जी सुना जा सकता है। इसके अतिरिक्त आजकल नैट पर अधिकतर पॉडकास्टिंग साइटों तथा ब्लॉगों में संलग्न प्लेयर होता है जिसकी मदद से इन्हें बिना किसी बाहरी प्लेयर के ऑनलाइन ही सुना जा सकता है।
ब्लॉगकास्टों के अलावा अपनी पसंद के पॉडकास्ट ढूंढने के लिए आप नैट पर विभिन्न पॉडकास्टिंग सेवाओं और डायरेक्ट्रियों की मदद ले सकते हैं। इनमें Podcast.net, Podcast Directory आदि डायरेक्ट्रियाँ तथा Odeo,
Podcast Pickel, IndiCast आदि सेवाएं शामिल हैं।
पॉडकास्टिंग कैसे करें
पॉडकास्टिंग के लिए नैट पर ढेरों साइटें उपलब्ध हैं जैसे Odeo, Podcast Pickle, Ourmedia इसके अतिरिक्त HipCast आदि पेड सेवाएं भी उपलब्ध हैं। कुछ साइटें जैसे Podcast Pickle आदि दोनों तरह की मुफ्त तथा प्रीमियम सेवाएं देते हैं। मैंने इनमें केवल Odeo को आजमाया है, जो कि एक मुफ्त तथा अच्छी सेवा है।
चूंकि हम ठहरे ब्लॉगिए इसलिए हम पॉडकास्टिंग को ब्लॉगिंग के साथ लेकर चलेंगे, हमारे लिए वही तरीका अधिक व्यावहारिक भी है। इसलिए अब केवल केवल ब्लॉग के संदर्भ में बात करेंगे। पॉडकास्टिंग हेतु तीन चरण हैं जिनके बारे में फिलहाल संक्षेप में बता रहा हूँ, आगामी पोस्टों में इस प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करुँगा।
» मीडिया (ऑडियो/वीडियो) को रिकॉर्ड करना।
पहला काम है अपनी मीडिया फाइल को रिकॉर्ड करना। यह कार्य कई तरह से किया जा सकता है। कंप्यूटर पर इसके लिए एप्लीकेशनों का प्रयोग किया जा सकता है जिनमें WinAmp तथा JetAudio जैसे प्रचलित मीडिया प्लेयर भी शामिल हैं। यद्यपि इसके लिए एक सामान्य से टूल की ही जरुरत है लेकिन रिकॉर्ड की गई आवाज को संपादित करने हेतु कुछ उन्नत औजारों की जरुरत है जिनमें Audacity तथा Soundforge आदि शामिल हैं। इनके प्रयोग द्वारा इसमें विशेष प्रभाव जैसे विभिन्न ध्वनियाँ तथा बैकग्राउंड म्यूजिक आदि जोड़े जा सकते हैं।
हाँ अगर पॉडकास्ट इंटरनैट पर एकाधिक व्यक्तियों के बीच ऑनलाइन रिकॉर्ड किया जा रहा हो तो बातचीत में प्रयुक्त मैंसेंजरों यथा Yahoo! Messenger, Google Talk तथा Skype आदि के साथ कुछ टूल्स का उपयोग करना होगा।
इसके अतिरिक्त IPod आदि म्यूजिक प्लेयर तथा स्मार्ट मोबाइल फोनों के द्वारा भी आवाज को रिकॉर्ड किया जा सकता है।
» मीडिया को वेब पर अपलोड करना।
रिकॉर्डिंग के पश्चात उस फाइल को इंटरनैट पर किसी वैबसर्वर पर अपलोड करना होता है। यदि आपके पास अपना वैबस्पेस नहीं है तो आप इस कार्य के लिए कुछ मुफ्त उपलब्ध अपलोडिंग साइटों का सहारा ले सकते हैं। हाँ वह साइट आपकी मीडिया फाइल को डायरेक्ट लिंक द्वारा एक्सैस करने देती हो। इस प्रकार अपलोड की गई फाइल को आमतौर पर पॉडकास्ट का एक एपिसोड कहा जाता है।
» मीडिया फाइल को प्रसारित करना
इस चरण में अपलोड की गई फाइल को फीड द्वारा प्रसारित किया जाता है जो कि अधिकतर RSS फॉर्मेट में होती है। प्रसारित की गई फीड के पर्मालिंक को Feed URL कहते हैं। ब्लॉग के मामले में ब्लॉग पोस्ट की फीड ही Feed URL होती है जिसमें मीडिया फाइल की फीड स्वतः शामिल होती है। पॉडकास्ट की फीड में एकाधिक एपिसोड हो सकते हैं। अब श्रोता इस फीड को सब्सक्राइब करने के लिए एक विशेष प्रकार के फीड एग्रीगेटर का प्रयोग करते हैं जिसे पॉडकैचर या पॉडकास्ट रिसीवर कहा जाता है। आजकल अधिकतर कंप्यूटर तथा पोर्टेबल प्लेयरों के मीडिया प्लेयर में यह क्षमता होती है जिससे वे पॉडकास्ट को डाउनलोड कर चलाते हैं।
इसके अतिरिक्त आजकल अधिकतर साइटों/ब्लॉगों पर पॉडकास्ट में एक छोटा मीडिया प्लेयर संलग्न (Embed) कर दिया जाता है ताकि उसे बिना डाउनलोड किए तथा बिना किसी बाहरी मीडिया प्लेयर की मदद से ऑनलाइन ही चलाया जा सके। बल्कि सही तौर पर कहा जाए तो इंटरनैट पर अधिकतर इसी तरीके से पॉडकास्ट सुने जाते हैं।
इसके लिए नैट पर उपलब्ध कुछ सेवाओं अथवा किसी प्लगइन आदि की मदद से मीडिया प्लेयर संलग्न किया जाता है। वैकल्पिक रुप से मीडिया फाइल का डाउनलोड लिंक भी दिया जा सकता है ताकि धीमे इंटरनैट कनैक्शन वाले प्रयोगकर्ता उसे डाउनलोड कर चला सकें।
पॉडकास्टिंग से संबंधित कुछ अन्य तकनीकें
» ऑटोकास्टिंग
ऑटोकास्टिंग से तात्पर्य है ऑटोमेटिड टाइप की पॉडकास्टिंग जिसमें चिट्ठाकार/पाठक टैक्स्ट ब्लॉग को RSS फीड के प्रयोग द्वारा ऑडियो वर्जन के रुप में प्रसारित कर सकते/सुन सकते हैं। इसके लिए कुछ सेवाओं का उपयोग किया जाता है जो टैक्स्ट टू स्पीच इंजन तथा ऑडियो कन्वर्जन यूटिलिटियों के प्रयोग द्वारा टैक्स्ट को ऑडियो में बदलते हैं जिसे ब्लॉग पर ऑनलाइन अथवा डाउनलोड कर चलाया जा सकता है।
कुछ इंग्लिश ब्लॉगों पर मैंने इसका प्रयोग देखा है। कभी समय मिलने पर इस बारे में लिखूँगा।
» फोटोफीड
फोटोफीड चित्रों के लिए उसी तरह है जिस तरह पॉडकास्ट ऑडियो के लिए। फोटोफीड चित्रों के लिए उसी प्रकार कार्य करती है जैसे फीड यूआरएल ऑडियो पॉडकास्ट के लिए। फोटोफीड एग्रीगेटरों के द्वारा नैट पर विभिन्न सेवाओं से चित्रों को व्यवस्थित रुप से देखा/प्राप्त किया जा सकता है।
» वॉडकास्ट
वॉडकास्ट अर्थात वीडियो पॉडकास्ट के बारे में ऊपर बता ही चुका हूँ। यद्यपि यह तकनीक के रुप में ऑडियो पॉडकास्टिंग से काफी भिन्न है लेकिन स्वरुप के लिहाज से ऑडियो पॉडकास्ट जैसी ही चीज है। इस पर कभी एक अगल लेख लिखूँगा।
» स्ट्रीमिंग
इसका उल्लेख करना इसलिए जरुरी है क्योंकि शुरु में मैं अक्सर स्ट्रीमिंग तथा पॉडकास्टिंग में कन्फ्यूज रहता था।
स्ट्रीमिंग में कुछ मीडिया फाइलों को एक वैबसर्वर पर अपलोड करके उनकी प्लेलिस्ट स्ट्रीमिंग साइट पर उपलब्ध करवाई जाती है। स्ट्रीमिंग मीडिया को किसी सॉफ्टवेयर मीडिया प्लेयर द्वारा सुना जाता है जो उस प्लेलिस्ट फॉर्मेट को सपोर्ट हो। इसके लिए विनेम्प, म्यूजिक मैच ज्यूकबॉक्स, जैटऑडियो तथा रियल प्लेयर आदि का उपयोग किया जाता है।
स्ट्रीमिंग पॉडकास्टिंग से इस प्रकार भिन्न है कि इसमें फीड का प्रयोग नहीं होता जिससे कि इसको पॉडकास्ट के तौर पर उपयोग नहीं किया जा सकता। यद्यपि सामान्य अर्थ में यह पॉडकास्टिंग जैसी ही लगती है लेकिन तकनीकी तौर पर उससे काफी भिन्न है। रियल प्लेयर स्ट्रीमिंग हेतु सर्वाधिक उपयोग होने वाला सॉफ्टवेयर है।
» स्क्रीनकास्ट
स्क्रीनकास्ट से तात्पर्य कंप्यूटर स्क्रीन की डिजिटल रिकॉर्डिंग से है। यह स्क्रीन के रिकॉर्ड किए गए वीडियो तथा कई स्क्रीनशॉट्स का मिश्रण हो सकती है। इसमें आवाज (ऑडियो नैरेशन) भी शामिल हो सकती है। इसके लिए एकाधिक सॉफ्टवेयरों का प्रयोग किया जा सकता है। इसका उपयोग अक्सर टटोरियल, प्रेजेंटेशन आदि में किया जाता है। यह अधिकतर Flash या किसी वीडियो फॉर्मेट में होती है।
इस तरह के कुछ प्रयोग यद्यपि तरकश पर तथा रविरतलामी जी कर चुके हैं लेकिन सही मायने में हिन्दी का पहला स्क्रीनकास्ट कुछ ही समय पहले मिर्ची सेठ ने बनाया, जिसे आप यहाँ देख सकते हैं। मैं भी बहुत समय से इस तरह के चक्कर में था लेकिन उपयुक्त टूल न होने से चूक गया।
» वीडियो ऑन डिमांड
बाकी सब तो ठीक है लेकिन ये क्या बला है मुझे आज तक समझ न आया। जहाँ तक मेरा विचार है ये कुछ कुछ ऑडियो स्ट्रीमिंग के वीडियो संस्करण की तरह है। इसके बारे में यही जानता हूँ कि इसमें वीडियो कुछ नैटवर्कों पर होस्ट होता है (किस तरह के नैटवर्क पता नहीं) जिसे देखने/सुनने के लिए कुछ स्पैशल टाइप के हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर की जरुरत होती है जिसके द्वारा उपलब्ध वीडियो में से अपने मनपसंद के प्रोग्राम देखे/सुने जा सकते हैं।
अक्सर कहा जाता है कि ये भविष्य में टेलीविजन, केबल टीवी आदि का स्थान ले लेगा। कोई दो साल पहले BSNL की ब्रॉडबैंड सेवा Dataone के आगमन के समय भी इसका शिगूफा छिड़ा था। अब तक तो इधर कहीं दिखता नहीं, बड़े शहरों में हो तो पता नहीं। फिलहाल इतना तय है कि बड़ी झंझट की चीज है और फोकट में भी नहीं इसलिए हम ब्लॉगियों के मतलब की नहीं। क्या कोई इस बारे सरल शब्दों में कुछ समझा सकता है?
बात पॉडकास्टिंग से चलती चलती कहाँ पहुँच गई, वापस आते हैं मुद्दे पर। ऊपर बताए गई तकनीकी टाइप की बातें सिर्फ ज्ञानवर्धन के लिए थीं। अगर इनको पढ़ते पढ़ते सिरदर्द होने लगा हो तो चिंता की कोई बात नहीं। पॉडकास्टिंग चिट्ठाकारी जितनी ही आसान चीज है। और खुशी की बात है कि यह फुल्ली फोकट में संभव है बोले तो अंटी से एक भी पैसा खर्चे बिना हर कोई पॉडकास्टर बनने का मजा ले सकता है।
पॉडकास्टिंग सीरीज जारी रहेगी अगली क्लासों में भी, लेकिन घबराइएगा नहीं थ्योरी की क्लास सिर्फ आज थी अगली सब क्लासें प्रैक्टिकल की लगेंगी।
नोट: इस लेख में कुछ तकनीकी गलतियाँ हो सकती हैं यदि आपको कोई दिखे तो कृपया बताएं






10 टिप्पणियाँ:
विडियो ऑन डिमांड से मतलब आप विडियो के किसी बड़े भंडार से जुड़े हैं जहां पर जाकर आप देख सकते हैं कि ये ये फिल्में, गाने इत्यादि संचित हैं। यानि की भंडार के पास उपलब्ध सामग्री का कैटालोग। आप उस में से चुनकर अपनी मनपंसद की सामग्री किसी भी समय देख सकते हैं। ऐसा ही एक जुगाड़ है bwcinema.com हम लोगों ने इसकी मेम्बरशिप ले रखी है करीब 10 डालर प्रतिमाह। इस सजाल पर सभी नई फिल्में काफी जल्दी आ जाती हैं। कभी भी मन करता है तो इंटरनेट से स्ट्रीम करके फिल्म देख ली जाती है। क्वालिटी गानों के अलावा काफी अच्छी है।
सुन्दर सार्थक लेख.
जहाँ तक चिट्ठों का सवाल है हिन्दी में पॉडकास्ट का अधिक चलन न होने से ऐसा कोई चिट्ठा नहीं है जो पूरी तरह पॉडकास्ट के लिए समर्पित हो।
ई तो गलत बात कै दी भईये!! हमार पॉडकास्ट बिलाग magic-I भूले गए का? ऊ पर तो हम सिरफ़ ऑडियो और वीडियो सुनाया दिखाया हूँ!! फिर कईसन कहे रहे कि बिलाग नई है!! ठीक है कि हम ऊ का ज्यादा नहीं चलाए हैं लेकिन है तो सही, खूँटा गाड़े के है जी!!!
शुक्रिया पंडित जी इस जानकारीपूर्ण लेख के लिए
अच्छी जानकारी है.
आप की बात सुनकर तो लगा कि नियमित पॉडकास्टिंग शुरु की जाय ...पर पॉडकास्टिंग करना आसान नहीं है ..मैं दो पॉडकास्ट कर देख चुका हूँ .. 5 मिनट की पॉडकास्ट को रिकॉर्ड , मिक्स , अपलोड करने में 3 घंटे लग गये थे ..और अभी भी बहुत लोग पॉडकास्ट को उतना नहीं सुनते (मेरे को कम टिप्पणीयां मिली) तो सोचा की इस समय का उपयोग चिट्ठा लिखने में करूं .
सत्य वचन काकेश जी,
पॉडकास्ट करना बहुत मेहनत और समय खर्चाऊ कार्य है. :) यकीन ना हो तो खुशी से पूछ लो.
श्रीश मास्टरजी, इतनी मेहनत से जानकारी जुटाकर हमारे साथ बाँटने के लिए आपको शत शत धन्यवाद :)
श्रीश जी, पाडकास्टिंग व सम्बन्धित तकनीकी विषयों पर एक सार्थक लेख।
धन्यवाद जानकारी देने के लिये ।
@मिर्ची सेठ,
इसका मतलब है कि जरुरी नहीं कि वीडियो ऑन डिमांड के लिए अलग हार्डवेयर चाहिए ही हो। नैट पर भी ऐसी सेवाएं उपलब्ध हैं। और यदि देखा जाए तो इसकी सेवा देखते हुए १० डॉलर प्रतिमाह महँगा भी नहीं। हाँ पर इसके लिए तेज इंटरनैट कनेक्शन चाहिए
@संजय बेंगाणी,
धन्यवाद!
@अमित,
भारी मिस्टेक हो गया भईया, अभी सुधार देते हैं खूँटा गाड़ के।
संजीत त्रिपाठी,
धन्यवाद संजीत जी!
काकेश,
मेरे ख्याल से तो यह बहुत आसान काम है। शायद आप इसके लिए सरल तौर तरीकों की बजाय जटिल तरीके इस्तेमाल कर रहे होंगे। हाँ फाइल अपलोड करने में वक्त लगता होगा, मैंने अभी तक टैस्टिंग हेतु केवल कुछ छोटी साइज की ही फाइल अपलोड की हैं अतः इस बारे ठीक से कह नहीं सकता। लेकिन इसका इलाज है कि आप FTP द्वारा अपलोड करें, इस बारे अगले लेखों में लिखूँगा।
पंकज बेंगाणी,
हाँ आपकी बात सच है लेकिन ऐसा तब है जब हमें प्रोफेशनल क्वालिटी का पॉडकास्ट बनाना हो जैसा कि खुशी तरकश के लिए तैयार करती हैं। लेकिन अगर हमें सामान्य सा तैयार करना हो तो यह बिल्कुल आसान काम है।
@राजीव,
आपको लेख पसंद आया, धन्यवाद!
@विवेक रस्तोगी,
आपका भी धन्यवाद विवेक जी, आगे भी पढ़ने आते रहिएगा।
श्रीश जी अब तक तो समझ ही गये होंगे कि पॉडकास्टिंग उतना भी सरल नहीं जितना आप समझ रहे थे.
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