Wednesday 22 August 2007

यट्यूब से वीडियो डाउनलोड करने का सरलतम तरीका

Easiest method to download YouTube videos without using any software

यट्यूब सबसे लोकप्रिय वीडियो शेयरिंग साइट है जिस पर हजारों की सँख्या में एक से बढ़कर एक वीडियो विद्यमान हैं। यदि आपके पास काफी अधिक गति का ब्रॉडबैंड कनैक्शन न हो तो ये वीडियो ऑनलाइन रुक-रुक कर चलते हैं। इसलिए इन्हें डाउनलोड करके देखना बेहतर तरीका है। अब इस काम के लिए ढेरों औजार मौजूद हैं। बहुत से तरीके प्रयोग करने के बाद मुझे एक सरलतम तरीका मिला - Kiss YouTube.

इसकी खासियत है कि आपको कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने की जरुरत नहीं। आपको सिर्फ यह करना है कि यट्यूब वीडियो पेज पर ब्राउजर के एड्रैस बार में जाकर URL के आगे kiss जोड़ देना है।

उदाहरण के लिए आपको यह वीडियो डाउनलोड करना है:

http://www.youtube.com/watch?v=uSyGjun_tgc

इसके आगे kiss जोड़ कर डाउनलोड लिंक बनेगा: 

http://www.kissyoutube.com/watch?v=uSyGjun_tgc

बस अब एंटर दबाएँ,  Kiss YouTube साइट का पेज खुलेगा जहाँ नीचे डाउनलोड लिंक दिया होगा - Download Now, इसे क्लिक करने से डाउनलोड शुरु हो जाएगा।

फाइल सेव करते हुए इसके नाम के साथ .flv एक्सटेंशन जोड़ दें।

बस अब मजे से किसी भी flv प्लेयर में वीडियो का आनंद लें।

यदि अब भी तरीका समझ नहीं आया तो निम्न वीडियो टटोरियल देखें।

Sunday 19 August 2007

हिन्दी कम्प्यूटिंग - कब और कैसे होंगे सपने साकार

भाई संजीव तिवारी ने अपने चिट्ठे पर हिन्दी कम्प्यूटिंग के संदर्भ में कुछ सवाल उठाए हैं। वे जानना चाहते हैं कि कम्प्यूटर पर हर कार्य हिन्दी भाषा में क्यों नहीं हो सकता, साथ ही वे जानना चाहते हैं आखिर कब तक हिन्दी में प्रोग्रामिंग भाषा अस्तित्व में आएगी।

इन वालों का जवाब बेहतर तरीके से हरिराम जी दे सकते हैं क्योंकि हिन्दी में प्रोग्रामिंग भाषा का विकास उनका भी स्वप्न है, इन कार्यों संबंधी जटिलताओं के बारे में वे अपने कई लेखों में बता भी चुके हैं। मैथिली जी ने भी कुछ समय पहले इस बारे में सुझाव मांगे थे, अतः इस लेख में मैं हिन्दी कम्प्यूटिंग की दशा-दिशा पर अपना नजरिया तथा कुछ सुझाव पेश कर रहा हूँ। चिट्ठाकारी संबंधी एक्सक्लूसिव सुझावों पर लेख अलग से लिखूँगा।

हिन्दी/इण्डिक कम्प्यूटिंग सही कहें तो अभी आधे रास्ते भी नहीं पहुँची। अभी तो सिर्फ इसमें पढ़ना-टाइप करना सरल हुआ है। उसके लिए भी बंदे को सौ पापड़ बेलने पड़ते हैं। कम्प्यूटर और इंटरनैट पर काम करते हुए हमारा सामना अक्सर फिर ???? से हो जाता है, अयूनिकोडित प्रोग्राम और सेवाएँ अब भी एक समस्या हैं।

हम हिन्दी के चिट्ठाकार मिलाकर कोई 500 आदमी नैट पर हिन्दीजगत में सक्रिय हैं, यह आँकड़ा बहुत निराशाजनक है। एक आदमी कुछ लिखता है, एग्रीगेटरों के सहारे कुछ पाठक आते हैं, दो-चार दिन तक जितना पढ़ लिया किसी ने ठीक है वरना कम ही पढ़ा जाता है। चिट्ठाकार बैठा टिप्पणियों और स्टैटकाऊंटर को ताकता रहता है। अंग्रेजी के एक सामान्य ब्लॉगर को भी इसकी बजाय काफी पाठक मिल जाते हैं।

वर्तमान हालात में इस दिशा में प्रगति संतोषजनक तो है लेकिन अभी भी दिल्ली दूर है, यहाँ मेरा आशय उस दिन से है जब हिन्दी भी नैट पर चीनी-जापानी, रुसी भाषाओँ के समान अपना रुतबा हासिल कर सकेगी।

मैं अब इस विषय में अधिक विस्तार न देकर व्यावहारिक मुद्दों पर आना चाहूँगा।

ऑपरेटिंग सिस्टमों में हिन्दी-इण्डिक सपोर्ट

सबसे पहली बात तो ये कि इण्डिक सपोर्ट ऑपरेटिंग सिस्टम में इनबिल्ट होना चाहिए। इसके लिए कंट्रोल पैनल में सैटिंग का टंटा खत्म होना चाहिए। विण्डोज विस्टा में ये हो चुका है, इण्डिक सपोर्ट बाई डिफॉल्ट मौजूद है। लिनक्स, मैकिनटोश में इंस्टालेशन के वक्त ही इसका विकल्प मिलता है। अतः इस बारे में निश्चिंत रह सकते हैं कि नए OS इण्डिक सपोर्ट रेडी हैं। अगले कुछ सालों बाद जब ये नए OS प्रचलन में आ जाएँगे तो ये समस्या तो खत्म हो जाएगी।

फिलहाल विण्डोज 2000 तथा XP  के लिए इसका हल है हिमांशु सिंह का इण्डिक आईएमई इंस्टालर जो कि बिना विंडोज की सीडी के ही इण्डिक सपोर्ट आसानी से इंस्टाल कर देता है।

विण्डोज में हिन्दी IME इनबिल्ट हो

विण्डोज विस्टा में इण्डिक सपोर्ट तो आ गया लेकिन एक महत्वपूर्ण कमी रह गई - विण्डोज इंस्टाल करने पर हिन्दी लिखने के लिए Hindi IME रेडीमेड मिलना चाहिए, कम से कम इतना हो कि इसे कंट्रोल पैनल में बस एक क्लिक द्वारा सक्षम किया जा सके। अगर ऐसा हो तो कभी न कभी लोगों की इस पर नजर पड़ेगी जरुर और वे जिज्ञासावश हिन्दी का प्रयोग आरंभ कर देंगे।

अभी विण्डोज में सिर्फ इनस्क्रिप्ट IME इनबिल्ट है, फोनेटिक तथा रेमिंगटन नहीं, उसे भी सक्षम करने के लिए बहुत झंझट है। यद्यपि इनस्क्रिप्ट बेहतरीन टाइपिंग प्रणाली है लेकिन नया बंदा इसके लिए मानसिक रुप से तैयार नहीं होता। अभी किसी नए बंदे को हिन्दी टाइपिंग के लिए Baraha, Indic IME आदि टूल डाउनलोड करने पढ़ते हैं, अगर ये इनबिल्ट होते तो बहुत लोग हिन्दी का प्रयोग करते।  माइक्रोसॉफ्ट को अपने Indic IME जिसमें कि सभी तरह के कीबोर्ड शामिल हैं और केवल एकाध MB साइज का है, विंडोज में शामिल करना चाहिए ताकि किसी को भी हिन्दी टाइप के लिए अलग से टूल्स को डाउनलोड न करना पड़े।

हिमांशु भाई और मेरा दृढ़ विश्वास है कि यह हिन्दी कम्प्यूटिंग की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम होगा, इस विषय पर अलग से एक पोस्ट लिखूँगा।

पुराने ऑपरेटिंग सिस्टमों में यूनिकोड समर्थन

विण्डोज 98 तथा ME आदि पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम अब भी भारत में जडें जमाए बैठे हैं, खासकर साइबर कैफे में इनकी पैनीट्रेशन बहुत है जिसका उपयोग भारत का मध्यवर्ग आज भी इंटरनैट एक्सैस के लिए मुख्य रुप से करता है। इन OS में यूनिकोड का समर्थन सीमित है। विभिन्न औजारों की मदद से काट-चिपका कर इंटरनैट पर हिन्दी में काम तो किया जा सकता है पर मजा नहीं आता। ये भी हिन्दी के मार्ग में एक बहुत बड़ी बाधा है क्योंकि इन OS  के लिए प्रचलित IME जैसे Baraha, Indic IME आदि जैसे कीबोर्ड ड्राइवर नहीं बनाए जा सकते। पिछले दिनों हरिराम जी के साथ हुई चर्चा में मैंने निष्कर्ष निकाला कि फिलहाल इनका उपाय ब्राउजरों के लिए IME प्लगइन ही हैं।

इस काम के लिए आजकल हिमांशु भाई को पटा रहा हूँ कि वे हिन्दी-तूलिका टूल को ब्राउजर प्लगइन का रुप दें ताकि सभी OS में सीधे हिन्दी टाइप की जा सके।

अच्छी बात ये है कि जो नए कम्प्यूटर लिए जा रहे हैं वे नए OS युक्त हैं, अतः धीरे-धीरे पुराने OS प्रचलन से बाहर होने पर ये समस्या भी सुलझ जाएगी।

अयूनिकोडित प्रोग्रामों में हिन्दी टाइपिंग

अभी भी बहुत से प्रोग्रामों में यूनिकोड हिन्दी का समर्थन नहीं है, खासकर ग्राफिक्स और डीटीपी अनुप्रयोंगों में, इनमें केवल 8 बिट ट्रू टाइप फॉन्टों जैसे कि कृतिदेव आदि के द्वारा केवल रेमिंगटन टाइपिंग के जानकार ही टाइप पर सकते हैं। वैसे तो यह काफी गम्भीर मामला है लेकिन तात्कालिक समस्या ये है कि फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट के प्रयोगकर्ता इन प्रोग्रामों में हिन्दी में काम नहीं कर पाते।

इसका तात्कालिक उपाय है कि इन प्रोग्रामों के लिए नॉन-यूनिकोड IME/कीबोर्ड ड्राइवर बनाए जाएँ। इसके लिए कैफेहिन्दी वाले मैथिली जी को पटा रहा हूँ, हाल ही में उनके सर्वर में आई खराबी के चलते वे व्यस्त हैं जिस कारण इस दिशा में प्रगति नहीं हो पा रही।

गूगल सर्च तथा जीमेल में हिन्दी टाइपिंग टूल

गूगल सर्च इंटरनैट पर किसी भी सामग्री को खोजने हेतु सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है। यह साइटों एवं ब्लॉगों पर ट्रैफिक का एक प्रमुख स्रोत है। लेकिन आम इंटरनैट प्रयोक्ता को हिन्दी में टाइप करने का तरीका पता होता नहीं जिस कारण वह हिन्दी में खोज नहीं सकता। यदि गूगल अपना इण्डिक ट्रांसलिट्रेशन टूल गूगल भारत पेज पर लगा दे तो इससे नए लोग भी हिन्दी ब्लॉगों तथा हिन्दी साइटों पर पहुँचेंगे और हिन्दी जगत से परिचित होंगे।

इस बारे मैंने कुछ समय पहले एक विचार अप्रैल फूल के रुप में प्रस्तुत किया था।

अक्सर बहुत से हिन्दी ब्लॉगरों की कहानी यही होती है कि तुक्के से (Accidentally) किसी हिन्दी ब्लॉग पर पहुँचे। पहले तो उसे भयंकर हैरानी होती है कि हिन्दी में भी ब्लॉग या साइटें होती हैं फिर वह एक ब्लॉग से दूसरे ब्लॉग पढ़ता जाता है। कुछ दिन बाद उसे खुद भी ब्लॉगियाने की खुजली होने लगती है और जहाँ चार पोस्टें लिखी फिर ये बीमारी उसे छोड़ती नहीं।
ये तो सभी जानते हैं कि इंग्लिश ब्लॉगों पर आने वाले ट्रैफिक का बहुत सा हिस्सा गूगल सर्च से आता है। अब दिक्कत ये है कि आम जनता को ये मालूम ही नहीं है कि हिन्दी में भी टाइप होती है जिससे कि वह गूगल में खोज सके। दूसरी बात कि अगर वो कभी सुनता भी है तो तो सोचता है कि हिन्दी टाइप तो सीखनी वगैरा पड़ती होगी इसलिए अपने बस की नहीं। लेकिन इस टूल के आने से वो खुद टाइप करके सर्च कर सकेगा और नतीजतन हिन्दी जगत से परिचित होगा।

दूसरी बात है जीमेल में उपरोक्त हिन्दी टूल लगाना, इससे जनता को जो हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉगिंग से अनभिज्ञ है पता चलेगा कि हिन्दी में भी मेल भेजी जा सकती है। यह भी हिन्दी के प्रसार में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

गूगलबाबा के लिए ये काम मुश्किल नहीं सब सामान उसके पास तैयार पड़ा है। हाल ही में गूगल बाबा द्वारा शुरु की गई इण्डिया लैब से इस बारे में आस बंधी है, एक ऑनस्क्रीन टाइपिंग गैजेट iGoogle पेज के लिए उपलब्ध करवाया भी गया है।

हिन्दी टंकण के लिए उपयुक्त पद्धति का विकास

एक नए प्रयोक्ता की आज भी पहली समस्या हिन्दी टाइप करना ही है। हिन्दी टंकण के लिए वैसे तो ढेरों विधियाँ हैं, लेकिन प्रचलित केवल तीन ही हैं - फोनेटिक, इनस्क्रिप्ट एवं रेमिंगटन। इनमें से रेमिंगटन तो अब आउटडेटिड हो चुकी है तथा केवल पुराने टाइपिस्टों द्वारा ही प्रयोग की जा रही है। बैकवर्ड कंपैटिबिलटी के लिए इसे यूनिकोड औजारों में अक्सर शामिल कर लिया जाता है। असल मुकाबला फोनेटिक और इनस्क्रिप्ट के बीच है। मैंने दोनों को लंबे समय तक प्रयोग किया है और पाया कि टच टाइपिंग के लिहाज से इनस्क्रिप्ट बेहतर है लेकिन फोनेटिक सरलता के मामले में बाजी मार ले जाती है। चूंकि इसके लिए कोई लर्निंग कर्व नहीं है इसलिए नए लोग इसे आसानी से अपना लेते हैं जबकि इनस्क्रिप्ट के लिए वो मानसिक रुप से तैयार नहीं होते। ये बात अलग है कि बाद में धीरे-धीरे फोनेटिक की कमियाँ उनके सामने आने लगती हैं। सत्य बात यह है कि अगर कोई इनस्क्रिप्ट सीखने के लिए मानसिक रुप से तैयार हो जाए तो यह बहुत आसान है, बस थोडे़ उचित मार्गदर्शन की जरुरत है।

अब कई इनस्क्रिप्ट प्रेमी जैसे बालेन्दु जी, सृजनशिल्पी जी आदि फोनेटिक को परे करके केवल इनस्क्रिप्ट को चलाए जाने के पक्षधर हैं पर मैं उनसे सहमत नहीं। फोनेटिक नए लोगों को आकर्षित करती है, उन्हें हिन्दी से जोड़ती है। एक बार बंदा हिन्दी में लिखना शुरु कर दे, बाद में वो चाहेगा तो इनस्क्रिप्ट अपना लेगा। मैंने यही किया फोनेटिक से शुरुआत करके इनस्क्रिप्ट पर आया, यदि शुरु में ही मुझे इनस्क्रिप्ट थमा दिया जाता तो शायद मैं आज हिन्दी में न लिखता होता।

मेरा विचार है कि फोनेटिक (ट्रांसलिट्रेशन) का मानकीकरण किया जाना चाहिए तथा सभी औजारों में मानकीकृत स्कीम ही प्रयुक्त हो। यद्यपि इस तरह की एक परियोजना भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही है परंतु वह ट्रांसलिट्रेशन केवल लिपि बदलने के लिए ही सही है, टाइपिंग के लिए नहीं।

इनस्क्रिप्ट एक बेहतरीन प्रणाली है लेकिन इसमें भी कुछ कमियाँ हैं, इसे संशोधित किया जाना चाहिए, फिलहाल मानक बनाए जाने योग्य एकमात्र पद्धति यही है।

वैसे कभी-कभी मुझे लगता है कि फोनेटिक और इनस्क्रिप्ट प्रणालियों की विशेषताओं का अध्ययन कर एक बेहतर प्रणाली बनाई जा सकती है। हरिराम जी कुछ इसी तरह के प्रयास में जुटे हैं, वे WX आधारित ट्रांसलिट्रेशन स्कीम पर काम कर रहे हैं।

वैसे उनका विचार है कि भारतीय भाषाओं के ध्वन्यात्मक गुण के कारण इनमें टाइपिंग के लिए स्पीच टू टैक्स्ट प्रणाली अधिक कारगर है। हाल ही में सी-डैक, आईबीएम और भारत सरकार के राजभाषा विभाग द्वारा संयुक्त रुप से विकसित श्रुतलेखन नामक हिन्दी स्पीच रिकॉग्नीशन सॉफ्टवेयर जारी किया गया है। इसकी कीमत लगभग 5000 रुपए है, यदि यह कारगर हुआ तो यह कीमत कुछ ज्यादा नहीं। अभी तो पता नहीं कि यह कितना कारगर है, सृजनशिल्पी जी इस बारे कृपया जानकारी दें।

सॉफ्टवेयरों का हिन्दीकरण

यह संतोषजनक बात है कि यह कार्य हमारे वश का है। हिन्दी चिट्ठाजगत में बहुत से तकनीकी अनुवादक जैसे आलोक कुमार, रविरतलामी, पंकज नरुला, देबाशीष चक्रबर्ती, जीतेंद्र चौधरी आदि शामिल हैं। हिन्दीकरण के लिए अक्षरग्राम पर निपुण नामक प्रोजैक्ट आरंभ किया गया है जिस पर सभी अनुवादक सामूहिक रुप से योगदान दे सकें।

हिन्दी कम्प्यूटिंग तंत्रों के विकास के लिए एक साझा मंच

यह बात मेरे दिमाग में काफी पहले से है कि हिन्दीजगत के प्रोग्रामर, डैवलपर तथा अन्य टैक्नोक्रैट एक साझा मंच पर हिन्दी कम्प्यूटिंग संबंधी तंत्रो का विकास करें। अभी जिन तंत्रों का उपयोग करते हैं उनमें से अधिकतर बाहरी लोगों द्वारा बनाए गए हैं जिन तक कि हम अपनी राय नहीं पहुँचा सकते। तो बजाय कि उनकी दया पर निर्भर रहने के सभी एक-दूसरे के ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाएँ और सामूहिक रुप से हिन्दी संबंधी टूल्स का विकास हो।

कुछ ऐसा ही विचार हिमांशु ने भी जाहिर किया, उन्होने ने इसके लिए सोर्सफोर्ज.नैट जैसा एक मंच बनाने का सुझाव दिया।

इसके अतिरिक्त मेरा हरिराम जी, सृजनशिल्पी जी तथा रविरतलामी जी आदि से अनुरोध है कि अपने इण्डिक कम्प्यूटिंग विशेषज्ञ परिचितों को हिन्दी चिट्ठाजगत में लाएँ, क्योंकि इससे जुड़कर ही कोई हिन्दी कम्प्यूटिंग की समस्याओं और आवश्यकताओं को समझ सकता है।

देवनागरी यूनिकोड मानकीकरण संबंधी कोर स्तर की समस्याएँ

देवनागरी तथा अन्य भाषाओं का यूनिकोड मानकीकरण सही तरीके से नहीं हुआ जिससे कि इनमें कम्प्यूटिंग एक जटिल प्रक्रिया बन गया। इस विषय में हरिराम जी ने इस लेख में जानकारी दी है तथा इसके हल हेतु कुछ सुझाव भी बताए हैं। वे इस मामले पर सरकारी संस्थानों का ध्यान आकर्षित करते रहते हैं। इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए तथा कोई सर्वमान्य हल तलाश किया जाना चाहिए।

कम्प्यूटर पाठ्यक्रमों में हिन्दी/इण्डिक कम्प्यूटिंग

खेद है कि सूचना प्रोद्यौगिकी में अग्रणी भारत भर में किसी भी कम्प्यूटर पाठ्यक्रम में इण्डिक कम्प्यूटिंग विषय शामिल नहीं है (कुछ अतिविशिष्ट कोर्सों को छोड़कर). हालत यह है कि अच्छे-अच्छे आईटी प्रोफैशनलों को यूनिकोड क्या बला है मालूम तक नहीं। ऐसे लोग भारतीय भाषाओं के लिए क्या योगदान दे पाएँगे।

हर विश्वविद्यालयी कम्प्यूटर पाठ्यक्रम में इण्डिक कम्प्यूटिंग विषय शामिल होना चाहिए जिसमें यूनिकोड, इनस्क्रिप्ट तथा अन्य टाइपिंग प्रणालियाँ, देवनागरी लिपि का परिचय, हिन्दी कम्प्यूटिंग के मौजूदा साधन तथा बहुभाषी सॉफ्टवेयरों (Multilingual Softwares) का विकास, प्राकृतिक भाषा संसाधन (Natural Language Processing) आदि जानकारी शामिल हो।

यूनिकोड हिन्दी के बारे में जागरुकता फैलाना

यह एक ऐसा कार्य है जिसे हर चिट्ठाकार कर सकता है। बहुसँख्य कम्प्यूटर और इंटरनैट प्रयोक्ता यूनिकोड हिन्दी और ऑनलाइन हिन्दीजगत से अनजान हैं। इसके लिए कई तरीके हैं:

  • सर्वज्ञ विकी को समृद्ध बनाकर, अपने चिट्ठे पर इस बारे में लिखकर
  • परिचर्चा, चिट्ठाकार समूह आदि हिन्दी मंचों पर साथियों की सहायता करके
  • इंटरनैट पर अधिकतम हिन्दी का प्रयोग करके खासकर हिन्दीजगत से बाहर के मित्रों-परिचितों के साथ चैट, ईमेल, ऑर्कुट आदि तमाम साधनों पर हिन्दी का प्रयोग कर
  • अपने कम्प्यूटर, इंटरनैट प्रयोग करने वाले मित्रों को हिन्दी टाइपिंग, हिन्दी ब्लॉगिंग आदि से जोड़कर

इस बारे में अनुनाद जी ने कुछ बहुत अच्छे सुझाव दिए थे, अवश्य देखें।

मैंने अपने अनुभव से पाया है कि बजाय आप किसी को ये समझाने में समय व्यर्थ करने के कि हिन्दी में काम करना सरल है उसके पीसी पर हिन्दी चलाकर दिखा दीजिए और खुद उससे टाइप करवाइए, उसकी झिझक और संदेह जाता रहेगा। मैंने इस फॉर्मूले का उपयोग कई बार किया है, इस बारे अलग से एक लेख लिखूँगा।

उपरोक्त में से अधिकतर विषयों पर अलग से लेख लिखूँगा, (यानि और पकाऊंगा, सस्ते में नहीं छोड़ने वाला) smile_wink

कृपया सभी पाठक उपरोक्त मुद्दों पर अपनी राय अवश्य दें।

Thursday 16 August 2007

गूगल बाबा लाए इण्डिया लैब, ट्रांसलिट्रेशन टूल तथा ऑन-स्क्रीन कीबोर्ड


गूगल बाबा ने स्वतंत्रता दिवस पर भारतवासियों के लिए एक तोहफे की घोषणा की है। पूरी दुनिया में लोग-बाग अनुमान लगा रहे हैं कि यह क्या होगा। वैसे इस बारे जानकारी लीक हो भी चुकी है।

यह तोहफा है - गूगल बाबा की इण्डिया लैब, जिसमें वह भारत तथा भारतीय भाषाओं संबंधी तंत्रों पर कार्य करेंगे।

इसकी शुरुआत भी कर दी गई है। दो औजारों पर काम आरंभ हो चुका है:

गूगल इण्डिक ट्रांसलिट्रेशन

गूगल ने अपनी ब्लॉगर सेवा के हिन्दी ट्रांसलिट्रेशन टूल को अलग से ऑनलाइन टाइपिंग टूल के तौर पर उपलब्ध कराया है। यह पहले से उपलब्ध ढेरों टूल्स से इस मामले में भिन्न है कि यह मशीन लर्निंग तकनालॉजी युक्त है, टाइपकर्ता के हिसाब से अपनी लिप्यांतरण स्कीम निर्धारित करता है, अर्थात रोमनागरी के अभ्यस्तों के लिए सबसे उपयुक्त। इसमें अपेक्षाकृत कम कुँजियाँ दबानी पड़ती हैं।

गूगल ऑनस्क्रीन कीबोर्ड

यह एक गूगल गैजैट है जिससे आप सर्च बॉक्स में ऑनस्क्रीन कीबोर्ड द्वारा टाइप कर सकते हैं। इसे आप अपने iGoogle पेज अथवा गूगल सर्च पेज पर लगा सकते हैं। यह हिन्दी के अतिरिक्त अन्य कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।

इसे जोड़ने के लिए यहाँ जाएँ।

Add to Google बटन पर क्लिक करें जिससे निम्न पेज प्रकट होगा।



See this gadget when you visit Google.com नामक चैकबॉक्स को सक्षम करें तथा Add to Google बटन दबाएँ।

यह iGoogle पेज पर जुड़ जाएगा, सर्च पेज पर अभी यह दिखाई नहीं दे रहा, शायद ऐसा इसलिए है कि अभी यह विकास के चरण में है।

यद्यपि यह एक अच्छा कदम है पर ऑनस्क्रीन कीबोर्ड की बजाय ट्रांसलिट्रेशन टूल जोड़ा जाना अधिक बेहतर होता। साथ ही या तो यह टूल गूगल के भारतीय होमपेज पर डिफॉल्ट रुप से हो या इसे जोड़ने का विकल्प Preferences में हो बजाए कि गैजेट के रुप में जोड़ने के। खैर अभी तो लैब शुरु ही हुई है, उम्मीद है आगे इस तरह की सुविधा मिलेगी।

इस बारे में मैंने पिछले अप्रैल फूल के मौके पर एक विजन प्रस्तुत किया था।



लगता है वह सच होने वाला है। अगर ऐसा हो गया तो हिन्दीजगत धड़ाधड़ फैलता जाएगा।

गूगलदेव भारतीय भाषाओं के प्रति हमेशा से उदार रहे हैं। ब्लॉगर, जीमेल तथा अन्य सभी गूगल सेवाएँ भारतीय भाषाओं के लिए पूर्णतया अनुकूल हैं, साथ ही समय-समय पर एतद संबंधी कई अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती रही हैं। फिर अब तो गूगल बाबा ने इस काम के लिए अलग से लैब खोल दी है तो उम्मीद की जाती है कि हिन्दीप्रेमियों को बहुत कुछ हासिल होगा।

कुल मिलाकर अपनी तो मौज है, जय गूगल बाबा की! :)

via मजेदार समाचार

स्क्रीनशॉट्स - गूगल.कॉम से साभार

Wednesday 15 August 2007

स्वंत्रतता दिवस की शुभकामनाएँ, कुछ वीडियो

सभी मित्रों और देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।


उन सब शहीदों को बारंबार नमन जिनके बलिदान से यह दिन देखना नसीब हुआ।

1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम



आजादी के शहीदों को नमन



स्वतंत्रता संघर्ष पर एक नजर

भाग 1



भाग 2



सता हस्तांतरण




आजादी की नई सुबह (Embedding Disabled)

जय हिन्द - वंदे मातरम्

Monday 13 August 2007

हैक - बरहा, कैफे हिन्दी आदि द्वारा एम एस‌ वर्ड में हिन्दी टाइप करना

Hack -Typing Hindi in MS Word using Baraha, BarahaIME, Cafe Hindi Tool etc

बरहा डायरैक्ट/आईएमई तथा कुछ अन्य हिन्दी टाइपिंग टूल यथा कैफे हिन्दी आदि प्रयोग करने वालों की एक पुरानी स‌मस्या रही है कि ये औजार MS Word में नहीं चलते। इस वजह स‌े उन्हें WordPad स‌े काम चलाना पड़ता है जो कि MS Word जितना स‌शक्त वर्ड प्रोसैसर नहीं।

परिचर्चा फोरम में भी इस बात पर चर्चा चली थी कि फिलहाल केवल Indic IME ही वर्ड में हिन्दी टाइप करने में स‌क्षम है। इस चर्चा में ये निष्कर्ष निकला कि बरहा MS Word में भाषा स्विच नहीं कर पाता जिस‌ कारण कि देवनागरी अक्षरों की जगह ???? अथवा डिब्बे प्रकट होते हैं।



मैंने इस बात पर काफी विचार किया कि यदि किसी तरीके स‌े भाषा स्विच करा दी जाए तो बरहा आदि द्वारा‌ भी वर्ड में हिन्दी टाइप की जा स‌कती है। कुछ प्रयोगों के बाद इसका तरीका मुझे मिल ही गया।

कंट्रोल पैनल में कीबोर्ड जोड़ना

इसके लिए हमें कंट्रोल पैनल में एक हिन्दी कीबोर्ड जोड़ना होगा जो कि भाषा स्विच करने में प्रयोग होगा।

Start > Settings > Control Panel > Regional and Language  Options में जाएँ तथा Languages टैब पर क्लिक करें, इससे निम्न विंडो खुलेगी।



(यहाँ मैं मानकर चल रहा हूँ कि आपने इण्डिक स‌पोर्ट इंस्टाल किया हुआ है। यदि नहीं तो उपरोक्त लाल रंग में चिन्हित चैकबॉक्स को चैक कर इंस्टाल कर लें, इस‌ हेतु आपके पास विंडोज की स‌ीडी होनी चाहिए)

अब चिन्हित किए गए Details बटन पर क्लिक करें जिससे निम्न विंडो खुलेगी।


यहाँ Add बटन पर क्लिक करें, इस‌से निम्न बॉक्स खुलेगा।


यहाँ पर Input Language में हिन्दी तथा Keyboard Layout/IME में US (जी हाँ US) चुनें तथा OK पर क्लिक करें। यह कीबोर्डों की लिस्ट में जुड़ जाएगा।


यदि आपने Indic IME अथवा कोई अन्य कीबोर्ड पहले स‌े जोड़ रखा है तो Key Settings में जाकर हाल ही में जोड़े इस कीबोर्ड के लिए Hot Key जोड़ें।



यदि English के अलावा यही केवल एकमात्र कीबोर्ड है तो ऎसा करने की आवश्यक्ता नहीं, डिफॉल्ट Alt+Shift स‌े ही बात बन जाएगी।

अब Apply तथा OK पर क्लिक कर विंडो को बंद कर दें।

MS Word में हिन्दी टाइप करना

अब वर्ड स्टार्ट करें तथा Alt+Shift दबाएँ।

(यदि आपने कंट्रोल पैनल में कोई अन्य कीबोर्ड जैसे कि Indic IME अथवा डिफॉल्ड इनस्क्रिप्ट आदि भी जोड़ रखा है तो ऊपर स‌ैट की गई Hot Key, Control+Shift+0 आदि का प्रयोग करें)

इससे वर्ड में Status में भाषा शिफ्ट होकर Hindi आ जाएगी।

बस अब मजे स‌े वर्ड में हिन्दी टाइप कीजिए।



जब भी भाषा स्विच करनी हो, Alt+Shift अथवा प्रयुक्त हॉट की दबाइए। कभी-कभी वर्ड खुद भी भाषा AutoSwitch कर लेता है, इससे बचने के लिए Tools > Options में Edit टैब में जाकर Auto-keyboard switching को अनचैक कर दें।

मैंने यह ट्रिक याहू मैस‌ेंजर (संदर्भ: परिचर्चा) के स‌ाथ भी प्रयोग करके देखी, लेकिन वहाँ ये काम नहीं करती।

हाल ही में स‌ुरेश चिपलूनकर जी स‌े मालूम पड़ा कि अक्षरमाला का IME वर्ड में काम करता है, अतः उसे भी आजमाया जा स‌कता है। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट फोनेटिक इनपुट टूल भी चलता है लेकिन वो अभी बीटा वर्जन में है और जल्द एक्सपायर हो जाता है।

P.S: हरिराम जी ने इनपुट भाषा बदलने के लिए ALT+SHIFT की बजाय CTRL+SHIFT का प्रयोग करने की बहुत ही अच्छी और उपयोगी टिप दी है। लेख यहाँ पढें - भाषा कुञ्जीपटल बदलने हेतु बेहतर कुञ्जी

Monday 6 August 2007

वर्डप्रैस‌.कॉम चिट्ठे पर वीडियो कैसे लगाएँ

Vodcasting in WordPress.com - Embedding YouTube, Google Video in WordPress.Com Blog

आज मैं बताने जा रहा हूँ कि वर्डप्रैस‌.कॉम चिट्ठे पर वीडियो कैसे लगाया जाए। अक्सर कई स‌ाथी पूछते हैं कि अपने वर्डप्रैस‌.कॉम ब्लॉग पर वीडियो लगाने की कोशिश की लेकिन स‌फल नहीं हुए। इसका कारण यह है कि वर्डप्रैस‌ तथा वर्डप्रैस‌.कॉम दो अलग-अलग चीजें हैं। इनमें अन्तर जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

वर्डप्रैस‌.कॉम पर वॉडकास्टिंग हेतु स‌ीमित स‌ुविधाएँ हैं। इसमें HTML का Embed टैग वर्जित है जिस कारण आप विभिन्न वीडियो शेयरिंग स‌ाइटों द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले कोड का प्रयोग कर मनचाहे वीडियो नहीं लगा स‌कते। वर्डप्रैस‌.कॉम आपको चुनिंदा स‌ाइटों स‌े ही वीडियो लगाने की स‌ुविधा देता है। इनमें YouTube, Google Video, DailyMotion, Grouper तथा SplashCast शामिल हैं। इनके लिए वर्डप्रैस‌.कॉम ने कुछ शॉर्टकोड निर्धारित किए हैं। मैं इनमें स‌े केवल YouTube औऱ Google Video की जानकारी दे रहा हूँ क्योंकि अधिकतर चिट्ठाकार इन्हीं का प्रयोग करते हैं।

YouTube

यट्यूब वीडियो को अपने ब्लॉग पर लगाने के लिए एड्रैस बार स‌े अथवा दांई स‌ाइड दिए फ्रैम स‌े वीडियो का URL कॉपी करें।



अब अपने वर्डप्रैस‌.कॉम के पोस्ट एडीटर में जहाँ पर वीडियो लगाना हो निम्न कोड का प्रयोग करें। कोड कम्पोज मोड (Visual) में ही डालना है HTML (Code) में नहीं।

[youtube=VideoURL]

उदाहरण के लिए:

[youtube=http://youtube.com/watch?v=hXkZI8Eb4IY]

Google Video

गूगल वीडियो को अपने ब्लॉग पर लगाने के लिए एड्रैस बार स‌े वीडियो का URL कॉपी करें।



अब अपने वर्डप्रैस‌.कॉम के पोस्ट एडीटर में जहाँ पर वीडियो लगाना हो निम्न कोड का प्रयोग करें।

[googlevideo=VideoURL]

उदाहरण के लिए:

[googlevideo=http://video.google.com/videoplay?docid=4855406967026899599]

हाल ही में वर्डप्रैस‌.कॉम ने इस काम के लिए एक अन्य तरीका भी उपलब्ध कराया है।

पोस्ट एडीटर में नीचे स्क्रॉल कर Video टैब पर क्लिक करें। इस‌से निम्न बॉक्स‌ आ जाएगा।
इस बॉक्स में YouTube/Google वीडियो का URL डाल दें तथा Send to Editor बटन पर क्लिक करें। इससे पोस्ट एडीटर में अपने आप उपयुक्त कोड आ जाएगा।

बस पोस्ट पब्लिश कर दें, हो गया।

वर्डप्रैस.कॉम ने अपना भी एक वीडियो प्लेयर निकाला है पर इसके लिए आपको अपनी अंटी स‌े पैसे खर्चने होंगे। इसमें आपको अपना वीडियो वर्डप्रैस.कॉम के स‌र्वर पर अपलोड करना होगा, फाइल स‌ाइज लिमिट 70 एमबी है। इस‌के बारे में अधिक इसलिए नहीं लिख रहा क्योंकि मुझे नहीं लगता कोई इस काम के लिए अंटी से पैसे खर्चना चाहेगा जबकि यह मुफ्त में हो स‌कता है।

क्या ही अच्छा हो यदि वर्डप्रैस.कॉम अपने ऑडियो प्लेयर की तरह डायरैक्ट वीडियो फाइल लिंक को एम्बैड और प्ले करने की स‌ुविधा दे ताकि वीडियो Internet Archive पर अपलोड कर उसको स‌ीधे ही वॉडकास्ट किया जा स‌के। उसके बाद ही वॉडकास्टिंग की बात जमेगी।

मेरी पसंद (फुरसतिया इश्टाइल में)

जाते जाते स‌ुनिए देखिए स‌ुपरहिट फिल्म गुप्त का गीत - दुनियाँ हँसीनों का मेला। यह गीत आज स‌े कोई दस स‌ाल पहले 1997 में जब मैं दस‌वीं कक्षा में हुआ करता था तो बहुत ही प्रसिद्ध था। हर कोई इसे ही गुनगुनाता नजर आता था।

Wednesday 1 August 2007

नॉन-यूनिकोड प्रोग्राम - हिन्दी कंप्यूटिंग के मार्ग की दूसरी प्रमुख बाधा

Non-Unicode programs - Second main hurdle in path of Hindi Computing

पिछली पोस्ट में मैंने हिन्दी के मार्ग की एक प्रमुख बाधा के रुप में विंडोज 98/ME की चर्चा की थी, इस पोस्ट में दूसरी प्रमुख बाधा नॉन-यूनिकोड प्रोग्रामों की चर्चा कर रहा हूँ।

हम सब जानते हैं कि यूनिकोड के प्रचलन में आने से पहले एक समय ऐसा भी था जब हिन्दी में टाइप करने के लिए रेमिंगटन टाइपिंग जानना आवश्यक था, फिर यूनिकोड आया लेकिन शुरुआत में केवल इसमें इनस्क्रिप्ट लेआउट में ही टाइपिंग होती थी। फिर आए फोनेटिक (ट्रांसलिट्रेशन) औजार जिन्होंने हिन्दी टाइपिंग को जन-जन तक पहुँचा दिया। बाद में बैकवर्ड कंपैटिब्लिटी के तौर पर रेमिंगटन लेआउट आधारित कीबोर्ड भी यूनिकोड औजारों में शामिल हो गए ताकि पुराने टाइपिस्टों को दिक्कत न हो।

यूनिकोड की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सबको अपनी पसंद की टाइपिंग विधि के प्रयोग की आजादी देता है। लगभग सभी टाइपिंग विधियों के लिए यूनिकोड टाइपिंग औजार बनाए जा चुके हैं।

यूनिकोड के आगमन के बाद से बहुत से सॉफ्टवेयरों, साइटों तथा ऑनलाइन सेवाओं का यूनिकोडकरण शुरु हुआ। आज इनमें से अधिकतर यूनिकोड सक्षम हैं लेकिन अब भी अक्सर ऐसा होता है कि हम कोई सॉफ्टवेयर या ऑनलाइन सेवा में हिन्दी टाइप करने लगते हैं तो डब्बे या प्रश्नचिन्ह नजर आने लगते हैं अर्थात वह यूनिकोड का समर्थन नहीं करता।

अब इनमें से कई जगह तो फिर हिन्दी में टाइप करना असंभव ही हो जाता है लेकिन जहाँ पर फॉन्ट बदलने की सुविधा है वहाँ नॉन-यूनिकोड फॉन्ट जैसे कृतिदेव आदि चुनकर हिन्दी टाइप की जा सकती है। यद्यपि इससे वह बात नहीं बनती जो यूनिकोड में है, इसमें डाटा-प्रोसैसिंग जैसे सर्चिंग-सॉर्टिंग आदि नहीं की जा सकती।

इस तरह के प्रोग्राम कई हैं जो यूनिकोड का समर्थन नहीं करते उदाहरण के लिए बहुत से ग्राफिक्स प्रोग्राम, डीटीपी पैकेज आदि। वैसे तो बहुत सी चीजें हैं जो यूनिकोड सपोर्ट नहीं करती, उनके लिए हम सबस्टीच्यूट प्रोग्राम/सेवा का प्रयोग कर लेते हैं लेकिन कुछ प्रोग्राम ऐसे हैं जिनके लिए विकल्प मिलना मुश्किल है जो कि उन्हीं जितनी क्षमता से काम कर सके। उदाहरण के लिए: फोटोशॉप और पेजमेकर। इन दोनों का विशेष उल्लेख करने का कारण ये है कि ग्राफिक्स और डीटीपी के क्षेत्र में ये दोनों सॉफ्टवेयर सर्वाधिक प्रयोग किए जाते हैं बल्कि अगर यह कहें कि वर्तमान में इन दोनों के बिना इन क्षेत्रों की कल्पना ही नहीं की जा सकती, तो ये गलत न होगा। बाकी दुनिया को छोड़ भी दें तो हमारे भारत में इनका घर से लेकर ऑफिस, दुकानों, कंपनियों और मीडिया तक इनका प्रसार है। ग्राफिक्स का सब जगह काम मुख्यतः फोटोशॉप और कोरल ड्रा में होता है जबकि डीटीपी का पेजमेकर और क्वार्क एक्सप्रैस में। छोटे मोटे काम के लिए तो विकल्पों का प्रयोग किया जा सकता है पर प्रोफैशनल स्तर पर कार्य के लिए इनके विकल्प नहीं।

इन दोनों सॉफ्टवेयरों को एडोब बनाती है। पता नहीं इन एडोब वालों को यूनिकोड से क्या दुश्मनी है। यह हाल तब है जबकि फोटोशॉप की डेवलपर टीम में कई भारतीय हैं।

अब बाकी जगह आदमी भले ही अंग्रेजी से काम चला लें लेकिन ग्राफिक्स और डीटीपी में हिन्दी बिना काम नहीं चल सकता (ऐसा मेरे विद्यालय के डीटीपी ऑपरेटर जो कि काफी समय से डीटीपी/ग्राफिक्स का काम करते हैं, ने कहा)। अब ये प्रोग्राम यूनिकोड का समर्थन तो करते नहीं तो इनमें हिन्दी टाइप करने के लिए रेमिंगटन टाइपिंग का ही उपयोग होता है। अब रेमिंगटन के जानकार सिर्फ पुराने लोग हैं (कुछ अपवाद छोड़कर) जिस वजह से अधिकतर लोग इनमें हिन्दी टाइप नहीं कर पाते। ग्राफिक्स में तो फिर भी थोड़ा काम होता है जिससे कि कीमैप देखकर काम चलाया जा सकता है (जैसे बेंगाणी बंधु करते हैं) लेकिन डीटीपी में रेमिंगटन आनी जरुरी है।

अब पहले तो वैसे ही आम कंप्यूटर उपयोगकर्ता को यूनिकोड का पता होता नहीं, आज भी हिन्दी टाइपिंग के बारे में एक आम कंप्यूटर उपयोक्ता को यही मालूम है कि इसके लिए पहले हिन्दी की टाइपिंग (रेमिंगटन) सीखनी होती है। फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट प्रणालियों के बारे में बहुत ही कम लोगों को पता है (मेरे अनुमान से पूरी दुनिया में लगभग केवल १००० लोगों को, जिनमें से ५०० तो लगभग हिन्दी चिट्ठाकार हैं और बाकी के हिन्दी/इंडिक कंप्यूटिंग से जुड़े़ लोग)। इस कारण से यदि कोई व्यक्ति ग्राफिक्स/डीटीपी क्षेत्रों में कार्य करने जाता है तो उसे मजबूरन आउटडेटेड हो चुकी रेमिंगटन टाइपिंग सीखनी पड़ती है जबकि फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट सीखना इसकी तुलना में बहुत आसान है। यह एक मुख्य कारण है जिससे कि लोगों को भ्रम है कि हिन्दी में काम करना मुश्किल है।

एक आम हिन्दी प्रयोक्ता क्या कर सकता है?

» सभी अयूनिकोडित प्रोग्रामों के विकल्पों का उपयोग किया जाए जो कि यूनिकोड समर्थित हैं। परंतु इसमें फिर वही दिक्कत है कि कुछ प्रोग्रामों के लिए उन जितने सक्षम सब्स्टीच्यूट नहीं हैं।

» सभी हिन्दी प्रयोक्ता एडोब वालों को उनकी फोरम, संपर्क-सूत्रों आदि सभी साधनों द्वारा अनुरोध करें कि फोटोशॉप, पेजमेकर आदि में यूनिकोड समर्थन सक्षम किया जाए। वर्तमान में इन दोनों के आने वाले संस्करणों के बीटा संस्करण जारी हैं, हम सब को चाहिए कि एडोब वालों तक अपनी बात पहुचाएँ ताकि नए संस्करणों में यूनिकोड का समर्थन हो सके। विशेषकर इनकी डेवलपर टीम के जो भारतीय सदस्य हैं उनको इस बात से अवगत कराया जाना चाहिए कि इन उत्पादों में यूनिकोड समर्थन आने से भारतीय भाषाओं को कितना भला होगा। साथ ही इससे भारत में एडोब का बाजार भी बढ़ेगा।

वर्तमान में इस समस्या का क्या हल उपलब्ध है?

कुछ ही समय पूर्व सृजनशिल्पी जी से इस बारे एक दिन बात हुई। अब वो तो जिद पर अड़ गए कि भाई पेजमेकर वगैरह में इनस्क्रिप्ट, फोनेटिक आदि हेतु टाइपिंग लेआउट होता है। मैंने कहा कि मुझे तो कोई ऐसा विकल्प कभी दिखा नहीं, साथ ही होता तो सब हिन्दी वाले साथियों को पता न होता क्या। खैर उनसे काफी देर बात हुई तो मालूम पड़ा कि इस काम के लिए ISM नामक औजार होता है। वो मुझे ठीक से समझा न सके कि यह होता क्या है, तब मैंने गूगलदेव की मदद से काफी सर्च किया तो सीडैक की साइट तथा एक-दो अन्य जगहों पर इस बारे जानकारी मिली जिसकी मदद से मैंने ये लेख लिखा। ISM एक तरह का इंटरफेस है जो इन प्रोग्रामों के लिए IME (इनपुट मैथड एडीटर) की भांति कार्य करता है।

अब दिक्कत ये है कि ये मुफ्त सॉफ्टवेयर नहीं, इसलिए आम आदमी के बस में इसे खरीदना नहीं है। इसका कोई ट्रायल तक उपलब्ध नहीं जिससे कि कोई इसका परीक्षण कर इसे लेने के बारे में विचार कर सके। इसके अलावा ये केवल कुछ चुनिंदा सॉफ्टवेयरों पर ही काम करता है। इन वजहों से ये उपरोक्त समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

फोनेटिक टाइपिंग वालों के लिए एक तरीका है बरहा डायरैक्ट में नॉन-यूनिकोड टाइपिंग द्वारा। बरहा में अयूनिकोडित टाइपिंग के लिए BRH-Devanagari नामक नॉन-यूनिकोड फॉन्ट होता है। इसके प्रयोग से टाइपिंग की जानकारी इस लेख में दी गई है। परंतु इसमें केवल एक ही फॉन्ट का प्रयोग किया जा सकता है।

एक अन्य टूल है सीडैक का GIST-TT Typing Tool इसमें तीनों लेआउट उपलब्ध हैं - फोनेटिक, इनस्क्रिप्ट तथा रेमिंगटन। यह एक नॉन-यूनिकोड इनपुट मैथड एडीटर है। इसमें चार फॉन्ट उपलब्ध हैं लेकिन वो सब बिल्कुल बेकार से हैं और डीटीपी जैसे कामों के लिए उपयुक्त नहीं।

तो एक बात तो तय है कि जो भी अयूनिकोडित इनपुट मैथड एडीटर होगा, वो सब नॉन-यूनिकोड फॉन्टों के साथ कार्य नहीं कर सकता, बल्कि केवल अपने ही कुछ विशिष्ट फॉन्टों के साथ करेगा।

अब डैवलपर इस दिशा में कुछ कार्य कर सकते हैं

बहुत पहले मैं सोचता था कि फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट लेआउट के लिए नॉन-यूनिकोड फॉन्ट बनाए जाएँ लेकिन बाद में समझ आया कि यह संभव नहीं क्योंकि इनमें मात्राएँ तथा संयुक्ताक्षर आदि विभिन्न कुँजियों के संयोजन से बनते हैं। फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट के लिए यह काम इनपुट मैथड एडीटर और विशेष फॉन्टों के संयोग से ही संभव है।

मेरा विचार है कि एक नॉन-यूनिकोड इनपुट मैथड एडीटर बनाया जाना चाहिए तथा उसके साथ काम करने के लिए अधिक से अधिक फॉन्ट भी। जहाँ तक मैं समझता हूँ यह कार्य पूर्ण रुप से संभव है क्योंकि बरहा डायरैक्ट और जिस्ट वाले उपरोक्त टूल का उदाहरण सामने है। इसके अतिरिक्त विनय जी ने एक दिन बातचीत में बताया कि पुराने स‌मय में जब यूनिकोड नहीं आया था तो नॉन-यूनिकोड फॉन्टों के लिए IME जैसे TSR टूल होते थे जो कि केवल फॉन्ट विशेष हेतु ही कार्य करते थे। कृतिदेव शायद पहला ऎसा फॉन्ट था जिससे बिना किसी TSR के सीधे ही टाइप कर स‌कते थे।

अब फिलहाल इस कार्य को करने में सक्षम एक ही व्यक्ति मेरी नजर में आते हैं - कैफे़हिन्दी वाले मैथिली शरण गुप्त जी। मैथिली जी की कंपनी ने हिन्दी के काफी सॉफ्टवेयर बनाए हैं जिनमें हिन्दीपैड तथा कैफेहिन्दी टाइपिंग टूल आदि शामिल हैं। इसके अलावा नॉन-यूनिकोड फॉन्टों में सर्वाधिक प्रचलित कृतिदेव श्रेणी के फॉन्ट भी उन्हीं की कंपनी द्वारा बनाए गए हैं।

अब यदि मैथिली जी कैफेहिन्दी टूल का नॉन-यूनिकोड संस्करण बना सकें अथवा इसी टूल में ऐसी सुविधा जोड़ सकें तो काम बन सकता है। इस टूल को कृतिदेव श्रेणी के सारे फॉन्टों के साथ काम करने लायक बनाया जाए। यदि ऐसा हो जाए तो सभी अयूनिकोडित प्रोग्राम, जिनमें फॉन्ट बदलने की सुविधा उपलब्ध है, उनमें फोनेटिक तथा इनस्क्रिप्ट के उपयोक्ता भी हिन्दी टाइप कर सकेंगे।

मेरे विचार से यह एक क्रांतिकारी कदम हो सकता है जो डीटीपी के क्षेत्र में हिन्दी के लिए बहुत ही उपयोगी होगा। ग्राफिक्स और डीटीपी के क्षेत्र में नॉन-यूनिकोड फॉन्टों से कोई खास नुक्सान भी नहीं खासकर ग्राफिक्स में। बजाय कि एडोब वालों तथा बाकी सभी कंपनियों के भरोसे इंतजार में बैठे रहने के कि कब वे अपने सॉफ्टवेयर को यूनिकोड सक्षम बनाएंगे यह कदम अधिक व्यावहारिक है।

मैथिली जी क्या यह संभव है, आपके इस विषय में क्या विचार हैं?

P.S: इण्डिक कम्प्यूटिंग विशेषज्ञ हरिराम जी ने उपरोक्त प्रश्नों के उत्तर अपने चिट्ठे पर विस्तृत रुप से इस पठनीय लेख में दिए हैं - डीटीपी व ग्राफिक्स सॉफ्टवेयरों में भारतीय युनिकोड अनुकूलता

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