Sunday 21 October 2007

गूगल इण्डिक ट्राँसलिट्रेशन अब तमिल, तेलुगू, कन्नड़ तथा मलयालम में भी

गूगल के टाइपिंग औजार में जुड़ी चार और भाषाएँ

Google Indic Transliteration now in five Indian Languages - Hindi, Tamil, Telugu, Kannada, Malayalam (हिन्दी, தமில, తేలుగూ, ಕನ್ನಡ‌, മലയാലമ)

अब गूगल बाबा लाए हैं इण्डिक टाइपिंग टूल में चार और भाषाएँ। गूगल इण्डिया लैब्स की डाक सूची (मेलिंग लिस्ट) पर काफी समय से दक्षिण भारतीय भाषियों द्वारा इण्डिक ट्राँसलिट्रेशन टूल को विभिन्न दक्षिण भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करवाने की मांग की जा रही थी। इसी को देखते हुए इण्डिया लैब्स ने तमिल, तेलुगू, कन्नड़ तथा मलयालम भाषाएँ उपलब्ध करवाई हैं।

Google Indic Transliteration_1

डिफॉल्ट भाषा हिन्दी ही है तथा अन्य भाषाओं हेतु ऊपर लिंक उपलब्ध करवाए गए हैं।

Google Indic Transliteration_2

उम्मीद है भविष्य में इसमें पञ्जाबी, गुजराती, बांग्ला, उड़िया, सिंहली (ਪਂਜਾਬੀ, ગુજરાતી, বাংগ্লা, ଉଡ଼ିୟା, ම඿ංඹ඲ව) आदि और भाषाएँ भी जुड़ेंगी। जरुरत है इसके लिए जरा आवाज उठाने की।

जय गूगल बाबा, जय इण्डिया लैब्स! :)

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Saturday 13 October 2007

किसी वैबपेज या ब्लॉग पोस्ट का फॉण्ट साइज बढ़ाने के लिए आसान ट्रिक

अक्सर कई साइटों या ब्लॉगों पर फॉण्ट का आकार काफी छोटा होता है, जिससे वैबपेज या ब्लॉग पोस्ट पढ़ने में काफी असुविधा होती है, ऊपर से जिन की नजर कमजोर हो उन्हें तो दुगुनी समस्या। यह समस्या आमतौर पर हिन्दी साइटों/चिट्ठों के साथ ज्यादा होती है। अक्सर पाठक ऐसी पोस्टों पर फॉण्ट साइज बढ़ाने का अनुरोध करते देखे जाते हैं। अब ये तो ब्लॉगर/वैबसाइट स्वामी की इच्छा कि वो फॉण्ट साइज बढ़ाए या नहीं लेकिन हम एक आसान ट्रिक से वैबपन्ने का फॉण्ट साइज बढ़ाकर उसे पढ़ने योग्य बना सकते हैं।

इसके लिए अपने कुञ्जीपटल (Keyboard) की कण्ट्रोल (CTRL) कुञ्जी (Key) दबाए रखें तथा माउस के स्क्रॉल बटन (बीच वाला व्हील बटन) को अपने से विपरीत दिशा में (मॉनीटर की ओर) घुमाएँ।

उदाहरण के लिए निम्न ब्लॉग-पोस्ट देखिए।

पहले:-

How to inscrease font size_1

बाद में:-

How to inscrease font size_3

है न आसान तरीका, मैं अक्सर इसका इस्तेमाल करता हूँ और इसे काफी उपयोगी पाता हूँ। आप भी आजमा कर देखें।

Wednesday 10 October 2007

गुयाना में हिन्दी है पर देवनागरी गुम

कुछ समय से भोमियो तथा चिट्ठाजगत.कॉम द्वारा द्वारा हिन्दी चिट्ठों को रोमनागरी में पढ़ने के लिए लिप्यंतरण (Transliteration) सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ साथी इस सुविधा को बेकार बताने पर तुले हुए हैं, वे दरअसल इसका मर्म नहीं समझते। अब जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूँ दुनिया में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, ज़िम्बाब्वे, दक्षिण अफ़्रीका, मालदीव, मॉरीशस, फ़िजी, गुयाना, दुबई, मलेशिया, सूरीनाम, बर्मा (म्यांमार) आदि से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान आदि तक कई देश हैं जहाँ के लोग हिन्दी तो समझ लेते हैं लेकिन देवनागरी नहीं पढ़ सकते। ऐसे लोगों के लिए यह सुविधा निश्चय ही उपयोगी होगी।

उदाहरण के लिए मैं दैनिक जागरण में कुछ माह पूर्व छपे एक समाचार का संदर्भ दे रहा हूँ।

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कैरीबियाई देश गुयाना में भारतीय मूल के ४३% से ज्यादा लोग बसे हुए हैं। वे धड़ल्ले से संस्कृत में श्लोक सुनाते हैं, भजन गाते हैं और हिन्दी फिल्मों के मुरीद हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि लोग हिन्दी को रोमन लिपि से जिन्दा रखे हुए हैं और देवनागरी लिपि अपना अस्तित्व खो चुकी है।

Guana Island - चित्र को मूल आकार में देखने हेतु क्लिक करें

डेढ़ सौ साल पहले गिरमिटिया मजदूर के रुप में ये भारतीय गुयाना गए और फिर वहीं बस गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से गए इन भारतीयों ने अपने धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाज को आज भी मानो सीने से लगा रखा है। उनके घरों में हिन्दी बोली जाती है खासकर नाती, पोते का दादा, दादी और नाना, नानी से आज भी हिन्दी में सम्वाद होता है। बच्चों का नामकरण पण्डित कराते हैं और उनके नाम हिन्दी में रखे जाते हैं पर वे देवनागरी में नहीं, बल्कि रोमन हिन्दी में लिखे जाते हैं मसलन अंग्रेजी के अक्षर से हिन्दी का उच्चारण किया जाता है। उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के साथ गए प्रतिनिधिमण्डल की अगवानी करने आई राधा प्रसाद अली ने बताया कि यहाँ बड़े धूम-धाम से दीवाली और होली मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान करके पूजा, पाठ किया जाता है और इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मन्दिरों में सवेरे, शाम पूजा, अर्चना होती है जिसमें सभी भजन कीर्तन करते हैं। गायत्री मन्त्र का धड़ल्ले से जाप करने वाली अली ने अपने मुसलमान दोस्त से छह वर्ष पहले हिन्दू रीति रिवाज से विवाह रचाया और फिर ससुराल में निकाहनामा पढ़वाया। उसकी साढ़े तीन साल की बिटिया है। पण्डित ने उसकी बिटिया का नाम पार्वती रख दिया। जॉर्ज टाउन और उसके आसपास के इलाकों में जाने पर पता लगा कि अगर किसी हिन्दू के घर की पहचान करनी हो तो बस एक बात का ध्यान रखना काफी है। जिस घर के सामने बांस में ध्वज फहराता दिखे उसे आँख मूँदकर हिन्दू का घर मान लीजिए मसलन वह भारतीय मूल का है। दरअसल यहाँ भारतीय और हिन्दू एक दूसरे के पर्याय के रुप में जाने जाते हैं। पेशे से ड्राइवर राम दशरथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश से यहाँ आए थे। वह किस शहर या गाँव के थे राम दशरथ को इसका पता नहीं है, लेकिन अब उसके मन में कभी कभी भारत जाने की इच्छा होती है। राम दशरथ ने कहा कि अब तो हम गुयाना के वासी हैं और हमें इस पर गर्व है। यहाँ पर अफ्रीका, पुर्तगाल और चीन के लोग रहते हैं। उनके दादा परदादा भी मजदूरी करने आए थे और फिर वे यहीं पर बस गए। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कौन कहाँ से आया है।

गुयाना के एक बड़े डिपार्टमैण्टल स्टोर में काम करने वाली अनिता ने बड़े आत्मविश्वास से कहा कि 'यू हैव कम फ्रॉम इण्डिया', सबने एक साथ हामी भरी। फिर क्या था अनिता उनके साथ हो ली और खरीददारी में उनकी मदद करने के साथ हिन्दी में सम्वाद करती रही। उसने स्वीकार किया कि देवनागरी के बारे में उसे पता नहीं हाँ वहाँ अंग्रेजी के अक्षर से हिन्दी और संस्कृत में सम्वाद करते हैं। आलम यह है कि रामायण, गीता, दुर्गा सप्तशती और देवी, देवताओं के लिए गाई जाने वाली आरती की किताबें रोमन हिन्दी में बाजारों में उपलब्ध हैं।

समाचार: २० नवम्बर २००६, दैनिक जागरण से साभार

चित्र: वर्ल्ड ऑफ आईलैण्ड्स से साभार

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उपरोक्त समाचार पढ़कर वाकई अफ़सोस होता है कि कई देशों में देवनागरी या तो लुप्त हो चुकी है या लुप्त होने की कगार पर है। खैर, उपरोक्त उदाहरण से भोमियो और चिट्ठाजगत.कॉम आदि की लिप्यंतरण सेवाओँ की सार्थकता सिद्ध होती है।

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Sunday 7 October 2007

गूगल बाबा ने खोले हिन्दी सर्च के नए द्वार

गूगल खोज पन्ने पर हिन्दी में गूगल सुझाव

Now Google Suggest in Hindi on Google India (Hindi) page

गूगल बाबा ने जबसे इण्डिया लैब खोली है नित नए तोहफे लेकर आ रहा है। बहुत समय से मेरा और कई हिन्दी चिट्ठाकारों का पुराना स्वप्न है कि गूगल का हिन्दी लिखने का औजार इण्डिक ट्रांसलिट्रेशन (Indic Transliteration) गूगल के मुख्य सर्च पन्ने पर आए। इस दिशा में गूगल धीरे-धीरे कदम बढ़ा रहा है। अब गूगल भारत के हिन्दी खोज पन्ने पर लिप्यंतरण (Transliteration) आधारित गूगल सुझाव (Google Suggest) सुविधा हिन्दी में आ गई है।

Google India Labs_Google Suggest in Hindi

इसके लिए गूगल भारत (हिन्दी) पर जाएँ। यहाँ रोमन में कोई शब्द लिखें, यह ध्वन्यात्मक रुप से (Phonetically) हिन्दी में लिप्यंतरित होकर गूगल सुझाव प्रदान करेगा।

Google Suggest in Hindi_Akshargram

बस किसी भी सुझाव-शब्द पर क्लिक करके संबंधित खोज पन्ने पर जाया जा सकता है।

यह कदम निश्चय ही क्रांतिकारी है, इससे अनेक लोग अंतर्जाल पर हिन्दीजगत से जुड़ेंगे साथ ही हिन्दी चिट्ठों को ट्रैफिक ही ट्रैफिक मिलेगा।

जरा देखिए यदि कोई Hindi Blog शब्द ढूंढे तो किस तरह के सुझाव मिलेंगे।

Google Suggest in Hindi_Hindi Blog

अब निश्चय ही इन शब्दों को खोजने पर वह हिन्दी चिट्ठों तक पहुँचेगा और चिट्ठाजगत से पाठक तथा चिट्ठाकार के तौर पर जुड़ेगा। सिर्फ ये ही शब्द नहीं बल्कि लगभग सभी हिन्दी के सर्च कीवर्ड उसे अंततः हिन्दी चिट्ठों तक जरुर लाएँगे।

अब जरा देखिए, मेरा नाम Shrish लिखने पर क्या सुझाव मिलते हैं।

Google Suggest in Hindi_Shrish

आप भी अपना नाम और कुछ और शब्द आजमा कर देखें, अच्छा टाइमपास है। :)

तो इस तरह हम देख सकते हैं कि ये नई सुविधा हिन्दी चिट्ठों के लिए वरदान साबित होने वाली है। अभी तक गल सर्च मुख्यतः रोमन कीवर्ड्स से ही आती है क्योंकि आम इंटरनैट प्रयोक्ता को हिन्दी टाइपिंग की जानकारी नहीं है। लेकिन अब उम्मीद है कि हालात बदलेंगे। साथ ही इस कदम से हिन्दी में व्यावसायिक चिट्ठाकारी की भी नई उम्मीद जगती है क्योंकि चिट्ठों से कमाई भी उन पर आने वाले ट्रैफिक के ही समानुपाती होती है।

देखते रहिए, आगे-आगे गूगल बाबा क्या-क्या लेकर आते हैं। उम्मीद है गूगल का इण्डिक टूल मुख्य सर्च पेज और जीमेल (GMail) तथा गूगल टॉक (Google Talk, GTalk) आदि में आने में अब देर नहीं।

 Technorati tags: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Monday 1 October 2007

चिट्ठाजगत.कॉम - हिन्दी चिट्ठों का पहला रोमन एग्रीगेटर

आ गया हिन्दी चिट्ठों का संपूर्ण ज्यूकबॉक्स

Chitthajagat.com - First Roman aggregator of Hindi Blogs

बी.एस.सी में हमारे भौतिकी के एक प्रोफेसर कहा करते थे कि साइंटिस्ट का ब्रेन बहुत फर्टाइल होता है, हमेशा नए पंगे सोचता रहता है। यही बात हम टैक्नोक्रैट्स के बारे में भी कह सकते हैं। हमारे आलोक दादा और विपुल भैया अब लेकर आए हैं चिट्ठाजगत.कॉम - हिन्दी चिट्ठों का रोमन एग्रीगेटर

 Chitthajagat_com_ePandit

चिट्ठाजगत.कॉम ने भोमियो के विचार को आगे बढ़ाया है, यह हिन्दी चिट्ठों का संकलक (aggregator) है जिसका अंतरापृष्ठ (interface) अंग्रेजी में है, इसके मुख्य पृष्ठ पर चिट्ठों का सारांश दिखता है। यदि पोस्ट के शीर्षक को क्लिक करें तो यह पोस्ट को हिन्दी में पढ़ने हेतु सीधे चिट्ठे पर ले जाएगा, यदि नीचे Read more... पर क्लिक करें तो पूरी पोस्ट को रोमन हिन्दी में दिखाएगा। इसकी लिप्यंतरण सेवा अपेक्षाकृत सरल है, हर वर्ण के साथ अनावश्यक a नहीं जोड़ती।

यह सभी पोस्टों को एक ही जगह पूरी पढ़ने के लिए उपलब्ध कराता है इसकी यही विशेषता देखकर मेरे दिमाग में आया - हिन्दी चिट्ठों का ज्यूकबॉक्स। चूंकि अभी यह बीटा अवस्था में ही है, अतः उम्मीद है कि चिट्ठाजगत.कॉम में इसके बड़े भाई चिट्ठाजगत.इन की तमाम खूबियाँ जल्द ही शामिल हो जाएँगी।

इसका क्या फायदा होगा

यद्यपि मैं स्वयं तथा अधिकतर चिट्ठाकार रोमनागरी पढ़ना पसन्द नहीं करते लेकिन इस सेवा का कई तरह से लाभ होगा।

पहली बात तो यह कि इंटरनैट पर हिन्दी की मौजूदगी के बारे में बहुत से लोग (अधिकतर कहना बेहतर है) नहीं जानते, कुछ जानते भी होंगे तो उन्हें हिन्दी टाइप करना नहीं आता। सर्च अधिकतर अंग्रेजी में ही होती है जिस कारण हिन्दी चिट्ठों को गूगल से खास ट्रैफिक नहीं मिल पाता। ऐसे लोग इस रोमन साइट के जरिए हिन्दी चिट्ठों तक पहुँच सकेंगे। भोमियो की लिप्यंतरण (transliteration) सेवा के शुरु होने के बाद हिन्दी चिट्ठों पर गूगल सर्च काफी बढ़ी है क्योंकि गूगल लिप्यंतरित पेजों को भी सूचीबद्ध (index) करता है और वो रोमन सर्च परिणामों में प्रकट होते हैं। दूसरी ओर पुराने विण्डोज ९८ युक्त ऑपरेटिंग सिस्टम वाले साइबर कैफे जहाँ इंटरनैट पर हिन्दी सुलभ नहीं, वहाँ भी ये उपयोगी साबित होगा।

इसके अलावा विश्व के अनेक हिस्सों जैसे मॉरीशस, फिजी, गुयाना आदि से लेकर अफगानिस्तान आदि तक में हिन्दी बोली-समझी जाती है लेकिन देवनागरी नहीं। और तो और भारत में ही बहुत से दूसरे राज्यों के लोग भी हिन्दी समझ सकते हैं पर देवनागरी नहीं पढ़ सकते ठीक वैसे ही जैसे हम में से कई लोग उर्दू, पञ्जाबी समझ सकते हैं पर पढ़ नहीं सकते। इसके अतिरिक्त बहुत से विदेशी हिन्दी छात्र, संस्थान आदि भी हिन्दी के प्रति उत्सुक हैं। चिट्ठाजगत.कॉम ऐसे सभी लोगों को हिन्दी से जोड़ेगा। इससे निश्चय ही हिन्दी चिट्ठों की पाठक सँख्या में वृद्धि होगी और ट्रैफिक बढ़ेगा।

इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण बात जिस ओर चिट्ठाकार अक्सर ध्यान नहीं देता। हमारे हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रचलित शब्द एक सीमित समूह (closed group) की शब्दावली (jargon) जैसी है जिस कारण हिन्दीजगत में नया पाठक हिन्दी साइटों का इंटरफेस नहीं समझ पाता। उदाहरण के लिए मैं जब शुरु में चिट्ठाजगत में आया था तो मैं चिट्ठा, प्रविष्टि, कड़ी आदि शब्द समझ नहीं पाता था जबकि मेरी हिन्दी पहले से काफी अच्छी थी। इस कारण से नए पाठकों को हिन्दी साइटें अजीब लगती हैं और वे हिन्दीजगत से दूर हो जाते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि एग्रीगेटर, डायरैक्ट्री जैसी साइटों का इंटरफेस अंग्रेजी में भी होना चाहिए। एक बार अंग्रेजी में प्रयोग शुरु करने पर बंदा धीरे-धीरे खुद ही हिन्दी समझने और प्रयोग करने लगेगा।

और एक मजेदार बात

कल शाम को जब चिट्ठाजगत.कॉम देखा तो मैंने सोचा कि यह चिट्ठाजगत.इन का ही अंग्रेजी अंतरापृष्ठ है। मैं विपुल जी को सुझाव देने लगा कि इसमें रोमन लिप्यंतरण की सुविधा भी उपलब्ध कराइए, तो वो बोले कि भाई यही तो किया है। तब ध्यान से देखा तो इसकी खूबियाँ पता लगी।

विपुल जी तथा आलोक दादा को बहुत-बहुत आभार इतनी शानदार सेवा उपलब्ध कराने के लिए। ईश्वर करे आपका दिमाग ऐसे ही उपजाऊ बना रहे। :)

पुनश्च: अभी देखता हूँ कि मेरे कल दिए कुछ सुझाव चिट्ठाजगत.कॉम पर लागू किए गए हैं, विपुल जी का आभार, और कुछ सुझाव भी जल्द भेजूँगा।

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